पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३५५

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विचारमू-विचित्य ३०॥ बैठ कर मुकदमों आदिके फैसला करता हो. व्यायाधीग । विचारु (स० पु०) श्रीकृष्णके एक पुत्र का नाम । विचारभू (स. स्त्री०) विचारालय, अदालत 1 ( भागवन १०६१६) विचारयितव्य (स' नि०) विचर-णिव-तव्य । पिचार- विचार्या ( स० वि० ) विचर-णि यम् । विचारणीय, जोय, विचारक योग्य। जिस पर विचार करनेकी गावश्यकता हो। विचारवान् ( स पु० ) यह जिममें सोचने समझने या विचार्यामाण (सं० त्रि०) वि नर-णिच् शानन । विचार विचारने की अच्छी शक्ति हो, विचारशील। । णीय, विचार करनेके योग्य हो। विचारशक्ति (सं० स्रो०) यह शक्ति जिसकी सहायतासे | पिनाल (स.नि.) चि-चल-गण। मभ्यन्तर, अन्न विचार किया जाय, मोबने या मला युरा पहचानने की | राल। शक्ति | विचालन ( स० क्ली०) विशेषेण चालन, या पि-चल- विचारशास्त्र ( को०) मोमांसाशास्त्र । मीमांसा देखो। णिच् न्युट् । विशेषरूपसे चालन, अच्छी तरह घटाना विचारशील (संपु०) यह व्यक्ति जिसमें किसी विषयको या चलाना। २ नए करना । सोचने या विचारने की अच्छी शक्ति हो, विचारयान् । | विचालिन् ( स० वि०) विचल णिनि । विचलनाल, विचारशीलता ( स० स्त्रो०) विचारशील होने का भाय | चञ्चल। या धर्म, युद्धिमत्ता । | विचाप ( स० वि०) बि-चल-प्यत् । यिचालमीया विचारमल (म.पु.) १ वह स्थान जहां किसी विषय विचलनके योग्य । पर विचार होता.हो । न्यायालय, मदालना विधि ( म पु० सी०) घेवेक्ति जलानि पृथगिय राति विचाराध्यक्ष (म.पु.) यह जो न्याय-विभागका प्रधान विच (गुग्थात् फित् । उय ११६) इनि इन् सब क्ति। हो, प्रधान विनारक। योचि, तरङ्ग, लहर। विचाराधममागम (म त्रि.) विचार के लिये विचार-विचिकित्सन (सक्ली०) यिचिकित्सा, सम्बह । पतियों का एक समावेश। यिनिरिसा (म' स्रो०) पिचि-फिमसमिति थि-कित् विचारालय (स० पु.) यह स्थान जहां अभियोग सन् ग, राप्। १ सन्देह, अनिश्चय । २ पद सन्देह सारिका विचार होता हो, न्यायालय, कचहरो। जो किसी विषयमें कुछ निश्चय करने के पहले उत्पन्न बिमारिता ( स० स्त्रो..) १ प्राचीनकालको यह दासी हो और जिसे दूर कर कुछ निश्चय किया जाय। जो घर लगे हुए फूल पौधोंकी देख-भाल तथा इसी| पिचिकोपित (.नि.) पहितेच्छायुक्त । प्रकारके और काम करती थो । २ यह रखी जो समिविचित् ( स० लि.) विविधम्ति यिनित किया योग मानिका विचार करतो हो। यियेक द्वारा चयनकारो। (शुक्मयत: ४१२४ ) विधारित (म त्रि०) शिवार: सजातोऽन्य इति यिनार विचित (म' नि०) वि.प.क्त। अपिए, जिसका (सदस्य संजात तारकादिभातच पाश३६ इतच, अन्धेपण हो चुका हो। विसर णिचक्त। विवेचित, जिम पर विचार किण विनिति ( म० खो०) १ विचार, सोचना। २ मनु जा चुका हो। पर्याप-विग्न, पित्त। (भमर )२ जो सम्धान, शांचपड़ताल। भमो विमाराधीन है, झिम पर विचार होनेको हो। बिनित्त (स० त्रि.) १ अनेत, पेहोश। मिसका शिवारी (म०वि०) विचार कर्म गिलोऽस्प विचार चित्त टिकाने न हो, जो अपना कपि म समझ सकता णिनि । १ विचारकर्ता, जो विचार करता है। विचरण दो। कर्ता, जो इधर उधर चलता हो। ३ मिस पर चलनेफे विनित्ति (स. नी.) १ होगी । २यह यया लिगे बहत बड़े बड़े मार्ग बने हो, जैसे पृथ्यो। (पु.)] जिसमें मनुष्यका चित्त ठिाने न रहे। काम एक पुनका नाRI . । यिनिरुप (संवि०) मनुमाधेयविधार्य।