पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१७८

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१५८ वायुविज्ञान. चौथाई भाग मोनिज डाई-भसाइह मिला कर रिटर्ट दिखाई देते हैं, वैसे ही अक्सिजनमें भी स्थितिस्थापना :. नामके एक यन्समें रखना होगा। एक गलाकार वापः। मादि गुण मौजूद हैं। 'जोयनको किया निर्वाहक . याही नलसंयुक्त काग द्वारा इसका मुहं उत्तमरूपसे लिये मषितजनकी बड़ी मावश्यकता है। साधारण : बन्द करना होगा। इसके बाद इस रिटर्ट यन्त्रको एक घायुको अपेक्षा अक्सिजन ..अधिकतर :दीर्घकाल तक आधार-दएड में जोड़ कर इसके ठीक नीचे स्पिरीट लैम्प | जीवन रक्षाके लिये उपयोगी है। इसीलिये इसका शला देना होगा। गर्मा पाते हो मक्सिजन गैस उत्पन्न | दूसरा नाम प्राणवाय. या Fital air है। ... . . होने लगेगा। यह गेस संग्रह 'फरना हो, तो जलपूर्ण ___'पृथ्यीकी यायुसे अक्सिजन दहुत.भारी है। एक-सौ गमलाया यूमेटिक्द्रफ नामक यन्त्रविशेषका व्यवहार फ्यूविक च परिमित अक्सिजन वाष्प मध्यम परिमित करना होता है। परिष्कृत स्वच्छ कांचकी · बोतलको ताप और दयावसे ३४ प्रेनको अपेक्षा भो वजनमें अधिक गमले या यूमेटिकद्रफ जलसे पूर्ण कर उसके ऊपर मधेो तर भारी होता है । उस अवस्थामें पृथ्वीको वायुका यमन मुखी रखनी होगी। अक्सिजन निकलना भारम्भ होने | ३१ ग्रेनसे जरा अधिक है। सक्सिजन -गेस जलमें । पर वापधादिका नली बोतलके मुंहके' नोचे धरते ही कुछ द्रवणीय है। इसकी स्वकीय व्यापकता-परिमाणः । बुद्धयुद् करके इसमें वाप्प प्रविष्ट होगा, जय चोतलका स्थानके योस गुना अधिक व्यापकता स्थानविशिष्ट जल .. समूचा जल बाहर निकल जापेगा, तब कांचके कागसे में अक्सिजन द्रवित हुआ करता है । इसके ऊपर प्रकाश- योतलका मुम्ब उत्तमतासे वन्द करना होगा । एक-तरहका की कोई क्रिया नहीं। अन्यान्य याप्पोकी तरह उत्तापसे गोंद तैय्यार कर उसे बन्द करना चाहिये। गोंद-दो . अक्सिजन फैलता है। विजलीके प्रमायसे भी इसके भाग मोम और एक भाग नारियलका तेल मिला देनेसे | गुणमें कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता। ' शैत्य तथा तैयार होता है। योनल व्यवहार करनेसे पहले उस } प्रचाप (दयाय) से इसका नम्र या कठिन नहीं पनाया कागको इसी गांदमै सुधा लेना चाहिये। जा सकता। अक्सिजन आज भी मूलपदार्थों हो परि- ' (8) उत्तापके साहाय्पसे गधकाम्ल-विश्लिष्ट करके गणित होता है। किन्तु कुछ लोग इस विषयमें सन्देह भोगक्सिजन पाया जा सकता है। करते हैं। आज कलके वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस (५) तडित् संयोगसे जल पिश्लिष्ट फरफे भी अफ्सि सिद्धान्तसे पहले परमाणुफो अविभाज्य समझा जाता जन उत्पादित होता है। था, यह सिद्धान्त भ्रमात्मक है। प्रत्येक परमाणुकी अक्सिजनका सम्मेलन । वैद्युतिक क्ष दतम पदार्थ ( Electron) समष्टिमात्र है। धिमजन मुक्तावस्थामें पटरिनफे सिवा प्रायः सभी वर्तमान रसायन विज्ञानमें जिन सब मूलपाधोंका मूलपदार्थों के साथ मिला रहता है। यह अन्यान्य पदार्थो उल्लेख किया जा चुका है, उनमें हाइड्रोजन सांपेक्षा के साथ मिल कर तीन तरहके यौगिक पदार्थ उत्पन्न | लघुपदाध है। हाइड्रोजनके मान पर ही अन्यान्य मूल । करता है। जैसे-अपसाइड, एसिड और अलकोइल | पदार्थों का मान निणीत हुआ है। इस समय पक्षासे ऐसे कई पदार्थ है, जो अपमाडमें कम और पसिझमें | मालूम हुआ है, कि, इस हाइड्रोजनका एक परमाणु उलि. . कुछ अधिक परिणत होते हैं । गङ्गार फस्फोरस, केमि खित वैधतिक पदार्थ (Electron)-को एक हजार परि- यम मादि इसी जाति के पदार्थ हैं। मित पदार्थको समष्टि और नेगेटिय या बियोगहरु , . . अक्सिजनका स्वरूप। - वैद्य तिक शक्तिपूर्ण है। यद्यपि पे परमाणु मेनीस दिपाई ____अपिमजन गेस राहीन, स्यादद्दीन मोर गंधहीन है। नहीं देते, किन्तु इनके अस्तित्वका प्रमाण अकादय, भौर यह नेत्रोंसे दिखाई भी नहीं पड़ता और यह शष्टुत अखएड है। . . . . . . स्वच्छ है और हाइड्रोजनकी अपेक्षा १६ गुना भारी है। भक्सिजनका विस्तार। साधारण वाय में जैसे स्थितिस्थापकता आदि गुण. जगत्में जितने मूलपदार्थ हैं, उनमें अक्सिजन सयंस