पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३६९

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विजयनगरम २१३ विमोरियाको घोपणाम ( Imperial Proclamation) : का कार्यभार कोर्ट भाव याईसके हाथ माया। स्वयं उनको मारतके सर्वप्रधान सरदारोंको श्रेणीमें शामिल ; मी माग्या सुन्टताना साहया धोमहा राजलक्ष्मी देव.

किया गया और उनके मम्मानके लिये १३ तोपों की । देवो श्रोभलपरागेश्वरी महारानो नाबालिग पुनको ओरसे

सलामी स्वीकृत हुई। इस' श्रेणोक सरदार यदि किसी । विजयनगरमका राज्यकार्य देखतो थी। सन् १९०१०में ..कारणसे घाइसराय समोप मापे, तो पाइसराय भी। आप चालिग हुए । फलतः मापने सभी राज्यकायका मार . उनके यहां जाने पर पाध्य होगे, यह उनके.मम्मानके दी: अपने हाथमें लिया है। थाप पड़े योग्य तथा धार्मिक लिपेथा। है । भापका नाम है-मोर्जा राजा थोपशुपति अलन . राजा यिजयराम गजपतिराजके समय राज्यको । नारायण गापतिराज माग्या सुलतान बहादुर गुरु। - श्रीपृद्धिमे बड़ी उन्नति हुई।. यह उनको उशिक्षाका फल | राजस्वको वसूली की सुविधाओं के लिये यह जमीदारो है। पका रास्ता, पुल, अस्पताल और नगरकं मन्यान्य ! ११ तालुकां में बांट दी गई है। निष्ट स्थानों में प्रेज • विपोंकी उन्नतिके अनेक कार्यों में उन्होंने मन लगाया सरकारकी जैसो शासनपद्धति है, उसी तरहको शासन- ' था। उन्होंने अपने राजत्यमें गाराणसाघाममें, मन्द्राज 'पद्धति इनको जमीन्दारीमें मो है। ___ मगरमें, कलामें मोर मात ममुद्रपारक इग्लैएडफे। इस जमीन्दारी में प्रायः ३० हजार पट्टादार मजा मार लएडम नगरम जनसाधारणके कई हितकर कार्यो में अपने १० हजार कोर्फा प्रता है। यहाँ प्रायः २०५००० एकर • दानधर्मका यथेट परिचय दिया था। इस समय भी उन जमागमें हल पला कर खेतो की जाती है । जलसे सोंचो स्थानों में उनको उदारता तथा दानगीलताको बहुतेरो भूमिको मालगुजारी पासे १०) रुपये तक प्रति एक है 1'कीर्तियां विद्यमान हैं। इन सब काप्याँके लिये उन्होंने और सांधारण भूमि २) प्रति एकड़ है। सालोमा

प्रायर०.लाख रुपये खर्ज किये। सिपा इस रकमके पहले इस तालुकका धार्मिक राजस्य १० लांब या

उन्होंने मरते समय दातव्य भाएडारकार शिक्षा विभागको नकद मदाय होता था। इस समय प्राय: १८ ला पपा लाम्ब रुपया दाम किया था। पसूल होता है। यहां के अधिषासी साधारणता तेलगु सन १८७८ में महाराज घिमपराम गमपति राज हिम्न हैं। यिजयनगरम् गौर विमलापटन माम.हो की मृत्यु ह। इसके बाद उनके पुल मानन्दगज पितृपद मगर तथा कई कृषिप्रधान प्रामोम यहांका वाणिज्य पर मधिष्ठित हुए । सन् १८८१०में उनके सम्मानार्थ चलता है। उनको महाराजको उपाधि दी गई। सन् १८८४ मोर २ मद्राज-प्रेमिटेन्सीके विजगापहम् मिलेको १८९२ में 'घे गदाज व्ययस्थापकसमाके और मन् विजयनगरम् जमीन्दारोका तालुक या उपविभाग । मू. १८८८.० में बड़े लाटको व्यवस्थापकसमाके सभ्य परिमाण २६७ वर्गमील है। १८६ गांव मौर जिलेका नियनित हुए। सन् १८८७ में ये K.C. I. E और सन सदर ले कर यह उपविभाग गठित हुमा है। १८४२६०को २४ों मईको G C.I E. उपाधिसे विभू । ३ उक्त मिलेको विजयनगरम जमादारोका प्रधान पित हुए । दिल्ली के मुगल बादशाहने विजयनगरम्राज- नगर । यह पिमलोपत्तनसे । कोस उत्तर-पश्चिममें पर- 'को एक बहुन लम्यो उपाधि दी गी-महाराजा साहब स्थित है तथा मझा० १८०३० मार देना०८३२५ १०

मेहरबान मुपफ ददान करम् फरमायो मोण्लेमान पौत्त विस्तृत है। पहा राजप्रानाव, म्युनिसिपल माफिस,

महारामा मी माप सुलतान गुरु बहादुर' । सन १८१७ छानो भौर सिनियर असिप्टेएट कस्ल फुरका सदर १०में मन्दान-सरकारने राजा घंगानुफमिक राजोपाधि माफिम है। यहांको जनसंपया मायः४० हजार लग. मदाम को । सन् १८५००में मामन्दरातका जन्म हुमा। भग है। . . राजा बानादराजको मुत्यु दाद राजा पनि विजय गर सूब सुगठित है । यहाके मकानोंको घरों या राम राजगद्दी पर बैठे, किन्तु.पदपालक थे। इससे राज्य. 1 वोटालु पा समतल हैं। वर्तमान भारत-समार युय. Vo. XI, 79 .