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(२२७)
| तारा (नक्षत्र) | स्त्री० | पु० |
| देवता | ,, | ,, |
| देह | पु० | स्त्री० |
| पुस्तक | न० | उभय० |
| पवन | पु० | ,, |
| वस्तु | न० | स्त्री० |
| राशि | पु० | ,, |
| व्यक्ति | स्त्री० | पु० |
| शपथ | पु० | स्त्री ० |
तद्भव शब्द।
| तत्सम | सं० लिं० | तद्भव | हि० लि० | |
| औषध | पु० | औषधि | स्त्री० | |
| ओषधि | स्त्री० | औषधि | स्त्री० | |
| शपथ | पु० | सौंह | ,, | |
| बाहु | ,, | बॉह | ,, | |
| विदु | ,, | बूँद | ,, | |
| तन्तु | ,, | तॉत | ,, | |
| अक्षि | ,, | आँख | ,, |
[सं०—इन शब्दों का प्रयोग शास्त्री, पंडित, आदि विद्वान बहुधा संस्कृत के लिंगानुसार ही करते है।]
२६४—"अरबी, फ़ारसी, आदि उर्दू भाषा के शब्दों में भी इस हिंदी लिगांतर के कुछ उदाहरण पाये जाते हैं; जैसे, अरबी का "मुहाबरत" (स्त्रीलिंग) हिंदुस्थानी मे 'मुहावरा' (पुल्लिंग) हो गया है।" (प्लाट्स-हिंदुस्तानी-व्याकरण, पृ० २८)।
२६५—अँगरेजी शब्दों के संबंध मे लिंग-निर्णय के लिए बहुधा रूप और अर्थ, दोनों का विचार किया जाता है।