पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/२०८

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१८२ वायुविज्ञान पदार्थ हैं, उनके सम्बन्ध में कोई बात नदों कही गई है। घिपय हैं। ये सय मिषय अतीय जटिल और 3 फलतः इनके गुणादिक सम्बन्धमें अब भी कोई विशेष गणितज्ञानगम्य है। विशेषतः इसकी अनेक याते' तध्य मालूम नहीं हुआ है । आर्गन गोर नियन-इन मूल साधारण पाठकोंको हृदयङ्गम नहीं हो सकती। ऐमें पदार्थीको मन् १८९५ में वैज्ञानिक पण्डित राले और विविध कारणों से हम अत्यन्त संक्षेपमें घायु सम्बन्धोप ' रामजेने शाविहन किया था। सन १८६८ ई० में पण्डित - प्राकृत विज्ञानके कई विषयों की मालोचना कर इस प्रस्ताय. रामजे और ट्रेमर्सने झिपटन नामक नये माविष्टन मूल का उप संहार करेंगे। इसके सम्बन्धमे सविस्तर पदार्थ की नोज की थी। अभी तक इन पाच मूलपदार्थी, घिवरण जानना चाहे, उनको अग्रेजी भाषा लिमित के सम्बन्धमे कोई भी विशेष तथ्य नदो मालूम हुआ है। मेटियरलोजी (Meteorologs) और म्यूमेरियस (Pnese अक्सिजनका घनत्य १६, नाइट्रोजनका १४, होइडोजन- matics) आदि ग्रन्थों में कई विशेष तथ्य मिल सकते है। फा १ और आर्गन घनत्वका परिमाण १६६ है। यहां और कई विषयोंका उल्लेख किया जाता है। डेयेर ( Devar ) यद्यपि अन्यान्य वायवोय पदार्थों से वायुमपहलको सीमा। हेलियमको पृथक करने में समर्श तुप है, किन्तु इनके वायुमण्डलको सामा निर्धारित नहीं हो सकता। गुणों के सम्बन्ध में कुछ भी जान नहीं सके हैं। सुतरां । उद्वेय पदार्थचिमुक आकाशमें कितनी दूर तक फैला इसके सम्बन्धम आज भी कोई यात लिम्बनेके उपयुक्त हुआ है, इसके सम्बन्ध में प्रवन्ध प्रारम्भ में यषि मने कुछ तथ्य नहीं मालूम इशा है। हम यहां गामोनियाकी : जिक्र किया, फिर भी; सूक्ष्म चिन्ताशील वैज्ञानिकोका यात लिख कर घायुके उपादान द्रव्यका रूप और धर्म सिद्धान्त यह है, कि सूर्य, चन्द्र और यहुदूरयत्नौ तारा , आदिक सम्यन्त्रमें अपने प्रस्तायनाका उपस'हार करेंगे। मण्डलमें भी वाययोय पदार्थको गतिविधि विद्यमान सामोनिया एक उग्र गन्धयुक्त वर्णहीन अदृश्य याप्य , है। फिर हमारे उपभोग्य वायुमण्डलके उपाशन और दे। विशुद्ध वायुमें भामोनियाका परिमाण बहुत कम ; अन्यान्य प्रहादिके यायुमण्डल के उपादान अवश्य हो। है। दश लाख भाग वायुमें एक भागसे अधिक आमो. खतन्त और पृथक हैं। इसका प्रमाण मिलता है, कि निया नहीं रहता। गाइड्रोजन गॉर हाइड्रोजन संश्लिए हमारे सम्भोग्य यायुमण्डलकी ऊपरी सीमा एक्सी. जीवन पदाधं पच जाने पर उससे गामोनिया चाप मोलसे भी अधिक दूरी पर है। बहुदूरबत्ती नक्षत्रालोक उत्पन्न हो कर वायुफे साप मिल जाता है। कोपला प्रतिफलन, अरुणोदयालोक तथा प्रदोपालोक और सु. जलनेके समय भी यह उत्पन्न होता है। मोरो, शय दूरवर्तो पतितउल्काका मालोक देख कर पेशानिक ज्यो. ममाधि, और जलाभूमिसे दो यह घाट उत्पन होना निर्यिाने स्थिर किया है, कि सैकड़ों मीलोंके ऊपर भी है । उभिद-जगत्में भामोनियाको मावश्यकता नहीं है। यह ग्रायुमण्डल विद्यमान है। उसके ऊपर भी जो गति ये अपनी देह पुष्टि के लिपे यायुके भामोनियासे नाइट्रोजन ' सूक्ष्म वायुमण्डल, प्रोफेसर पार पस उपयाईने सन् प्रहण करते हैं। यायुमें सलफाइरेटेड हारोजन आदि . १९०० ६० जनवरी महीने में "Science" नामक और भी दो एक बायोय पदार्थ अत्यन्त अल्प परिमाणसे मासिक पत्र में उसके सम्बन्ध तनिक वैज्ञानिक गामास. कमो कभी विमिश्रित अवस्था देखे जाते हैं। इनकं दिया है। इसका मारोत्य है। भूपृष्ठम अनुभूत न होनेका. विस्तृत विवरण प्रकाशित करनेकी मायश्यकता नहीं। , कारण यह है, कि यह सूक्ष्म स्थितिसाम्पil ( dynami. इससे यह विषय छोड़ दिया जाता है। cal equiliderium) भयस्थित है। मात विज्ञान भोर यायु । न्यूमेटिक्स (Pneumatics). या घायुगुण विज्ञान हमने यायुके सम्बन्ध रसायन विज्ञान और शरीर पायके गुण या धर्म का विस्तृत शालोनना है। घायु विषयमान विषयी सविस्तार रूपसे मालोचना की। गुण-विज्ञान प्रम्प, घगले. मेरियर और बालेस मादि है। प्राप्त विज्ञान यायु सम्पयन का पट मालोच्य । वैज्ञानिकों की शाययीय वा पक्षको सूक्षा कीगलराशि