पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३३१

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विक्रमादित्य २३ २ चन्द्रगुप्त का जन्म हुमा। ये भी पिताकी तरह दिग्धि नामक एक दिगन्तविधृत कवि अयस्थान करते थे। जयो थे। ये बड़े तेजस्वी, विचक्षण अभिनेता, सुशास: मातृगुप्त के अन्यान्य साधारणगुणका परिचय पा कर राजा और परम धार्मिक थे । समुद्रगुप्तने उत्तर और दक्षिण विक्रमादित्यने उसको काश्मीर राज्य प्रदान किया । इन भारत जय किया था। पर उनके मरते हो प्रान्तीय सोमा | विक्रमादित्य के पुत्र प्रतापशील शिलादित्य है। चीनपरि- के का रामामीने गुप्तवंशको अधीनता मस्सोकार कर दी। ग्राजक हयुनसियाङ्गलिख गया है, कि उनके मालवा श्य चन्द्रगुप्तने गद्दी पर बैठते ही एक भोर.गङ्गापारको यह उपस्थित होनेसे ६० वर्ष पहले यहां शिलादित्य प्रवल. • भूमिका और दूसरी ओर सिन्धु नदीका सप्तमुख विदीर्ण प्रतापसे राज्य करते थे। पुराषित फाणुसन और फर बागियोंका दमन किया था। मालघमें शकाधिकारके अध्यापक मोक्षमूलरके मतसे उक्त विक्रमादित्यके नाम लोप होने पर भी उस समय तक सुराष्ट्र वरीमान काठिया पर हो यथार्थ संवत् प्रवत्तित हुआ। उनके यथार्थ अन्द. पाड़में शकक्षनपगण बहुत पराकान्त थे । गुप्तसम्राट् | फ ६०० वर्ष पहलेसे उनको भन्दगणना चलने लगी। किंतु २२ चन्द्रगुप्तने मालय और गुजरात होते हुए अरब समुद्र हम पाश्चात्य पण्डितोंके इस मतको समीचीन नहीं कर की योनिमाला विक्षोभित कर कक्षत्रपोंको मूलने नए | सकते हैं। (१ विक्रमादित्यके सम्बन्ध मालोचना कर दिया। ये शकवंशके उच्छेद कालमें; ३८८ से ४०१ | द्रष्टव्य) ० तक बहुत वर्ष तक महासमरमें लिप्त थे । इस कालमें पाश्चात्य पण्डितोंके मतसे ५३०.५४० ई० में हर्ष . उन्होंने जिस तरह असाधारण वीरत्वका परिचय दिया विक्रमादित्यका राज्यारम्भ है। था वीरोंने उससे विमुग्ध हो कर उनको 'विक्रमादित्य' विक्रमादित्य । .माख्यासे विभूषित किया था .. पास्तयिक इम । सातयों सदीके प्रारम्भमें काश्मीरमें भी विक्रमादित्य धौधे विक्रमादित्यके हायसे दी शकक्षत्रपकुल नामक एक पराकान्त नृपति राज करते थे। उनके पिता. एक ही धार नष्ट हुमा था। इसके बाद भारत के इति. का नाम रणादित्य.था। उन्होंने यभिमेश्वर नामक एक दासमें गौर शकराजाओंका नामोनिशान भी नहीं शिवलिङ्गको प्रतिष्ठा की थी। उनके ब्रह्म और गलून मिलता। इस चौधे विक्रमादित्यके समयमै गुप्त- नामके दो मन्त्री थे । ग्रह्मने अपने नाम पर प्रहामठ और साम्राज्य इतनी दूरमें फैला था, कि पाटलिपुत्रमें रह कर गलूनने अपनी पती रतायलोके नाम पर एक विहार सारे साम्राज्य पर शासन करना कठिन हो गया । धनवाया था। विक्रमादित्य ४२ वर्ष राज्य भोग कर इस कारण उन्होंने अयोध्यामें अपनी राजधानी हटाई। • अपने कनिष्ट घालादित्यको राज्य दे गये। काश्मीर देखो। ७ विक्रमादित्य । - . किन्तु फिर भी, पारलिपुत्र (पटना) की मदासमृद्धि यादामीके प्रसिद्ध प्रतोप चालुपशमें विक्रमादित्य गौर जनताको पृद्धिमें कमी नहीं हुई। इस ममय चीन परियाजक फाहियान गुप्तराजधानीको देख कर उग्रल मामके एक नृातिने जन्मग्रहण किया था । घे पोर. मापामें उनका परिचय दे गया है। यर २२ पुलिफेशीके पुत्र और प्रतोय चालुफ्प शाके प्रथम विक्रमादित्य कहलाते है। उनके मोर नाम हैं- . . :- ५ विक्रमादित्य । सत्याश्रय और रणरसिक । प्रायः सन् ६५५१०में इनका ___राजतरङ्गिणोके पढ़नेसे मालूम होता है, कि मभिषेक हुआ था। पुलिफशोको मृत्यु के बाद पलय, , काश्मीरम प्रवरसेनके मम्युदयसे पहले उज्जयिनी में चोल, पाण्डव और फेरलने विद्रोह मचा दया था। विकमादिस्य नामसे एक राजा राज करने थे। ये हर्ष मौर तो क्या पल्लयपति परमेश्यर के ताम्रशासनसे मालूम विक्रमादित्यफे मासे इतिहासमें प्रसिद्ध है। इन्होंने होता है, कि उनके भपसे विक्रमादित्य पहले भागने पर गरुम्लेच्छोको पराजय कर सारं भारतवर्ष पर अधिकार याध्य हुए थे। किन्तु उन्होंने थोड़े दो दिनों के बाद कर लिया। पं असाधारण सुकृतमान, झानो और शलु भों पर शासन स्थापित कर विक्रमादित्य नामका ' गुणिपोका माध्यस्थान थे। इनकी समामें मातगुप्त । अर्थ सार्थक किया। (चालुक्य गन्द !