पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/३७६

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विजयनन्दन--विनयपूर्णिमा परममा पारदर्शनफे शिये गो थे ! उगको गम्पा. मा म तरद पोरे भोर घटनासम्मकि रिया एक पारको प्रतिष्ठा पोले उम जालोको एलोकेर रanta राशिजरा गामि दि टुप राउनहाल } माहोको मापारय दे। झा या परा: En और भाप महाल हामि नगरको गोगा जाम, तय गोबरम रिपे हुए एक फैले हे पत्ते.पर बरसा गाना देगार पल मेग्यता एप ऐसा करनेसे पद पटाकार भर्यान मारना दम माया है। यह गाय होगा। उसोको विजयारा करते है।मानी (Chaptrianarm२. को माम दो मार गिया हो। कुछ, मर्श, गाय भोर मनाणे रोग सहाrior fadna मोर गिफाको घमण करमा पाता है। ज्ञाता है। व्यवहारका निमम RET-महिर पर पाना है। दोरत्तो हम पपेटीका सुपारोके जल माप संपत ना समगा एशिप.कालेज है, जिसका कुलबर्ग होता है। पाछे दिन प्रति विग १rtaबड़ाया दाहाम मिलता है। जिस दिन नारद रत्तो पो हो जायेगी, उसके दम . यिन (म0पु0) यातीय राजपिशेष · । से फिर प्रति दिन एक एकरसा पागा होगा । . पर-जय। भोपका दिन नौधे दएडमें मेयर करना होता है। 'पिपाय-प्रमायामाग गामक ज्योतिएफेम.. पीछे मयस्थानुमार दिगर्भ २४ पार कर सुपारी दाना "पिता । . . .: . फे माय सेयन कर सकते हैं। पध्यापकी प्याया-- पिनारायणम्-मदानप्रायोनियलो जिलान्तर्गत भाग्य संयन. तीसरे दिममें मामला जूम और मागगुणे सालुका मगर । यह गामगुणेरा सदर-दुग्धादिप्यम्धेय है। काले रंगको मानो, RATHI सं ५ कोस दक्षिमापूयं मस्थित है। विदग्धपदव्य ( तेल या निमलिसो सरह दो गुना रण. विजपत (सपु०) द्र! पार्थ), मे.ला, मूली, मेल और तेलको बधारों का पिनयमो (सं० ना० ) ग्रामोनाक । (पेदिक पि.) | मागाक । (पदिक पि०) | आदि पाना मना है। सोमम्मोग मौर दियानि भो । विजयटिस-पट्नमापाफे पर सर्पग्राम : महाभारत यगीय है। (रमेन्द्रसारस प्रपोग.) . ' ' मानुपादक तथा सशफ. एक प्रापीम कपि । विजय विजयपाल (संपु०१५ प्रानीग मंस्कृत वि। परितका भारत-सापानुपाद विजयपाएeयक माम मानक विजयपाल नामी प्रतिघे । २arist में प्रमिद। एक TRIL 'माप १०१६ मायम विपमान ॥१८ पिपपना . सी.) १ मेमाको यह पताका जो रामात नदेसरा मो १०३७icital जोत. साप पदराई जाती है। २ विजयसूचक को 'चन्द्राय जाय। पिजापुर (म.) पिण्डपति in . पिपरी (मो .) लो रोगको प. भोपा मार्ग पर प्रामांग मगर निगर रेस्यो। .. मातुन प्रणामी-२ तोले पारेको जपतोके पसे, दो गिजपूर्णिमा (म. पी.) शिमो के imm भूल, हाररक भार मायोक. रम माग मानुनि परमेघालो तर्णिमा, मानिकी पूर्णिमा पूजामा मामा देकर परिशुभ करे। पोठे २ गोला मामलमा । पाठ २ गोला मामलमा हिमाल दोहरे उमासे समाको पूरा करने माया में कर पुचूर्ण मोरोणे गाग afrafa mai महिपालो पा ratri दुपा पुग्मे सुम्पा में। मोन बार मप्र निधि और * : सुवामेबार निमें बोमून पर पदोनोरे मारनमेोगामार मान मार्ग XI Oन में। I I मि कुदाने पूर्णमा को को . • संग मोर को मामिलामाको मानामे मां ALERT पाया .