पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/८४

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सिद्धान्त और अध्ययन । काव्यप्रकाश :-- काव्यप्रकाश में जो प्रयोजन कह गये हैं, वे गुच्छ विस्तृत हैं:- 'काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शियेतरक्षारये। सद्यः परनिवृत्तये कान्तासंमिततयोपदेशयुजे ॥' -काव्यप्रकाश (१२) . काव्य यश के अर्थ, धन के अर्थ, व्यवहार जानने के लिए अनिष्ट, निवारण के निमित्त, शान्तिजन्य आनन्द और स्त्री-के-से मृदुल उपदेश के लिए होता है। इनमें से तीन (१) 'यशसे', (२) 'अर्थकृते' और (३) 'शिवेतरक्षतये' कवि के लिए हैं और शेष सहृदय पाठक के लिए । वृत्ति से यह स्पष्ट हो जाता है कि मम्मट ने दोनों का ध्यान रक्खा है-'यथा योगं कवेः सहृदयस्य च । .. १. यशसे : यश एक प्रधान प्रेरक शक्ति है। भगवान् कृष्ण ने भी निष्काग कर्म की उक्ति को 'यशो लभस्व' (श्रीमन्नगवद्गीता, ११११३ ) से पुष्ट किया था । रधुवंशी लोग भी यश के परे न थे----'यशसे विजिगीपूणाम्' (रघुवंश, १७) । अंग्रेजी में भी कहा है.---'Fame is the last infirmity of noble ninds' अर्थात् ख्याति बड़े प्रादगियों को अन्तिम लमजोरी है । इस पर किसी ने कहा है कि छोटे आदमियों की यह पहली नागजोरी है। गालिदास और भवभूति आदि ने काव्य यश के लिए ही किया था। महामधि भवभूति ने तो समानधर्मी की प्राप्ति करने की प्रसन्नता के लिए लिखा था और वे उसके लिए अनन्तकाल तक ठहरने को तैयार थे। वे काव्य की प्रेषणीयता ( Communicability) और सामाजिकता में विश्वास रखते थे। २. अर्थकृते : काव्य के भौतिक प्रलोभनों में सबसे अधिक अर्थ गा धन है। " कहा जाता है कि प्राचीनकाल में धावक कवि को श्रीहर्ष से प्रचुर धन मिला। था। रीतिकाल के कविगण प्रायः धन के लिए ही राज्याश्रय खोजा करते थे। केशवदासजी को इक्कीस गांव माफी में लगे हुए थे। बिहारी को एक मुहर फी दोहा दी जाने की बात लोकप्रसिद्ध है । शाहनामा के लेखक फिरदौसी को भी एक शेर पर एक अशर्फी देने का वायदा किया गया था किन्तु वह उराके मरने : के बाद उस समय पाई थों जब कि उसका शव जा रहा था । उसको लड़की ने वे अशफियाँ बादशाह को ही लौटा दी थीं । इङ्गलिस्तान के प्रसिद्ध उपन्यासकार स्काट (Scott) ने अपना कर्ज चुकाने के लिए 'धेवी नोबिल्स' लिखे थे। किन्तु सब कवि धन के लोभ से प्रेरित नहीं होते । गोस्वामी तुलसीदासजी ने स्वान्तासुखाय' ही कविता. लिखी-..-'स्वान्तःसुखाय तुलसी रधुनाथगाथ भाषानिबन्धसंतिमन्जुलमातनोति'-(रामचरितमानस, बालकाय )--..और - उन्होंने प्राकृत जनों के गुण-गान के सम्बन्ध में कहा है :-...