पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३६०

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विच्छाय-विजन्या पिच्छाय (स' पलो०) पक्षिणां छाया। समासे षष्टयन्तात् ७ वीधर्मे पढ़नेयाला कविताका स्थाग, अपमा परात् छाया पलीये स्यात् सा चेत् बहना सम्बन्धिनी | ८ कविताम यति। लोप। ... स्पात् । यथा योणां पक्षिणां छाया पिन्छामिति । (मरत)| विच्छेदक : (सत्रि०) विछिप-धुल १ विमोद पक्षियोको छाया। (पु०) विशिष्टा छाया कान्तिर्यस्य कारक, विच्छेद करनेवाला । २ जो काट या छ र इति। २ मणि। (भरत) ३ छायाका समाय । - अलग करता दो। ३ विभाजक, विमाग करनेवाला (नि.) मिगता छाया यस्य । ४ छायारहित, | विच्छेदन (सं० पलो०) यि-छिदुल्पुट । यिन्छ । जिसकी छाया न पड़ती हो। प्रापा ऐसा माना जाता काट या छेद फर अलग करनेको क्रिपा, अलग करना। ' ६. कि देयतामो, दानधों, भूतो मोरप्रेतों आदिको छापा २ नए करना, यरयाद करना। . .. । नहीं पहती। ५कान्तिरहित, श्रीहीन। . . विच्छेदगीय (सं० वि०) १ जो काट कर मलग करने । विरसायता (सी .) कास्तिहीनता । ... | योग्य हो । २ जो विच्छेद करने योग्य हो। - ( कयाधरित् १६।११३) विच्छेदी (सं० त्रि.) विच्छेत शोलं यस्य विहिन पिच्छित्ति (म. जो०).वि.छिइ-किन् । १ अङ्गराग, णिनि । विच्छेदकारक, विच्छेदन करनेवाला : रंगों मादिसे शरीरको चित्रित करना। २ विच्छेद, यिच्छेद्य (H० वि०) वि-छेद-यत् । विध्छेदके योग्य, जो . गलगाय । ३ हारभेद, एक प्रकारका हार। ४ छेद, काटने या विभाग करने के योग्य हो। यिनाश। ५ गेहावधि, घरको दोषार । ६ विना, विच्युत ( नि.)पिच्यु-क। विगत । २ जो कट विचित्रता। ७ स्त्रियांका स्वाभाविक अलङ्कारायशः . कर भथया गौर किसी प्रकार घर उधर गिर पड़ा हो। साहित्यमें एक हाय जिसमें स्त्री घोड़े शृङ्गारसे पुरुषको विध्युत्-क। जो जीवित महमेसे काट कर निकाला मोहित करनेको चेष्टा करती है। ८ चमत्कार । ६शिष्ट्य, गया। जो अपने स्थानसे गिर या हट गया हो। विशिएता। (पु.) १० कपाय, केका पेड़। ११ काट कर | विन्यति (सं० स्रो०) यि-व्यु तिम् । १ वियोग, किसा भलग या टुकड़े करना। १२ बुटि, कमी। १३ येष. मा। १३ यष | पदार्थका अपने स्थानसे हट या गिर पड़ना । २ गर्भपात, भपा मादिमें होनेवाली लापरवाही या बेढंगापन || गर्मका गिर जाना। १४ कवितामें यति। विजग्ध ( स० त्रि.) खाश एमा, निगला हुआ। . विडिन (संत्रि०) वि-छिद-क। १ विमक, जिसका पिन (त्रि.जिसको जार गां या न हो। अपने मूल अङ्गके साथ कोई संबंध न रह गया है।।। २ जिस गाड़ोमें धुरे मोर पहिये नादिन हो। . २ पृथक, जुदा । ३ जिसका विच्छेद हुमा हो । ४ जिसका विजट (सं०नि०) जसा रहित, जटाशून्य। अन्त हो गया है।। ५ कुटिल। (पु.) ६ बालरोगमेद । ७ गमौर सोमण, बहुत बिजन (०नि०) विगतो मना यस्मात् । निर्जना पर्याय- गदा घाय जो करनेसे हो गया हो। . . यियित, उम, निशलाक, रहा, उपांशु, विरित ( स० वि० ) पि-छुरन्त ! - मनुलिप्त, अनु पिजन (हिं..पु.) हया करने का पंगा, वामन। . ' विजनता (सं० स्रो०) जनशून्यता, एकाग्तका भार । विच्छत्तु (स.नि.) वि-छेद तृच । यिच्छेदकर्ता, | पिजनन ( स० पलो..) गि-जन ल्युट । प्रसय, मनन करने. मलग गलग करनेयाला। .. .. . को क्रिया। विद (स.पु.) यिछिद-प। १ पिपांग, विरह । विजम्मन् । त्रि०) वियद सम्म पम्या ..... २कार या छेद कर अलग करने की फिरा। ३कम या| दोगला। २यिक जन्म। (पु.) ३ वर्ण-समवाति . वोससे टूट माना, सिलसिला र माना। ४ किसी| भेद । ४ पदध्यति जो जाति-स्त कर दिया गया है। प्रकार मलग या टुक टुक परना। ५ नास, पर-यिकन्या (सां. स्रो०) गर्भधारणा, यह.रसो, जो प्रमप ." पाशे। ६ पुस्तकका प्रकरण पा अध्याय, परिच्छेद।' करनेको हो। . .