पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१४६

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१५६ वापीक-बाप्पा रावल ___ पापी खनन करने में पहले दिशाको स्थिर करना | पाठकोंसे छिपी नहीं है।. कमला हो वंशधर ER होता है । अग्नि, घायु और नैऋतकोणमें वापी नहीं, राजबंशके पुरोहित धे। ' उन्होंने राजकमार लेकर खुदधानी चाहिये। शग्निकोणमें खुदवानेसे मनस्ताप, गांडेर नामक किलेमें आश्रय लिया। यहाँके यदुवंशी नैऋत में कर्मकारी, वायुकोण बल और पित्तनाश) भीलने उन्हें आश्य दिया। जब पुरोहित ग्रोहागोरा मादि विविध अनिष्ट होते हैं । अतएव उन मयं दिशाओं / वहां रहने भो शङ्का हुई, तय वै यहाँसे बालकको लेकर का परित्याग कर अन्य दिशामें वापी खुदयानी चाहिये। पराशर नामक स्थानमे गये। यह स्थान त्रिकूटपर्यत के यापी, कूप और तड़ागादि खुदवा कर उसकी यथा. सघन यनमें था। उसी विकूटपर्वतको तलहटी में विधान प्रनिष्ठा करनी होती है । अप्रतिष्ठित वापीके | नागेन्द्र नामक एक प्राम पसा हुआ था। . यहां शियो. जलमे देवता और पितरोंके उद्देशसे श्राद् तर्पणादि पासक ब्रामण रहते थे। उन्होंके हाधमें पाप्पा सौंपा नहीं किये जाते। इसी कारण सबसे पहले उसको गया। राजकुमार निर्भय हो कर धनों विचरने लगा। प्रतिष्ठा करने में कहा है । जो यापी आदि बुदया चापा रापल तलहटीम उक्त ब्राहाण कर उसकी प्रतिष्ठा कर देता है उसे इम लोको यश और चराया करता था। उस प्रदेशके राजा एक सोलको परलोकमे अनन्त स्वर्गलाभ होता है। क्षत्रिय थे। यहां सावनका झूलन पड़ी धूमधामसे. पापीक-एक प्राचीन कपि। मनाया जाता है। राजकुमारी भएनी समियों के साथ पापोह (सं० पु० ) वापी जहातीति हा-त्यागे क, पाने | उस दिन पनमें पधारों। परन्तु भूलसे उनके पास घापोजलवर्जनादम्य तथात्यम् । चातक पक्षी, पपीहा।। रस्सो नहीं आई थो, वे झूला डालती तो कैसे ? उसी पापुभट्ट-उत्सर्जगोपकर्मप्रयोगके प्रणेता। ये महादेव के समय अचानक वाप्पा रावल यहां चला गया। • उन पुत्र थे। लोगोंने उससे रस्सी मांगी। पाप्पा यड़ा हो चञ्चल यापुरघुनाथ-एक महाराष्ट्र सचिय। ये धारराजफे मन्त्री | तथा हंसोड़ था। उसने कहा, मुझसे विवाह करो, थे ( १८१०ई०)। तो मैं रस्सो ला दूं। एक और तमाशा शुरुमा यापुहोलकर-एक महाराष्ट्र सेनापति (१८१० ई०)। उन कन्याओं के साथ राजकुमारफे विवाहको विधि यत्ती पापुष (सं० लि.) यापुष्मान, शरीरविशिष्ट । "वृक्षः जाने लगी। गांठ यांधी गई। क्या उस समय किसीने कृणोति यापुपो माध्यो।" (ऋक् ॥७॥४) चापुयः यपु-। यह समझा था, कि यह नकली विवाह ही किसी समय मान् । (सापण) असली विवाह होगा।

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घाप्पा रावल-मेवाधराज्यके स्थापना । घलभो राज्य. सोलडी राजयुमारी जब ध्याहने योग्य हु, तर ध्वंसके समय राजा कनकसेनके घंशधर इधर उधर मारे | सोलाराज घडे चिन्तित हुए। उन्होंने घर दृढ़ने के , मारे फिरते थे। राजा शिलादित्य के वंशधर प्रमादित्यने लिये देश विदेश मनुष्य भेजे। परन्तु इसी समय एक इबर प्रदेशमें एक छोटा-सा राज्य बसा लिया था। ऐसी घटना हुई जिससे सबको चकित होना पड़ा। पह कालचके प्रभावसे उस समय ग्रहादित्यके घंशमें एक | ज्योतिपोने राजकुमारोका जन्मपन देख कर '१६, IF तीन वर्षका बाल वाप्पा ही शेष रद गया। इसके पिता | इसका विवाह हो गया है । सोलडीराजफे आश्चर्य नागादित्यको स्वाधीनताप्रिय मोलौने मार डाला था। ठिकाना न रहा । राजाको पिछली याने' अर्थात् विघाफी . इस प्राचीन वंशका लोप हुमा चाहता था, क्योंकि घटनाको खबर लगी। इसको खवर पुमार याप्पाका गा तोग वर्षके चालक घाप्पाकी रक्षा करनेवाला कोई भी लगी। सतपय राजकुमार दरके मारे यालीय और देश दूटिगोचर नहीं होता था। . नामक दो भील बालों को साथ ले विजनयनमें चले गये। यापाके पूर्यपुर शिलादित्यको प्राणरक्षा, कमला उन दिनों चित्तौडमें मीर्यकुलके राजा मान राज्य मामको एक माणीने की थी, यह बात इतिहासफे करते थे। पापा उनका गांजा होता था। यह बात