पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/८०

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सिन्तान्त और अध्ययन ४२ करता है । यही क्षति-पूत्ति का भाव उराके सारे जीवन को प्रभावित करता है। इस हिसाब से साहित्य-निर्माण हमारी किसी क्षति-पत्ति के रूप में ही होता है। इसके कुछ उदाहरण भी दिये जा सकते हैं। अन्धे लोगों की कल्पना अधिक बढ़ जाती है क्योंकि वे उसी के द्वारा अपनी क्षति-पूर्ति करते हैं। अक्षि- हीन सूर और मिल्टन इससे प्रत्यक्ष प्रमाण है । विथोवियन भी अन्धा था। . कबीर को अपने जुलाहेपन का हीनता-गाव था और इसीलिए वे कह उठते थं -'तू बाम्हन मैं काशी का जुलाहा'-इसी के कारण उनमें कुछ अहंभाव भी बढ़ा हुआ था। वे हिन्दू-मुसलमान दोनों को फटकारते और अपने को देवताओं . तथा मुनियों से श्रेष्ठ मानते थे। उन्होंने अपनी 'झीनी-झीनी बीनी चदरिया'. में दाग नहीं लगने दिया था। जायसी को भी अपनी कुरूपता का गर्व था :..... 'चाँद जैस जग विधि औतारा । दोन कलंक, कीन्ह उजियारा ॥ -पदमावत (स्तुति-खगड) तुलसी भी शायद अपनी स्त्री की डाट-फटकार से ही उत्पन्न हीनता-गाव को दूर करने के प्रयत्न में इतने बड़े कवि बन गये । भूषण को अपनी भाभी के उलाहने को पूरा करने के लिए शिवाजी का आश्रय लेना पड़ा । एउलर ने बतलाया है कि कुटुम्ब का दूसरा लड़का अपने को जीवन की धु-दौड़ में पिछड़ा हुआ पाता है और वह अपनी बुद्धि और प्रतिभा को बल से आगे निकलना चाहता है । भूषण के सम्बन्ध में यह बात किसी अंश में चरितार्थ होती है। एडलर के सिद्धान्त के मूल में प्रभुत्व-कामना है, दूसरों पर हावी होने की प्रवृत्ति । उसके सिद्धान्तों के . अनुकूल हमारे साहित्य के विभिन्न रूप इसी प्रभुत्व-कामना के फल हैं। विज्ञान, इतिहास, काव्य सभी में प्रभुत्व-कामना की प्रवृत्ति परिलक्षित होती है। ____ युङ्ग : युङ्ग ने कामवासना और प्रभुत्व-कामना दोनों को जीवनधारा के भिन्न-भिन्न पहलू माने हैं। उन्होंने जीवनधारा को ही मुख्यता देते हुए कहा है कि कुछ लोगों में कामवासना का प्राधान्य रहता है और कुछ में प्रभुत्व-कामना का। इसी आधार पर उन्होंने मनुष्य को अन्तर्मुखी और बहिर्मुखी नाम के दो टाइपों या प्रकारों में बाँटा है । अन्तर्मुखी लोग अपना ही ख्याल करते है, उनमें प्रभुत्व-कामना का प्राधान्य रहता है। बहिर्मुखी लोग दूसरों का अधिक ख्याल रखते हैं, वे अपने को दूसरों से शासित होना पसन्द करते हैं। उनमें प्रायः कामवासना की मुख्यता रहती है, इसका अभिप्राय यह नहीं कि .. सभी बहिर्मुखी लोग कामवासना से प्रेरित होते हैं। यह मोटा विभाजन है ।