पृष्ठ:सुखशर्वरी.djvu/६८

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श्रा उपन्यासों को लूट !!! हिन्दीभाषाके जगत्प्रसिद्ध सुलेखक श्रीकिशोरीलालगोस्वामीजी के बनाए हुए कई उपन्यास अभी हाल ही में फिर से छपे हैं। इस संम्करण में नीचे लिखे हुए उपन्यास बढ़ाकर बडी उत्तमतासे छापे गए हैं । उपन्यास-प्रेमियों को अवश्य नीचे लिखे उपन्यास यहुन जल्द जरूर मंगाकर पढ़ना चाहिए। डांकमहसूल ज़िम्ने खरीदार होगा। [१] हीराबाई [१२] लवङ्गलता [२] चन्द्रावलो [१८] हृदयहारिणी [३] चन्द्रिका [१६] तरुणतपस्विनी [४] जिन्दे की लाश [२०] स्वर्गीयकुसुम [५] इन्दुमती [२१] राजकुमार्ग [६] प्रणयिनोपरिणय [२१] मल्लिकादेवी [७] लावण्यमई [२२] जीयावेगम [८] प्रेममई [२३] लीलावती [] पुनर्जन्म [२४] इन्दिग [१०] त्रिवेणी | [२५] पन्नायाई [११] गुलबहार [२६] तारा [१२] सुखशर्वरी | [२७] माधवी-माधव [१३] कनककुसुम । [२८] लखनऊ की कत्र । [१४] कटेमूड़ की दो दो बातें।। २६] चपला, [१५] चन्द्रकिरण [३०] राजसिंह ।। [१६] याकूती तशी [३२] उपन्यास मा० पु० २) नीचे लिखी हुई गाने आदि की पुस्तकें भी गमा हाल ही में छपी हैं,(१) होली, मौसिमबहार (६) सुजानरसखान (२) होली रंग-घोली (१०) नाट्यसम्भव (३) बसन्तबहार (११) सन्ध्याप्रयोग (बड़ा) (४) चैतीगुलाब (१२) सन्ध्या संक्षेप (५) मावनसुहावन (१३) सन्ध्या भाषासहित (६ । प्रेमरत्नमाला (२४) कागिलसूत्र (७) प्रेमवाटिका DI (१५) ध्यानमञ्जरी (८) प्रेमपुष्पमाला (१६) घेदान्तकामधेनु । S u . . . / MANDAMmmon aaaaaaaaaara