हिन्दी, उर्दू और हिन्दुस्तानी १५ इतिहास लेखकों ने स्वीकार कर लिया है - 'उद्- ए- नदीम' 'तारीख -नख- उदे', 'पंजाब में उर्दू' इत्यादि ग्रन्थों के विद्वान् लेखकों ने बड़ी खोल के साथ यह साबित कर दिया है कि उर्दू का सब से पुराना नाम "हिन्दी" ही है । अमीर खुसरो की 'खालिकबारी' में (जो उर्दू - हिन्दी का सबसे पुराना कोश + है), सब जगह 'हिन्दी' या 'हिन्दवी' ही आया है, उसमें उर्दू, रेखता या और किसी दूसरे नाम का कहीं भी उल्लेख नहीं है । 'खालिकवारी' में बारह बार 'हिन्दी' और पचपन बार 'हिन्दवी' शब्द का प्रयोग हुआ है । 'हिन्दी' का अर्थ है हिन्द की भाषा, और 'हिन्दवी' से मतलब है हिन्दुनों या हिन्दुस्तानियों की भाषा । इन दोनों शब्दों में 'याय - निसबती' या सम्बन्ध सूचक 'ईकार' है । यह तो साफ़ हो जाहिर है, इससे किसी को इन्कार नहीं हो सकता । अमीर खुसरो के इस 'हिन्दवी' शब्द से यहाँ किसी को यह भ्रान्ति न होनी चाहिये कि जाति विशेष या केवल हिन्दुओं ही की भाषा से उनका अभिप्राय है । कविवर 'सौरा' के उस्ताद 'शाह ज्ञातम' ने भी सन् १७५० ई० में 'हिन्दवी' या 'हिन्दी भाषा' शब्द, हिन्दुस्तान की भाषा के अर्थ में इस्तेमाल खालिकबारी के उदाहरण- 'हिन्दवी' बिश्वो तो नाम चरखा बेचारा पीरजन, गोयन्द नाम रहदा दर हिन्दवी बचन । सुश्ककाफूरस्त कस्तूरी कपूर, 1 हिन्दवी आनन्द शादी ओ सरूर संग पाथर जानिये बरकन उठाव, अस्प मां हिन्दवी घोड़ा चलाव । आईना आरसी कि दरो रूए बिनगरी, सेवा वहिन्दवी की बुवद नाम चाकरी देहीम ताजो अफसर दर हिन्दवी मुकट, जागे बुरीदा पर-रा तू जान काग कर | तप लर्जा दर हिन्दवी आमद जूड़ी ताप, दर्दे-सर आमद सिर की पीड़ा तग है धाप । 2 जम्ब गुनहजो कहिये दोष, खशमो-गजब दर हिन्दवी रोष ।
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