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पृष्ठ:हिंदी, उर्दू और हिंदुस्तानी.pdf/१२४

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हिन्दी, उर्दू और हिन्दुस्तानी ११७ आँखों में था उनका प्यास से दम, थे पानी को देख करते मम् मम् । कल शाम तलक तो थे यही तौर पर रात है समाँ ही कुछ और। पुरवा की दुहाई फिर रही है, पळवा से खुदाई फिर रही है । बरसात का बज रहा है डंका, इक शोर है आसमाँ प' बरपा । दल के दल हवा के । कहीं कहीं हैं काले । अत्र की फ़ौज आगे आगे और पीछे हैं हैं रंगबिरङ्ग के रिसाले, गोरे हैं मेंह का है जमीन हर दड़ेड़ा, गरमी का डुबो दिया है बेड़ा । घनघोर घटाएँ छा रही हैं, जन्नत की हवाएँ आ रही हैं । बटिया है न है सड़क नमूदार, अटकल से हैं राह चलते रहवार । पानी से भरा हुआ है जलथल, है गूंज रहा तमाम जंगल | .2 करते हैं पपीछे पीहू पीहू, और मोर मंगारते हैं हर सू । मेंडक हैं जो बोलने पं' आते, संसार को सर प मन्दिर में है हर कोई य' कहता, किरपा करते हैं गुरू गुरू गिरन्थी, गाते हैं जाता है कोई मलार गाता, है देस में हुई तेरी भजन हैं उठाते । मेघराजा । कबीरपन्थी । कोई गुनगुनाता | सरवन कोई गा रहा है बैठा, छोड़ा है किसी ने हीर रांझा । रक्षक जो बड़े हैं जैन मत के, ढकने हैं दियों पर ढकते फिरते । करते हैं वो यूँ जीवों की रक्षा ता जल न बुके कोई पतंगा | मुनाजाते- वेवा से कुछ नमूना नाव सबसे अनोखे सबसे निराले, आँख से ओझल दिल के उजाले । ऐ अँधों की आँख के तारे, ऐ लँगड़े लूलों के सहारे । जहाँ की की खेनेवाले, दुख में तसल्ली देनेवाले । जब अब तब तुझसा नहीं कोई, तुझसे हैं सब तुमसा नहीं कोई । जोत हैं तेरी जल और थल में, बास है तेरी फूल और फल में । हर दिल में है तेरा बसेरा, तू पास और घर दूर है तेरा । राह तेरी दुशवार और सकड़ी, नाम तेरा रहगीर की लकड़ी । तू है अकेलों का रखवाला, तू है अँधेरे घर का उजाला ।