पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३५

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..पाच्यावाच्य-वाजअवस ३३ स्थिर शब्दोंका नियत अर्थ । अमिधा, लक्षणा और व्यञ्जना 1 वेति । एक प्रसिद्ध यज्ञ जो सात श्रौत यशोंमें पांचवां है। .ये तीन,शकिया शब्दको मानी जाती हैं। इनमेसे प्रथमके कहते हैं, कि जो वाजपेय यज्ञ करते हैं, उन्हें स्वर्ग प्राप्त सिवा और सबका आधार 'अभिधा' है, जो शब्द संकेत- होता है।

में नियत 'अर्थका योध' कराती है। जैसे,-'कुत्ता' और | वाजपेयक (सं० वि० ) वाजपेय सम्बन्धा।
मली'.कहनेसे पशुविशेष और वृक्ष-विशेषका वोध होता | वाजपेयिक (सं० पु०) वाजपेय यज्ञार्थ-पुत्रादि आवश्यकीय
है। इस प्रकारका मूल मर्थ वाच्यार्थ कहलाता है। । ट्थ्य

____सन्दशक्ति देखो। वाजपेयो (सं० पु.) १ वह पुष्प जिसने बाजयेय यश वाच्यावाच्य (सं० पु०) मली चुरो या कहने न कहने किया हो। २ ब्राह्मणों को एक उपाधि जो कान्यकुनों में योग्य पात। जैसे,—उसे पाच्यायाच्यका विचार होती है। ३ अत्यन्त कुलीन पुरुष । - नहीं है। वाजपेशस् (स० त्रि०) अन्न द्वारा अश्लिए, अन्नयुक्त। वाज (सं० क्लो०) १ घृत,.घो ।२ यज्ञ । ३ अन्न । ४ वारि, वाजप्य (संपु०) एक गोत्राकार ऋपि। इनके गोत्रके जल । ५ संग्राम । ६ यल । (पु०) ७ शरपक्ष, चाणका | लोग याजप्यायन कहलाते हैं। . पंस जो पीछे लगा रहता है। ८ शब्द, भावाज। पक्ष, वाजप्रमहस. (सं० त्रि०) १ धन द्वारा तेजस्वी, बड़ा , पलक । १० वेग । ११ मुनि। दौलतमंद । (पु.) २ इन्द्र। याज़ (म० पु०) १ उपदेश, शिक्षा ! २ धार्मिक व्याख्यान || वाजप्रसवीय ( स० वि०) भन्नोत्पादनसम्बन्धी। • ३ धार्मिक उपदेश, कथा। (शतपथना० ५।२।२।५) वाजकर्मन् ( सं० वि०) शक्तियुक्त कर्मकारी। . वाजप्रसय्य ( स० लि. ) अन्नोत्पादनोय । वाजकृत्य (सं० लो०) यह कार्य जिसमें पल या शक्तिका वागवन्धु (स० पु०) यलपति । • आवश्यक हो। याजवो ( म० वि०) वाजिबी देखे।। वाजगन्ध्य (सं० वि० ) शक्तिहीन, निर्यल।. .. . वाजमर्मन् (स' त्रि०) जिससे अन्न या वलका भरण चाजजठर (सं०नि०) हरिजठर, धृतगर्भ। वाजजित् (सं० त्रि०) शक्तिजयकारी। , याजमम्मीय (सं० लो०) एक सामका नाम । पाजजिति (सं० स्त्री०) शक्ति, क्षमता। वाजभृत् (स'० लो० ) एक सामका नाम । वाजजित्या (सं० स्त्री०) गन्नजयो, शक्तिशालिनी। . | वाजभोजिन् (स पु०) वाजं भुङ्क इति णिनि । पाजपेय वाजद (सं० त्रि०) बाज अन्नं ददाति दा-क । गन्नदाता।। याग! 'मन्दाय वाजदा युवं' (गृक १११३५।५ ) 'वाजदा घाजस्य वाजम्भर (स: त्रि०) हविलक्षणागमा भर्ना । अन्नस्य दातारी (सायय) बाजरटन ( स० वि०) १ उत्तम मन्नयुक्त । २ऋभु। याजदावन (सं० लि०) अन्नदातो। . .. . (भृक ४१३४१२) याजदापर्यस् (सं० लो०) एक सामका नाम । | बाजरलायन (सपु० ) सोमशुमन्फा अपत्य । पाजद्रविणस् (सं० वि०) अन्न और धनयुफ्त। .

(.ऐतरेय ८२१)

, . . . . . .(मुक ॥४३॥६) | वाजयत.(सं०.पु०.) एक गोत्रकार ऋपि । इनके गोतके धाजपति (सं० पु.) १ .अग्नपति । २ अग्नि। .. लोग 'वाजवतापनि' कहलाते हैं।. . .:. . (अक ॥१॥३) वाजयत् (स० वि०) १. वलकारी। (शुक...११३४॥३) याजपत्नी (सं० स्त्री०) १ अन्नरक्षयित्रो । २ धेनु । । २ अग्नयुक्त। (भूक. १२१२०१६). ... .. वाजपस्त्य (सं० लि. ) अन्नपूर्ण। (भृक ६।५।२१) '] वाजधव (सपु०) पुराणानुसार एक पिका नाम। वाजपेय (सं० पु० .लो०) याजमन्नं घृतं या पेयम- चाजश्रयस् (सं० पु०) १ याजश्रयाफै गोत्र में उत्पन्न पुग्य। Tol, xxI.9