हिन्दी, उर्दू और हिन्दुस्तानी दु और ठगमार रहजन हुस्न राहे- इश्क़ में. नक़द जानोजिन्स दिल के दखल क्या निरचाह का । ६१ ( पृष्ठ २४६ ) न दे दिल आतिश रुखसार पर सौदा तू अब क्योंकर, वो शोला देखकर मैं हो गया चितभंग आतिश का । ( पृष्ठ २५० ) गहे खूने-जिगर गह अश्क्न गाहे लखते-दिल यारो, किसूने भी कहीं देखा है य' बिस्तार रोने का । आ खुदा के वास्ते इस बाँकपन से दरगुजर कल मैं सौदा यूँ कहा दामन गहकर यार का ! सुख पर य' गोशवारा मोती का जलवागर है, जैसे किरान बाहम हो माह मुश्तरी का | る ( पृष्ठ २५१ ) (पृष्ठ २५२ ) ( पृष्ठ २५४ ) ( पृष्ठ २५६ ) आने से फ़ौजे खत के न हो दिल कँ मुखलिसी, बँधुश्रा हैं जुल्फ का य' छुटाया न जायगा | ލ पैकाँ जो तन में खटके है सो इलाज उसका काँटे का पर बिरह के चारा नहीं खलिश का । तरकश उलेंड सीना आलम का छान मारा मिजगाँ के बान ने तो अर्जुन का बान मारा | , ( पृष्ठ २५७ ) लब ज़िन्दगी में कब मिले इस लब से ऐ कुलाल सागर हमारी खाक को मथ करके गिल बना । ( पष्ठ २५६ ) ( पृष्ठ २६४ )
पृष्ठ:हिंदी, उर्दू और हिंदुस्तानी.pdf/९८
दिखावट