पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१०३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


'वादक बादाम तथा युक्तिसिद्ध विषयको स्वीकार करते हैं, घे हो बाद । अण्। १ कार्पास निर्मित वस्त्रादि, कपासके सूतको विचारके अधिकारी हैं। परन्तु मेरी जीत होगी. इस कपड़ा । यदर स्वार्थे गण । २ कार्पास यूक्ष, कपासका पेह । ख्यालसे मनुष्य गदि प्रमाणादि कह कर प्रमाणामासादि. ३ पदरी वृक्ष, वेरका पेड़। का प्रयोग करे, तो वाद नहीं होगा। तत्वनिर्णयके | चादर (सं० पु०) अश्वत्थ वृक्ष, पीपल का पेड़। लिये वाद-प्रतियाद हो बादलक्षणका लक्ष्य है तथा अपने वादरत (सं० त्रि०) तर्क वा मीमांसा नियुक्त । , पक्षको दृढ़ करने के लिये हेतु और उदाहरणका अधिक चादरा (सं० स्त्री० : बदरवत फलमस्त्यस्याः पदर-अच्, प्रयोग युक्तियुक्त होने के कारण वाद विचारकी जगह | ततष्टाप् । कार्यासवृक्ष, कपासका पेड़ । पर्याय - कार्पासी, अवयवको अधिकत्ताका आदर हुआ है। उदाहरण दा | सूत्रपुष्पा, बदरी, समुद्रान्ता । उपनयरूप अषयवका प्रयोग नहीं करनेसे प्रकृन अर्थ सिद्ध वावरायण (सं० पु०) बदरायणे बदरिकाश्रमे निवसतीति नहीं होता, इसीसे सूतमें पञ्चावय शब्द निर्दि हुआ| पदरायण-अण। व्यासदेव, वेदव्यास। व्यासदेव देखा। है। पञ्च अवयव शम्दके द्वारा पञ्चका न्यून परिहार हुआ | बांदरायणि (सं० पु०) बादरायणस्थापत्यमिति अपत्यायें है, पञ्चावयवकी अधिकता होनेसे उसमें दोप न हो कर एम्। १ प्यासके पुत्र शुकदेव । पादरायण एवं घरन् श्रृष्ठ ही होगा। दूसरा तात्पर्य यह भी है, कि स्वार्थे इश् । २ व्यासदेव । पञ्चाययययुक्त इस शब्द द्वारा हत्याभासका निराश तथा यादरि (सं० पु० )यादरायणके पिता । इनका मत येदान्त. -सिद्धान्तविरोधी शब्द द्वारा अपसिद्धान्तको भी निराश | दर्शनमें प्रायः उद्धत है। . किया गया है। . . . . . . . . . . पादरिफ (सं० लि. ) वदरं चिनोति इत्यर्थे दम्। बदर पादक (सं०नि०) वादयतीति बद- पिण्घुल । १ याध- चयनकर्ता, वेर धीननेवाला। कर, वाजा बजानेवाला । २,वक्ता । : ३ तक या शास्त्रार्थ | बादल (सं० लो०) मधुटिका, जेठो मधु, मुलेठो । करनेवाला, वाद-विवाद करनेवाला। चादवती (सं० स्त्रो०) एक नदीका नाम । पादचञ्चु (सं० पु०) शास्त्रार्थ करनेमें पटु; याद करने में चादयाद ( सं० पु०) तर्क, बहस ।. पक्ष। ... .. . . . वादवादिन (सं० पु०) शद वदति बद-गिनि। एक याददएड (सं० पु०) सारङ्गी आदि बाजोंके बजानेको | 'जिन'का नाम। पर्याय-आईत । कमानी। . . . . . . । वादविवाद (सं० पु०) शाब्दिक झगड़ा, बहस । पाइन (सं .) यद-णिच् स्युट । १ घाच, वाजा। बादसाधन (सं० क्लो०) १ अपकार करना २ तर्फ करना। २वाजा यशाना। वादसापर (सं० पु०) स्वर्गदेशका एक नगर । पादनक (सं०.ली.) यादन स्वाथै कन् । घाद्य, वाजा। (भ. ग्रहाखपः) पादनदएड (सं० पु०) येहला मादिका तन्तियन्त बजाने वादा-१ चम्पारणके अन्तर्गत एक ग्राम । (भ० ब्रहमखयह की छड़ी। . , . . . ४२२६५) २ फलकत्ते के दक्षिण में उपस्थित एक लवणमय पादपट्टि मन्दान प्रदेशके अन्तर्गत सलेम जिलेके उतरी। जलाशय । . यादा देखे।। तालुकाका एक बड़ा गांव ।' यहां प्राचीनत्यके निदर्शन- वादा ( म० पु०) १ नियत समय चा घहो । २ प्रतिज्ञा, खरूप कुछ शिलालेख विद्यमान हैं। - ' . . . इकरार। पादप्रतिवाद (सं० पु०) शास्त्रीय विषयों में होनेवाला वादानुवाद (सं० लो०) तर्क-वितर्क, शास्त्रार्थ, वहस । फयोपकपन, बहस। . पादान्य (सं० त्रि) यदान्य पप स्मार्थे अण् । बहुप्रद, पादयुद्ध (सं० पु०.) यादे शास्त्रीय विधादे युद्ध। बाद । उदार । विषयमें युद्ध, शास्त्रीय झगड़ा, शास्त्रीय कलह वादाम (सली. ) स्वनामध्यात फल, बदाम । पादर (सं० पु०) पदरात् पदराकारकार्यामफलोद्भवम्, यदर पदाम देखो। .