पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३६५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


विजयनगर. ३०६ विद्यमान है। परवीकालमै : विजयनगरके राजे मान । तन ध्वस्त कोर्तियों का महत्व देन कर लिया है, कि गुण्डी में ही अपनी राजधानी उठा ले गये। । । ' आज भी यहां जो सब भग्नावशेष पड़े हैं। उन्हें देख कर - १३३६ में वल्लालराजपशफे अघातिमफे बाद हरि यह पन्नाला नहीं लगाया जा सकता, कि ये सब अट्टा- "हर और घुक्क नामके दो भाइयोंने हाम्फी नगर वसाया|| "लिकार्यो किस कार्य में ध्ययाहत होती थी। पर हां, उनके ११५६४ में तालिकोटके युदंके बाद उनके घशधरोंने स्थापत्यशिल्पको पराकाष्ठाका भय कर मन ही मन क्रमश प्रमायाम्यित हो कर इस स्थानकी बड़ी उम्मति उन शिविपयोंकी कार्य कुशलताको प्रशंसा करनी होतो । की। पीछे प्रॉया एक सदी तक ये लोग यथाक्रम मान 1. उन अट्टालिकाओं में जैसे बड़े बड़े प्रस्तरमएड गड़े 1 गुण्डी, पल्टर और-चन्द्रगिरिमें अपनी शासनशक्तिको | · हैं, जैसे और कही भी दिखाई नहीं देते। कमलापुरके अक्षण्ण रख राजकार्य करते रहे थे। इसके बाद रिजा- निकट प्रस्तर निर्मित एक जलप्रणाली और उसके निकट पुर और गोलकुण्डाराजवंशके अभ्युदय पर विजातीय एक सुन्दर अट्टालिका है। यह डाट्टालिका स्नानागारको दोनों: शक्तियों में घोर संघर्ष उपस्थित हुशा गौर: उसीके | नरह प्रतीत होता है । इसके दक्षिण एक मन्दिरमें रामायण -फलसे आखिर विजयनगर राजवंशका अधःपतन हुमा ।। यर्णित अनेक दृश्य सत्कीर्ण देखे जाते हैं। राजप्रासारफे प्राया ढाई सदी तक इस.हाम्फोनगरमें राजपार स्थिर अन्तर्भुत हस्तिशाला, दरवारगृह और विश्राममयन भाज रन कर विजयनगरफे राजोंने इसका क्षेत्रफल बढ़ाया तथा भी उनके कार्यकलापका परिचय देने हैं। मग्न राज. घे कितने ही प्रासाद, मन्दिर और मनोहर सौधमालागोंसे प्रासादादि तथा मन्दिरके अनेक स्थानों को यहांफे लोगोंने इसकी धोति.कर गपे हैं । यह समृद्धि देख कर पाश्चात्य सपके लोभसे वोद डाला है। भ्रमणकारी Edwards Barbessn -और- Caesar Fre• • इसके सिवा राजअन्तःपुर मौर मानणभूमि माज भी . dericने लिया है, कि इस प्रकारका धनजन और वाणिज्य सुस्पष्टरूप में दिखाई देती हैं। जगह जगह कचे चे समृद्धिसे परिपूर्ण नगर । उस समय बहुत कम. देखने में | प्रस्तरस्तम्म विद्यमान हैं। उनमेसे ४९॥ फुटका एक 'आते थे। पेगूसे होरा, चीन भलेफजन्द्रिया मीर कुनापर जलस्तम्भ गौर ३५ फुटको एक शियमूर्ति विशेष उल्लेख. से रेशम : तथा मलवारसे कपूर, मृगनाभि, पोपल गौर 'मीय है। . दानेदार पत्थरक ३० फुट लग्ये सथा ४ फुट चन्दन गधिक परिमाणमें यहां लापे जाते थे। सीजर चौड़े और भी कितने प्रस्तर-नए प्राचीर भोर घरको ..मोकिने लिखा, "मैंने अनेक देशमीर भनेक राज-दीवार में संलग्न दिखाई देते है। किन्तु ये सब किम प्रासाद देखे है, किन्तु विजयनगरराज-प्रासाद के साथ उद्देशसे संलग्न किये गये थे, उसका माज तक पता नहीं उनको तुलना नहीं हो सकती, इस प्रासादफे मी मधेश. चला है। .. . • द्वार है। पहले,जय तुम राजप्रासादको भोर जायोगे, तब "राजप्रासादसे प्रापा १ पाय दूर नदी के किनारे एक तुम्हें सेनापति और सेनादल कक रक्षित पांच द्वार विष्णुमन्दिर है। यह माज भी काल के कायल गट नहीं देखने में मारेंगे। इन पझदारको पार करनेसे उनके! हुमा है । यह मन्दिर भी दानेदार पत्थरों का बना है । इस. मोतर पुगः मपेक्षाकृत यार छोटे द्वार मिलेंगे। उन द्वारों में शिल्पवित्रसम्पलित योर भी कितने स्तम्म खरो पर मति बलिष्ठ दरयान पहरा देते हैं। एक एक द्वार पार जाते है। .: कर भोतर:प्रयंग करनेमे मुमजित गौर सुपिम्तृत | दम्फोनगरमै माज मो बहुत-सी गिलानिमिषा उत्को प्रामाद देखने में भागे।" उनके यर्णनानुमार जाना | दिमाई देती है। उनमें शियमगर-रायंका कीर्तिः जाता है, कि पद मगर घारों मोर माया २४ मोन्ट विस्तृत कलाप जड़ा हुआ है। विद्यानगर देग्यो। । : है। गगरको रक्षा लिपे सौमातमागमे बहुत से प्राचीर यहां पनि यर्प एक मेला लगता है। है। ..':. :::.:: विमयनगर-दिनासपुर जिन्द्र के गम्तर्गत परगना।

१८७२० मिजे. फेसलने इस मगरको पूर्व- २रामाही जिलेये. गोदागासो थानेके भयोग एक

rol. xxl. 78. . .