पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/२१३

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वायुविज्ञान १८७ सात मंश उसर अधिक उष्णता उपलब्धि होती है। भाग्नेय घायु (northwest monsoon) भौर वैवापसे इस स्थानके दोनों पावों में प्रायः ५ अंश परिमाण स्थान | आश्विन तक वायव्य घायु ( South-east monsoon ) यायु द्वारा उत्तप्त हो कर ऊपर जाया करता है और उस प्रवाहित होती है। स्थानको संपूर्ण करनेके लिये पूर्वोक्त वाणिज्यवायु | ___समुद्रमें यह वायु अनुभूत होनेसे पहले स्थलमागर्म प्रवाहित होती है। किन्तु पृथ्वीको गतिकी यफतासे उस हो इसका प्रचार अधिक रहता है। इसी कारणसे की गति भी षक हो जाती है। इस स्थानफे रहनेवाले। माग्नेय मानसूनका अन्त होनेसे वहुन पहले हम फाल्गुन लोग यह सहज हो प्रत्यक्ष नही कर सकते सही। किन्तु महीने में ही मलयानिल उपभोग रित्या करने हैं। प्रत्येक निरक्षवृत्तके उत्तर १०सै २५ अश तक पृथ्वोके उत्तर मौसमी चाय के प्रारम्भ होने के समय यिपरोत दिशाको भागके स्थान और निरक्षवृत्तके २ अंशसे २३ मंश ओरसे आये वाय प्रवाहके सघातसे प्रायः अत्यन्त मध्ययत्ती स्थानों में दक्षिण-भागको वाणिज्य वायु प्रवा- मांधी, वृष्टि और तूफान आता है। निरक्षवृत्तके दक्षिण १० अंश तक मौसमी याय शीतकालमें पाय कोणमे दित होती रहती है। और प्रोप्मकालमें अग्निकोणसे प्रवाहित होती है। ___ इन दो घायुमण्डलोफे मध्यवर्सरी स्थानों में नियत ___उत्तर पाणिज्य चाय का जो मएडल निर्दिए हुआ ही घायु ऊदुचं गमन करती रहती है । पृथ्वीके निकट यह ट पड़ा है, उसके उत्तर याय. सर्वदा नैऋतसे प्रवाहित होतो उतने सुरूपए रूपसे अनुभूत नहीं होती । इन सव स्थानों है। इसी कारणसे यहां के सव स्थान "नेत याय. में सदा दो निर्यात का हो अनुभव होता है। फेवल पोच मएडल" के नामसे विख्यात है। दक्षिण याणिज्यपाय : पीच इन स्थानों में भयानक गांधी ( Cyclone ) उठती देखी जाती है । मलाइ इस स्थानको निर्धात और अम्धिर मएडलके दक्षिण में वाय. सर्वदा पाय कोणसे प्रवाहित होती हैं इससे यह वायुमण्डल नामसे परिचित है। वायुमण्डल (Belt of Calms) कहते हैं। अटलाण्टिक ____ याय प्रवाहके सम्बन्धर्म ऊपर जो कहा गया यह • महासागरके यक्षका यह स्थान Doldrums-के नामसे पायुका साधारण निया समझना चाहिये । एकमात प्रसिद्ध है। यह महाममुद्र में दो दिग्याई देता है। पर्वत, मरभूमि, समूची पृथ्यो यदि जलमय होतो, तो इस याणिज्य यन, उपत्यका गीर नगरादिको बाधा या सहायतासे पायुका प्रवाह सर्व समान रूपसे अनुभूत हो सकता स्थान विशेषौ याय को प्रकृतिको कई विलक्षणताये 'था। किन्तु भूभागको उष्णता और पर्यतादि वाघाप्रयुक्त दिखाई देती हैं। यहां इसका विशेष विवरण देना देशभागमें यद विशेष अनुभूत नहीं होता। पंपल महा। मनायश्यक है। अरपको मरभूमिमें सिमुग नाम्नी एफ समुद्र गर्भमें ही यह दिखाई देता है। प्रकारकी प्राणानाशिका उत्तप्त पाय प्रयादित होती भारतमहासागरफे उत्तर, पश्चिम गौर पूर्व भाग है। अफ्रिकाकोलम्यो चौड़ी सहारा नासी मम्भमिमें और भूमि द्वारा येटिन है। विशेषतः हिमालय पर्वतश्रेणी अन्यान्य देशको वालुकामय भूमिमें भी इस तरहको महाप्राचीर रूपसे अपने उत्तर पहुत स्थानों में व्याप्त हो उत्तत यायु उत्पन्न होती है। कर सभी रहने के कारण उत्तरको वाणिज्ययाय उस ____ समुद्र के किनारे दिनमें समुद्र से भूमिको शोर करा कर ही रह जाती है, इधर मी मा सकती अर्थान् । गौर रात्रि, भूमिसे समुद्र की ओर हमेगा पायु • दिमालयको पार नहीं कर सकती। इसी कारणसे मारत. | बहती रहती है। इसका कुछ विशेष कारण नहीं । समुद्रग उक्त पाणिज्य पाएका माग तक प्रचार नहीं। सूर्योदयसे जलको अपेक्षा स्थल हो जीन उत्तम होता हुआ है। इसके बदले इस देश और एक सरदको या है। इसीलिये भूमिको यायु उत्तप्त दो ऊपर उठने प्रयादित दोती है। यह प्रथम ६ महीने मग्निकोणसे और लगती हैं भोर ममुद्रको शीतल यायु उम स्थानको पूर्ण पिठले ६ महीने याय. फोणसे प्रवाहित होती है। इसको करनेके लिपे उस मोर दौरती है। रामको जलकी मानसून (monsoon) पाय काहने हैं । कार्तिकसे चैत्र तक अपेक्षा स्पट माग ही जल्द शोसल होगा। मत