पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३४७

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२१७ - विगन्धि-विग्गाहा विगन्धि (स.नि.) १ गन्धदीन । (क्लो०) २ गन्धहीन | यिगाद (म त्रि. ) विगाहाते स्मेति विगाह का वृक्ष। १ स्नात, महायो हुआ। २ प्रगाढ़, बहुत अधिक। विगन्धिका ( स० स० ) १६पुषा, हाऊयेर। २ मजः | ३ प्रौढ़, यच्छी तरह बढ़ा हुआ। ४ कठिन, सप्त । गंधा, तिलयन। . . | विगाथा (स. स्त्री०) आर्या छन्दका एक 'भेद। इसके विगम (स पु०) यि-गम ( प्रहपृनिश्चिगमश्च । पा विषम पदोम १२, दमरेमें १५ और चाय में १८ मात्राएं · ३१३१५८) इति भए । १ माश'। २ गोक्ष । ३ प्रस्थिति, | होती हैं और भन्तका वर्ण गुरु होता है। विभागों में चला जाना। ४ निष्पत्ति, अन्त, शातमा । ५क्षान्ति, जगंण नहीं होता, पहले दलका छठा गण एक लघुका ' सहनशीलता। . . मान लिया जाता है। इसे विग्गाहा और उदुगीति भी विगमचन्द्र (स' पु० ) बौद्धराजपुनभेद । ( तारानाथ ) कहते हैं। विगर्भा ( स० स्रो०) विगतगर्मा, जिसका गर्भपात हो विगान ( स० लो०) विरुद्ध गान परस्य । निन्दा । गया हो। . . . । विगामन् (स' लो०) विविध प्रकारका गमन । पगई (स० पु०) वि-गई-अच् । निन्दा, शिकायत । यिगईण (सलो . ) वि.गई क्युट । १ निन्दन, शिका. विगाह (से.नि.) यि-गाह-अन् । १ विगाहमान, सर्वत्र • यत । २ भर्सन, डॉट, फटकार ।' . . ध्यापित । २ अवगाहनकर्ता, स्नान करनेवाला । (को०) ... . "कृष्णे च भवतो द्वध्ये वसुदेवविगईष्यात्।" . | ३ अवगाहन, स्नान । विलोड़न, मथना । (हरिव'श'३६०२३) विगाहन (स'लो०) यि गाद-ल्युट अवगाहन, स्नान ) विगहंगा (स खो०) वि गई-णिच-टाए। विगाहमान (सं. नि०.) यि-गाइ-शानच् । १ भयगा. . . . विगहण देखो। नारी, स्नान करनेवाला। २ पिलोडनकर्मा, मपने. विहित (सं. वि०)यिगत, विशेषेण गर्हितः। वाला। १ यिशेषगसे गति, जिसे डांट या फटकार पतलाई विगा (स० वि०) यि गाद-यत् । । विगाहनयोग्य, गई हो। २ मिन्दनीय, पराय। ३ निपिद्ध। . | स्नान करने लायक । २ विलोड़न योग्य, मथने लायक । घिगर्दिन् ( स० नि०) वि-गह-णिनि। विगह कारक, विगिर (सं० पु.) विधिकर पक्षिभेद । निन्दाकारको, . . . . विगोत (सं०नि०) वि-गेकनिन्दित, गर्हित। विग । स नि०) चि गई-यत् । १ निन्दायोग्य, सिंगोति (सं० स्त्री०) १ निन्दा । २ एक प्रकारका छन्द ! निन्दनीय। २ महँगायोग्य, पारने उपटने के योग्य । पिगुण (म०नि०) विपरीतो गुणो यस्य । १ गुण वैश्रोत्य . लौकिक या शास्त्रीय निवन्धके साथ पणवन्धनादि विशिष्ट । २ गुणरहित, जिसमें कोई गुण न हो । ३ विकृत, बारा मोबात कही जाती है, उसे विगई कथा कहते है। खराका ४ सूक्ष्म, पारोका। पण फरके पाण्यप्रयोगको शाखने निन्दा की है, इस विगुणता (सं० खी०) पिगुणस्य मायः तल सराप । विगुण- कारण पण रख कर जो वान कही जाती यही विग का मायया धर्म। कथा । । | विगुल्फ (सं०वि०) प्रचुर, ज्यादा। विगधंता (स' स्रो०) विगह्यस्य माया, सलटाप ।। (भारवजायन पास ५) . विगका भाव या धर्म। विगूढ़ (सं०नि०) विशेषण गूदः, पि.गुह-क। १ गति । २गुप्ता विगलित (मनि०) विशेपेग गलितः। १ स्वलित. यिगृहा (सं० लि.) १ विप्रहयिपयोमूत । एतपिच्छेद, जागिर गया हो। २ जो यह गया दी, जोचू कर या अलग किया हुमा। 'टपक कर निकल गया हो। ३ शिथिल, ढोला पड़ा विगाहा (दि. सी) विगाथा नामक उन्द । ___ दुआ! ४ दिगदा हुमा।... . .. : .': - विगाथा सो। Vol. XII. 15