पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३१२

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विकत --विकल्प पत्रमोदिनयादम्पनयास्यं । १ सूर्ण। २मा पक्ष । जिसका कोई मग हटा या पराक्ष हो । -- - मारना लंगड़ा, काना, संझा गादि। . . . . . गिकर्स, (म० मि०) १ प्रलय नहि कत्ता विशतायिकलास (दि. पु०) एक प्रकारका प्रागोन 14 . घभूतानामिह मनः।" ( मारत बनाम्) २ क्षतिकारक घमहसे मंदा जाता था। अनिष्ट करनेवाला । ३ दमन द्वारा यितिसम्पादक । विलित (सं०नि०) १ प्याकुल, येवेन । २ मा 8 मिनाकार। पोहित । यिकर्मन् (म पो०) वि विमा कां। १ विमा कगं, विकली (सं० मी.) विगता कला यस्पा गौराया विरयाचार ।(त्रि.) विपिराका यस्य । २ विरुद्ध डोप । नुहोना नो, यद वो जिसका रजोदर्शन होगा। hiरा, दुराचारी। दो गया । .. . ... विकका (मसि) पिक वियर कर्म करोतोति विकलेन्द्रिय (सं० स्त्रो०) पिलागि इन्द्रियानि पस्य !' . एकिए गुरुघ । निविद कगंगारी। मनमें लिखा जिसको इन्द्रियां व न हो। २जिसको पोन्द्रिय ६.किनिषिद्ध कर्मकारियों को गवाही नहीं लेनी चादि । प्रराव हो गया पिलकुल न हो। ऐसे लोगों की गवाही MAITRI याला (सं० पु०) विमा कानमिति गि-हर घन्। विजय (स० वि० ) यिकर्मणि बिगदाधार तिष्ठतोति म्रान्ति, भ्रम, धोखा २ लान ( मेदिनी ) ३ विपरीर " मया का धर्मनारन नुमार यद पुरुष जो पेवधिकर कर्म, कला, यिद कहाना । ४ यिविध पल्पना, गाना गांति करता हो, पेट गियर भाचार करनेवाला व्यति। मना करना । ५ विभिन्न कल्पना यिर, इच्छानुपायो . विकर्ष ( स० ० ) चिरायतेऽसौ इति यद्वापिएष्यन्ते पर लानाविशेष । प्राणागति यि एष धन । १ वाण, तोराविप माये तिला या विकलां दो प्रकारका Hindi या । यिण, मो पना। है, एक व्यक्गित या व्ययस्थायुक्त गितमा भौर दूसरा . विकर्षण (स० पी०) यि रुप स्युट । १ भाकर्षण, पेडिक या इच्छानुगायो। सोचना १२ रिमाग, REAL _ स्मृतिशारस नसे आकाक्षा पूर्ण होग पर विपन विकल ( स० वि०) विगतः कोऽयमनिस्य । दोता है। जिसमें दो प्रकारकी विधियां मिलनी से बिहल, याकुल । २गापूर्ण, सण्डित। ३हासमामा ध्ययस्यायुन रहते हैं । पादशंशेर्णमाम यागो .. परामा। ४ पलादीन ! ५ गम्यागायिक, अनैर्गिक । द्वारा होम क, मादि द्वारा दोग रे" हमको प्रकार म रदित(पली.) ८ कठाका पष्टिनमांश. की प्रतियां देनन माती है। यह पग मीरifair फलाना मांटयां भाग, विकला। दोनोफ हो प्रत्यक्ष भूतियोधित दोने के कारण पर मोर पिलमा (. प्रो०) गिफलम्य भाया तन्ट राप्। प्रोदिका विन्दुमा । यानुसार या प्रादिमा पिपला भाय या धर्ग, पेरीनों। । से किमा एक दम कर जीने पर मामा बिहानि (सं० पु.)शिलपापियंपन् । ममा पहीचा विकामप्रकार यिनको जगमोमो पग पानिदोग, मम्मी हो जिस साप नहीं है। पग परस्पर पिपद मालूम हो मिलते निला ( स० मी. ) विगतः कानो मधुरामापो पम्पा दियिगार किया तापे, तो दामी कnिel मा शो त्रिया मौगिरयपिदिकपा । १ नुतीमा न । पोंकि किसी पिक आनुसार काय यह रही सिमाजोपर्शन होना पंद दो गामा - दोहाको मिति हो। गत माटो | दुपारी गतिका माम । ४ मग को है।गृतिम font. Forrent का पसरा माग। दो । पि . िनि भनि यस्य । मा मोतिहासागर गौर minititl.