पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/२४७

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. . पारेन्द्री-वार्ता .. माज फल राजसाहो, गालक्ष्क्ष, पापना, वांकुष्ठा, । रहे थे। ऐसी भरक्षित अयस्या शोने पृथिमीको घेर दिनाजपुर, रङ्गपुर, नदिया, २४ परगना, यशोर और लिया, जिधर देखिये उधर पक्ष हो नजर आने लगा। मुर्शिदापाद जिलेमें प्रायः सभी जगह धारांद्र-कायस्थोंका ! प्रमाको संख्या धीरे धोरे घरने लगा। इस समय पास है। प्रचेतागण मद्ध हो कर जलमे बाहर निकले। क्रोध यारेनी (सं० स्त्री०) देशधिशेष, पारेन्द्रदेश। अभी यह मारे उनके मुम्बसे यप्यु मोर अग्नि माविर्भूत हुई। यायु. देश राजशाही विभागफे अन्तर्गत है। ने वृक्षोंको सुखा दिया और अग्निने जला डाला। इस पायपिट (सपु०) कावएडफे अपत्य । प्रकार घृतका क्षय होने लगा। या प्राधिक ( स० पु०) पृकग्राहक गोनापत्य । ____ अधिकांश वृक्ष दग्ध हो गये। थोड़े से बच गये। इसी पार्वजम्म ( पु.) १ पृषअम्मके गोलापत्य। २ एक समय राजा सोमने प्रचेताओंसे ज्ञा कहा, 'माप लोग सामका नाम । फ्रोध न करें, वृक्षों के साथ माप लोगोको एक मधि हो पार्फवधायक (स.) कवन्धु ( रेषात्यादिम्यष्ठक । जानी चाहिये।' सोमके अनुरोधस प्रचेताभोंने पृक्ष- पा ११६) इति अपत्यार्थे ठिक। पृक्रयायुका कन्या मारिपाको भारुपों प्रहण कर वृक्षों के साथ मेल गोलजा कर लिया। इस प्रक्षोत्पन्न कन्याका जन्मवृत्तान्त इस पार्य लि ( स० पु.) पृकलाका गोबज । प्रकार है--पुराकालमें कण्ड नामक एक येदयिद मुनि पार्यलेय (सपु०.) कलाका. गोता। २ पालाका थे। ये गोमतीफे किनारे तपस्या करते थे। उनकी गोत्रज। तपस्या वाधा डालने के लिये इन्द्रने प्रालीचा नाम्नी एक पार्षपञ्चक (सं० पु०) याचिका गोलापत्य। परम सुन्दरी अप्सराको यहां भेजा। पाकिणोपुन ( स० )आचार्यमेव ।। अप्सराने आ कर मुनिको नपपा बाधा डाली। (शतपथमा MEN३१) मुनिने उसके साग सौ वर्ष तक विहार किया। मदर. पाार्या (स'. खो०) जलसे दोनेवाला ज्योतिष्टोमादि अन्दरा रह फर ये दोनों बिहार करते थे। मी घर्षक लक्षण कर्ग। पाद मप्सराने एफे निकट जानेको इच्छा प्राट को, पास ( म०पू०) पक्षाणां समूहः इति वृक्ष-तस्य समूहः। किन्तु मुगिने जानेको अनुमति न हो। पीछे सौ वर्ष (पा ४४२१३७) इति ऊण । १ यन। २ वृक्षको छालका धीर उसके साथ विहार किया। यमा हुमा यन्तु ।। लि०) ३ गृक्ष सम्बन्धी या एशका प्रवेताभो के मारिपाको प्रहण करने के समय राजा बना हुमा । पक्षसम्बन्धीय नियलिङ्गकी पूजा करनेसे, सोमने उनसे कहा था, पद कन्या भाप लोगों की पंग. वित्तलाम होता है। पर्टिनो होगो । मेरे भाई तेज और भाप लोगों के पद्ध या ( स०सी०) एक मुगिवन्या। पे तपस्यि प्रधान तेजसे मारिपाफ गर्म दक्ष नामक गजापति जन्म प्रहण प्रयता आदि दश भाइयोंको सहधर्मिणी हुई। करेंगे। (पिम्प,०११५॥१.६) (भारत १९६१५)। इस प्रकार कण्ट प्रापिने सैकड़ों य तक थामरा यारों (म स्त्री०) गृक्षस्थापत्यं रखो, पक्ष-अप को। के साथ पिटार गार विविध विषयों का भोग किया। प्रतसे उत्पन एक ऋषिपत्नी। अप्सराने इन्द्रालय जानेको भामा मांगी, किन्तु म मिली। ___याशी का दूसरा गाम मारिया था। पर कण्टमुगिफे । माग्नि मुनिफे शापमयमे - मसराको उन्होंक, पास मौरससे मम्लीमा नामकी गप्सरा गमें रह कर पीछे रहना पड़ा। उन दोनों का नय प्रेमरस दिनों दिन पृक्षसे उत्पन्न हुई थी। इसका विपरण यिष्णुपुराणमें ! बढ़ने लगा। इस प्रकार माया- पदिन मुनि यस्तो कर पृटीम बाहर निकले। पूर्वकालो पा समय प्रचेतागण घोर तपस्या कर अप्सराने पूछा-पहाडाते हैं, मुनिकोले 'मिगे !माध्यो. Vol. xx1. 1.