पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३२१

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२५) विकृतिमत्-विक्टोरिया पक्षपाती हुए हैं। थोड़ा गौर कर सोचनेसे मालूम पड़ेगा, पुत्र थे, भगवान्ने कल्कि अवतार ले कर दोनोंका वध कि परिणामवादी कारण है, कार्यसे भिन्न नहीं है, कारण किया। (करिकपुराण २१ म०) अवस्थान्तरमान है। दुग्ध ६धिलपमें, स्वर्ण कुण्डलरूप- पिकोथ (स० पु०) १ चक्ष को पोड़ा। कोप देखो (नि.) में मिट्टी घटकप गौर तन्तु पटरूपमें परिणत होता है। पीड़िता 'मतपय दधि, कुण्डल, घट और पट यथाक्रम दुग्ध, सुवर्ण | धिकोश (स० त्रि०) विकोष देखो। मिट्टी और तन्तुसे वस्तुगत्या भिन्न नहीं है। |घिकोप (स.नि.) विगतः कोयो यस्य । १ कोपरहिता ____ मतपय ऐसी प्रतीति होती है, कि जगत् प्रकृतिका | कोप या म्यानसे निकली हुई । २ माच्छादनहत, • विकार या कार्य है। विकार या कार्यरूप जगत् सुखदुःख- जिसके ऊपर किसी प्रकारका आवरण या भाच्छादन न मोहात्मक है, इसलिये उसका कारण भी सुखदुःखमोहा हो। स्मक है, यह सहजमें जाना जाता है। (सांख्यदर्शन ) | पिक (सपु०) विक इति कायति शम्दायते केक। विशेष विवरण प्रकृति, परिणामवाद और वेदान्तदर्शनमें देखो। करिशायक, हायीका वधा। विरुतिमत् (स० वि०) विकृति अस्त्यर्थे मुन् प् । विकृति- विरिया- इलैण्डको स्वनामधन्य अधीश्वरो गौर विशिष्ट, जिसमें विकार हो। भारतवर्षको सम्राज्ञो । भारतवर्ष में ऐसा पक भा व्यक्ति विकृतोदर (स' त्रि०) १ विकृत उदरविशिष्ट, तोदयाला। नहीं, जो विथोरिया का नाम न जानता हा। इङ्गलैएडफें (पु० २ राक्षसभेद । (रामायण ३२६।३१) इतिहासमें ऐसे बहुत कम शासकों का नाम देखा जाता है, विकषित (सं. नि०) विशेषरूपसे कर्षित अच्छी तरह । जिमने विकृोरियाको तरह प्रसिद्धि लाभ को हो। दया, जोता हगा। २ भारुष्टा खींचा हुआ। सहिष्णुता, न्यायपरता, उदारता मादि जिन गुणोंसे विष्ट (सं०नि०) विशेषेण कृपा-वि-कृपाक । आरुट, मनुष्य सुख्याति प्राप्त कर जगत्में अमर रहते हैं, उन सब स्त्रोचा हुमा । ' . गुणों का विकृोरियामें अभाव न था। इस कारण प्राय: विकटकाल (स'. पु०) विष्टः कालः । चिरकाल, सारी पृथ्वी पर सभी जातियां इन्हें श्रद्धाको हटिसे सब दिन। देखती थीं। भारतवासियोंको इनसे जो उपकार हुमा है, विफेट डोर (म. पु०) एक प्रकारका छोटा चकरदार दर घद आज तक उनके हृदयपटल पर भडित है। उसके याजा । यह प्रायः कमर तक ऊँचा और ऊपरसे बिलकुल | लिये घे आज भी महारानीका श्रदाकी एसे देखते हैं। खुला हुभाता है। यह वागी आदिके बड़े दरवाजों के सन १८१६ ई०को २४ वी मईको इनका जन्म हुमा। पास ही इसलिये लगाया जाता है कि आदमी तो मा जा| इनके पिता गलैण्ड के राजा ३रे जाके पुत्र थे। इनकी सके पर पशु गादि न मा सके। ' माता बहुत बुद्धिमतो घो। जिमसे चिकोरिया भयियों विकेश (त्रि०) विगतः केशो यस्य । १ शर्जित, एक होनहार महिला वन, इस भोर माताका विशेष ध्यान केशरहित, गंजा। जिसके बाल खुले हों। (पु.) रहता था। उन्हाको शिक्षा गुणसे आगे चल कर ३ एक प्राचीन मृपिका माम । ४ पुच्छल तारा । ५ एक विकोरियाने पच्छी सुण्याति मन की थी। मकारका नेता पचपनमें विकोरिया लण्डनफे फेरिस'टन प्रासादमे यिकेशी (सं० स्त्री०) विगतः केशो यस्या हो । १ केश. पितामाताके साथ सादगी तौर पर रहती थो, अपना यजिता, गदी भारत । २मही ( पृथ्यो ) रूप शिवकी सप्रय खेल दमें बिताया करती थी। यहां एक दिन जब पत्नीको नाम ३एक प्रकारको राक्षसी या पूतना। इन्हें मालूम हुमा कि कुछ दिन बाद ये लंण्डकी रानी ४ परयत्ति', कपड़े को यत्ती। होगो, तमोसं इन्होंने पढ़ना लिखना प्रारम्म कर दिया। विको (स० पु. ) कासुरका पुन । कतिपुराणमें | अठारह वर्षको उमरमें हो ये विविध विधायोंमें पार- लिखा है, कि कामुरके कोक और पिकोक मामक दो' दर्शिनी दी गई थी। ___Vol. xx1.69. IME