पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१८१

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१६१ वायुविज्ञान इसकी वू के बारे में पहले ही लिखा जा चुका है । तदित्- | अपिसजन रहता, तो अति दुमतिसे दहनकार्य पन्त्र-परिचालनमें भी इसी प्रकारका आघ्राण होता है। सम्पन्न होता। ऐसा होने से हमारा रसाई धनाने तथा यह अक्सिजनसे २५ गुगा भारो है। 'साधिक दवाय दीप जलाने मादिका कोई कार्य सुसम्पन्न नहीं होता। और शैत्य द्वारा यह तरल अवस्था परिणत हो सकता| लकड़ो या कोयलेमें आगका संयोग करने पर यद तुरंत है। इसके रासायनिक तत्त्वके सम्बन्धमें इसके जलने लगता है। प्रदीप प्रज्वलन करने हो उस. पहले ही लिया जा चुका है। कार्यानिक एसिह गेसमें को बत्ती जल जाती। हम लोग लकड़ी या वस्त्र भादि- इसका अस्तित्व नहीं रहतां । नगरकी अपेक्षा छोटे छोटे दाह्य पदार्थका निरापद व्यवहार नहीं कर सकते थे। गांशको वायमें अधिक ओजोन रहता है। प्रोजेनिमे फूमके घरमें अग स्पर्श करते ही यह भस्म हो जाता। आकाशका विष शोषण या विनष्ट होता है। कुछ! हम वायुफे साथ जो अक्सिजन ग्रहण करते हैं, यह हमारो लोगोंका कहना है कि यह मेलेरिया और जेके | देहके सूक्ष्म अवयव पर मृदु दाइन का कार्य सम्पन्न योजाणुओं का नाश करता है। इस समय चिकित्सा करता है। इसके फलसे ताप मौर दैहिक शक्तिका उद्भय विज्ञान में योजोनका व्यवहार बहुत होने लगा है। कुछ होता है। यदि वायु में नाइट्रोजन न रहता, फेघर आफिस लोगों का मत है, कि आकाशका रंग नोला इसी ओजेन- जन हो रहता, तो जोवनी शक्तिकी क्रिया किसी तरह के कारण हो हुधा है। शृङ्खलाके साथ सुसम्पन्न नहीं होती। दाहिका शक्ति . नाइट्रोजन ( Nitrogen) . विशिष्ट अक्सिजनके साथ अधिक मात्रामें नाइट्रोजन- . पायुका और एक उपादान नाइट्रोजन है।। विमिश्रित रग्व अक्सिजनको संधारिणी सकिसा नियमित पायुराशिम : नाइट्रोजनका परिमाण सासे अधिक किया गया है। प्रकृति का यह विधान विश्वात्री ज्ञानमपी है। यद पहले ही कहा गया है, कि पांच भाग महाशक्ति मङ्गलमयी लोलाका उज्ज्यलतम निदर्शन है। वायमें एक भाग अक्सिजन और पाकी चार भाग नाइट्रोजनका स्वरूप भौर धर्म। नाइट्रोजन है। प्राप्त जगत्में नाइट्रोजनका परिमाण __नाइट्रोजन अदृश्य यायघीय पदार्थ है। इसमें अत्यधिक है । प्राणिजगत्के साथ इस सम्बन्ध स्वाद, यणं या गन्ध नहीं है। रेगनेएट (R. gnant)ने अति प्रयोजनीय है। इसीलिये मङ्गलमय विघाताने कहा है, कि यायुको तुलनामें इस।। आपेक्षिक गुरुत्य पायमण्डलीका ३॥ भाग फेवल इस मूलपदार्थ द्वारा ०.६७०२ है । अतएव यह यायुकी अपेक्षा लघुनर है। हो पूर्ण कर रखा है। गएडलालिक पदाधक ( Albu एक मिटर परिमित नाइट्रोजन।। गुरुत्व १.२५ ग्राम है। 'minoids) मध्यमे माइट्रोजन दो प्रधानता उपादान प: भाग जलमे १४८ भाग नाइट्रोजन योभून हो सकता है। जीव और गिजगत्में नाइट्रोजन यापासे है। पहले हो कहा गया है, कि १७७२ ईमें रदार- 'मस्थान कर रहा है। 'पनिज पदार्थों में नाइट्रोजन फेोई साइपने नाइट्रोजनका आविष्कार किया। इसके बहुत मधिक नहीं दिखाई देता।' इनमें केवल सोरामें | ठोक पांच वर्ग दाद भर्घात् १७७७ मे मासोमी यई मूलपदार्थ दिखाई देता है। नाइट्रोजन मिश्रण डाक्टर लाभायाजीय डाक्टर रदारफोर्थी मिद्धान्त स्थिर पदार्थों में नाइटिक पमिद और मामोनियाका लेशमान | किया था। सबसे पहले कहा गया है, कि जिस तरह पामास मप तरहको भूमिमें दिखाई देना है। नाद्रिोजन यायुफे मयिमजनसे अलग किया जा सकता ___मौलिक नाइट्रोजन गैस ( एक अणुपरिमाण) है, किस तरह नाइट्रोजन उत्पन्न होता है। पापा जाता है वायुमे यह पदार्थ पृक किया जा - नाइट्रोजन दाह्य पदार्था नहीं । नट्रोजनसे दोग सकता है। किसान जैसे ददनकि मनुकूल है। शिक्षा युम जानो है। इसका किसी तरहका निपानक पैसे नाइट्रोजनका धर्म नहीं है, इसलिये रिकार्य सुनि-काम नहीं, फिर भी यह जीवन रक्षाके समाधी मी • याके साए सम्पन्न हो रहा है। पायम यदि शुद्ध साक्षात् मायने कोई साहायर नहीं करता। रासायनिक rol. XXI 41.