पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/१९२

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वायविज्ञान प्राप्त घनीभून अपिसानके सैकड़े ३५ माग रकमें | याययोय उपादानका सामाविक नियम यह शोषण होने पर देवमें घनुष्टद्वारकी तरह रोग उत्पन्न होता कि उग्मुक्त अयस्थाने घेइनफै परिमाणके अनुपात. है और उसमे मृत्यु भी हो जाती है। साम्यसंरक्षण करते रहते हैं। मान लीजिये, कि यारी देदमें कायोगिक रमिक बढ़ने के कारण- मिररमें पारदके द्वारा यायुका पाप ७६० मिलिमिटर है। (१) पेशी-किया-मांस पेशीके अधिक सञ्चा पायुराभिम गपिसजनका परिमाण एक पञ्चमin है। लित होने पर कार्यानिक एसिडको पृद्धि होती है। इसके प्रचापका अनुपात भी उक्त ७६०. मिलिमिटर (२) शेतसार जातीय पदार्थ अधिक परिमाणसे परिमाणका पफ पञ्चमांश है, अविशिष्ांश प्रचाप माद्रो. भोजन करने पर प्रयासको अधिक मात्रा पनि जन जनित है। होती है। फुपुसमें थाययीय उपादानके भनुरातका साम्यरिय। .. (३) नीम वर्षको उन तक कार्बोनिक एसिहको उन्मुक्त घायुमें कार्यानिक एसिडका प्रचाप रहत मात्रा बढ़ती है। पचास वर्षकी समस्याफे याद मत कम है। किन्तु फुस्फुसमें कार्यानिक पसिएको मासा इसकी मात्रा कम होने लगती है। त्रियों का आतंय.। भधिक है । प्रागुक्त प्राकृतिक नियमफे गनुसार शोणित कुछ काम गर्यान् पैतालीस वर्षको अवस्थासे कार्यो| अफ्सिजन घायुराशि अनुपातिक साम्यसंरक्षण निक एसियका परिमाण हाम होने लगता है। पुरुषको निमित्त सदाही प्रस्तुत रहता है। जहां अगिसजनको अपेक्षा सियोंके प्रयासमें कार्यानिक पसिघ स्पभायता) माता कम रहती है, दूसरे स्थानोंसे अक्सिजन आपने कम रहता है। समातियोंकी मनुपातिक माता संरक्षण करने के लिये ( ४ ) स्वरादि रोगफे साप प्रश्वासमें कार्योगिक उसी ओर दौड़ता है और बाहरी घायु फुन्कुसके मोता पसिएकी माता पढ़ जाती है। प्रवेश कर गपिसजनका स्थानीय समाय पूर्ण कर देती (५) शैत्यमें भ्यास-क्रियाको वृद्धिके साथ-साथ है। यद है प्रतिका एक महामल विधान । - कार्यानिफ पमि भो अधिक परिमाणसे बाहर निक- भक्सिजन भौर कार्यान डाइअक्साइटफे २४ पपटेफे माद ! लता है। माप्तययम्फ व्यक्ति २४ घण्टेमें वासमियास का (६दिमम मचर परिमाणमे कार्यानिक एसि हजार प्रेग परिमित गपिसजन ग्रहण करता है। २४ पाहर निकलता है। रातको ममशः कम होता है। घण्टेके परित्यक्त वामिक पसिमे ३३०० प्रेम या अन्तमें आधी रातको इसकी माता विलकुल का हो। १८ तोला भङ्गार रहता है। इसे प्रनि २४ घण्टे में पाय: जाती। पफा १८ तोला गदार कार्यानिक एसिरके भागने (७) पारंपार प्रवासफे समय प्रत्येक प्रयास निकल जाता है। इस तरह फुस्कुमफे पधर्म जलीय कार्यानिश पसिरकी मासा कम रहने पर मो यह ज्यास । याणाकारमें जो जल बाहर निकलता है, उसका परिमाण मधिक मासाम निकलता है। इससे ऐसा न समझना भी साद घार घटक है। पास, भूपायुका प्रगाव होगा, कि टीशु पदार्थ में शधिक परिमाणसे यह ध्यास मौर सो पुरुषाय भेदमें इस परिमाणमें न्यूनाधिक दुरी उत्पन्न होता है। पास्तयिफ दात पद६,किप्रयास | करता है। मल्पययम्फ पक्तिको देने जिस परिमाम सिनमा पन मन निकलता है, उसके गाए प्रत्येक वार से अधिमा गृदीम होता है, उसकी तुलना में बहुत Tसना ही कानिक एसिप निकलता है। सुसरा मूल कम परिमागमे कार्यानि पसिर वार नियता। सात पदमाताको मधिकमा दोगी है। धारावालिकामाको अपेक्षा भधित माला कॉन ( मादार माघ घण्टे कार कार्यानिक पसिष्टको सार मफमा परित्याग करने है। यदिपायुको उal मासा नदनी है। पद मि पं.यल पामार मध्य प्राणहारनिषग्नस देशा ताप कम होने पर पायॉन या... अमित दोगी है। भएमाली मामा भी कम दी जातीवारपनाको