पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१६६

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


१५२ . : पायविज्ञान को पदार्थ नहीं है. शिश्ययापी घr (Ether ) अनन्त | माकाशमें ध्यान । इयर होने में ही अगन् सूर्य कवियोंने आकाशकी भगत मौलिमा मोगा । प्रकासे प्रकाशित हो रहा है मौर मूकिरण गो उराप्त / गापुरका वर्णन किया है। माकाका-यह रंग याका हो रही है। इस पिनाल विश्व प्रवाएडमें शून्यका दोरहे। दूरफे पर्वतों पर जो मोलिम दिाई देता है, . पूर्णतः ममाय है। शो दो, पाय विज्ञान ही हमारा यह भी घायुका रण हो है। दक्षिण पातर-पत्रिका मालोच्य विषय है। पाश्चात्ययिशानको विविध मानाये। पूर्व चावे नियर तुम दूरको मोर देयो उपर हो, पर पायुविधानको भालोचनासे मरी हुई है। ज्योतिर्यिशान, गोलिमा-गाधुर्य तुम्हारे गाने प्रतिमात दोगा, यह भी रसायनविज्ञान, शमविधान (Accoustics ), उग्मिति । धायुका रङ्ग है। यहो देख कर कुछ लोग कहते हैं, ति यिहान, (usgrouctry), याय पत्राणादि विशान (Pneuo घायुका रह गोला है। किन्तु रसके सम्परपमे हिने हो '. matics), पृष्ठितूफानका विधान (Afetcerology ), शानिकों की बहाना सुनी जाती है। कुछ लोगों मा गरीरविषय विज्ञान ( Physiology), सास्य विज्ञान है, कि यायुका कोई भी राना, घर या धोर मार (Hogiene ) मोर तापयिहान ( Thermolog: )। पूर्ण है। योमयागमें जो व्यकि सुरमागर्म पिचरण मादि पनेरे विशानों में वाय विज्ञानका तस्य बहुत कुछ करते है, ये दूर देशमें काला रहा है। इससे Tv . यित हुमा है। हम मझिगमें उसके सम्मान में यहां शानिक फरमा करते हैं, कियापयीय परमाणुको विध. पुछ मालोचना करते हैं। रणतास सा रोका माय दिखाई देता है। सीमिपे ___ अगाई। लघुतम स्थिर पायप्रदेश सय रङ्ग भभाप काला इम पाय मण्डलको चाका गन्दाजा लगाने हीरक दिखाई देता है। माकाश, जो मीमा रगापिकाई । देता है, यह घनोभून पायुमें सौकिरणम मोले रहा जानिकोंने वहा परिश्रम किया है। किसी समय इसको प्रतिफलनमान है। सोरकिरण जब यमयायुको पोर अचाईका अन्दाजी ४५ मांसपं. लगभग लगाया गया। फर पृथ्योको भोर भागे पढ़ती है. तब उसको गोली धा, किन्तु इसके बाद विधामा कियाय मण्डलको , ज्योतिः यायर्फ स्तर में गोला र प्रतिफलित करती है। नाका परिमाण १२० मौल। परन्तु यिपुरप्रदेश । किसी विश्लेषण प्रणालीसे ( Spectruu analysis ) अध्यभागमे बघु स्थिर पायु इसको भपेशा मार भी। इसके सम्बन्धमे पानसे सर प्रकाशित किये हैं। पाप मा पर। यद इसका परिमाण दो सौ गोलसे जलीय याम मिला रहता है, इस पापको भरकर सीर काम होगा। ज्योतिर्यि पानसे यायुमण्डलकी चाई किरण पाप भएर सीमें गामा वर्णपिमा प्रकट करतो का निर्णय करने यथेष्ट साहाय्य मिला है। हैं। जलोप पापानिरा पर्णपिता को सहा भारोपना कारण है। समुद भीर मामाको मोलिमसा समयमै पक्षासे घायु भारीपनका मो अन्दामा किया शानिकोंनदोरहका मिशहिया है। समोसा, गया। पक कांपकी मलिकासे यायु निकालयात मरा पक्रयाल रेला किनारे पावणे पार पाय. पास वा पाय निकाल लेने पर यमन करनेमे सो सोम पोप पापंक मालिमारिप सिकलन दो (Relectior) होगा, पाय भरी हुई मलिकाको तौल उससे मारोहो माहामको मासिमाका कारण है। पाय निका मागी। मURो असे असरात तरती फिरती है। मालोकरना (Transmission of ra)प मार को मपरका गुपटप मारमा महोता, उसो पर्ण याताकारसदेवाय महापा हरहमामप ममा मी पाय पं. वांगी गियर करने लिपे समोर (Saluxure)AIR R ifare है स सका गुम्मार गनुभग करने यह मम पाने माइमामिरर (Cyanometcr) गौर पर . . मोमिरर ( Displuonometer) माग दो द र .