पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/२०७

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वायुविज्ञान १५१ पायुकी यह शैत्य पृद्धि शीतलं घायु समिश्रणानित । विविध अवस्थागत जलीयवाप्पकी स्थितिस्थापकता नहीं है । तापयिकोरणयशतः भी नहीं, अथवा | भादिका परिमाण कर उसके सम्बन्ध मालोचना करना ऊंदुध देशको स्वभाव शीलताफे कारण भी नहीं है। हो हाइप्रोमेट्रो नामक विज्ञानका उद्देश्य है। इन दोनों इस शैत्य-प्राप्तिका हेतु स्वतन्त्र है । सन् १८२६ / विशानों में घायुफै जलीयवाप्प सम्बन्धीय विविध तथ्य में शामिक पण्डित पसपाईने (Ess ) ताप-. जाने जा सकते हैं। गाधुनिक मेटेयरलजी ( Aleteo- विज्ञानका नियम भाविष्कार किया है, उससे मालूम | rologs: ) सम्बन्धीय प्रन्यों में भी इसके सम्बन्ध वा. होता है, कि तापकार्यफलसे पिमिश्रित होता रहता तेरे सूक्ष्म तत्त्य लिखे जा रहे हैं। सिया इसके क्लाइ है। घायुप्रयाइ निदिए परिमाणसे ऊपर उठने पर मेटेलजी (Glimatalogs) सम्बन्धीय गयेपणा पायुके । शीतल होता है. और उसके फलसे घायुमें मिश्रित जलीय पापका कुछ कुछ विवरण लिखा गया है। जलीययाप्प घनीभूत होता है। मेघ गठनके समय लण्डनफे मिटियरशिकेल माफिससे भी इस विषयके तापरागिमें प्रच्छन्नमायसे विमिश्रित रहता है। मेघयुक्त बहुतेरे अन्य निकल रहे हैं। सन् १८८५६०में वैधानिक घायुफे निम्नगामी होने पर इसमें प्रच्छा ताप प्रकाशित पण्डित फेरेलेने Recent Advances in weteorologs. - होता है। इसमें विकीरण द्वारा वायुराशिसे खूब कम | नामक जिस प्रन्यकी रचना की है, उसमें भी इस विपप- माताम ताप कम हो जाता है। घटि होने के समय यदि के अनेक आधुनिक सिद्धान्त जाने जा सकते हैं। । यायुका प्रडम ताप कम न हो, तो उक्त यायुके गधो हमने लेखके गारम्भमें कहा है, कि वायुमएल नाइ. गामी हो जाने पर भूपृष्ठ पर अत्यन्त उष्ण वायका ट्रोजन, अक्सिजन, जलोययाप्प, कायों निक पसिह गेस, प्रवाह अनुभून होता है। दिनके प्रखर सूर्योत्तापर्म और आमोनिया, गारगन, नियन, हेलियम, झिपटन गीर मिरि- शुष्क यायु प्रयादगे गनेक समय मेघ गठित होते न होते तशय कम मात्रामें दादोजन और हासो कार्यन पदार्यः .. हो याप्पीभूत हो जाता है। इसी यायुको झझायायु | का एक मिश्रण पदार्थ है। इसमें माना प्रकार के वीजाणु कहते हैं। किन्तु यायुफे भाद्र होने पर इस यायुः। और धूलि यादि भी उड़तो फिरतो है। किन्तु प सप गशि .सूर्योत्तापमें जो परियत्तम होता रहता है, यह पदाच यायुफे मङ्गीय नहीं। पाय फे इन सब उपादान. • परिवत्तंन अधिो संघटनफे अनुकूल है। . .. पदार्थो में जलीय वाघोंका परिमाण चिरचञ्चल है । यायुके जलीप चापका विस्तृत विवरण प्रकाशित | देश, काल मौर उरणता आदि भेदसे जलीय पाएका • करने पर घृष्टि, शिला गौर शिशिरराशिको पात पिस्तृत पपेट तारतम्य हो जाता है । सिया इसके अन्याम्प रूपसे लिखनी पड़ेगो । किन्तु यहां उसका स्थानाभाव | उपादानों में पैसा तारतम्य नहीं होता। हमने पहले है। इन मर विषणको उन उन कन्दोको व्याख्या देखो। । हो कहा है,-कि पाय में . .. हाइडोमिटियरलजी और हाइग्रोमेटी। - । __. अपिसजन . २३.१६ माग - .यायुफे जलीययापक सम्बन्धमें. जोः सविस्तार ' नाइट्रोजन और भारगन ७६७७ भाग. मालोचना देना चाहें, उनको चादिध, कि वे हाइलोमि कार्यानिक पसिष्ट ४माग रिपरलजी ( Hydrometeorologs ) और हारमोमेट्रो । जलीय यार, . .. अनिर्दिए . .( lygrometry.)-फे 'मम्यन्धमें वैज्ञानिक प्रन्योंका! . मामोनिया और अन्यान्य पाप पदार्थ ....१ • पाठ करें। हालोमेटियरलजो पिशानमें कुदरा, मेघ, मात्रामें विद्यमान हैं। हमने अब तक इनास उपादानों में पृष्टि, तुपा, तिगिर, शिला ग.दिका विस्तृत विवरण भाषेसजन, नाइट्रोजन कायोनिक एसिः मोर जलीय लिमा हुमा है। हिन्दौविश्वकोपमें शादमें भी इस यापक मम्बन्धों मालोचना की है । याए जो पिशान के सम्बन्धमे मालोचना देखना चाहिये। हा. आर्गन (Argon). नेपन (Neon), देलियम ( Irelium) प्रोमिटर (Hygrometer ) पम्स द्वारा पारानिके। और फिपरन (Krypton ) नाम मयायिकृत मूल ... Tol. I. 40.