पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/४

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पसुर-पसारा शारिसल्प, ८ भवान, कौशिक, १० काश्यप, १५ यसरप-एक कपि। पसिष्ठ, १२ पारस्प, १३ सायर्णि, १४ परासर ठक यसरात (२००)पुराणानुसार एक अविका माग समो मारमागम भयेदो गायलापन-माधाध्यापीये। (मा० १० ११४।१३) रामानं यह पूरा होने के बाद टन लोगों को रामगृहपुरको यसपथ (सं० पु०) एक प्रकारके देवता। राम्प या पा। सिक.मलाय रामान उन लगाक मध्य यस चि (मं० पु. ) एक गम्पका नाम । निगोनवालोको गिरिराजमें पप उन मध्य भनेकांक (गया ८।१०।२७) पंकुण्ठपदके निपट प्रावण मासग प्रदान किया था। यसप (सं० पु०) शिव। एसके सियाप उन लोगों को पृषा पृथक् दशिणा भो मिलवसरता (ECR) मनि। शिया पी। उसी दिनसे उक पिप्रगण इस शोध में पूजित होते यस रोपिस (स०लो०) पसया रोपाते भस्मिमिति भारद हैं। रस-दोती (सौ पप संपा। उप ११२) इति अब प्रश्न उठता है, कि उक प्राह्मणपंशोय पसुराज सिन्। ११। (पु.)२९६ मम्मा प्रापिका कौन महामारत भोर पुराणमें जरासन्धफे पितामह नाम । गिरिमप्रतिष्ठाता जिस पसुरामका उल्लेख , जाति यस रोधी ( पु.) शिय। शानिय थे, प्राण नहीं। इस प्रकार प्राक्षण यसुराम जो यमुल (सं० पु.) पसु बीप्ति लाति गृहातीति साक। सतत व्यकि, इसमें सन्देश गो। देयता। ही लिप मापे हैं, कि सामग्मफे दो सौ वर्ष पशुपणि (सं०१०)१ घनपोप, पनवयागा। 24x. पहले शुलयका मन्युदय हुमा। विष्णु भोर भागवत. मान। पराण मतस- यशोप शेष रामा पदयको मार सुवन (स०पू०) १ पसबाग, पन देना। (०) २ १६. कर पुष्यमिलने शुष्य को प्रतिष्ठा की। पुष्पमिस घोर संहिता गनुसार शान कोण पिता पौर पिर पी । दिप्यायदान नामक माधोग बाद सपसपाह( 0) पनी|२५रिका माम । पता चलता,कि राजा पुष्पमिसने गशोकको प्रतिधित पसयाटल ससि)कोपयता पारासो दगार परामिकाको ध्यस करने की मनुमति दी यमयिद (.सि.) पसनि नियास पानि पियो पाउनदी पुल कालिदासफे 'मालापकाम्मिमिय' मारक- यि-हिए। मियासस्थानका प्रापक, जिसे रोक लिये मायमग्निमिल थे। अग्निमिस भो मश्वमेध य प जगद मिलो हो। (३०) २ भनि। चरिकमियााएका उतार कर पिगपात हुए थे। एहो । पहि (मो .) पनाम । भनिमिम पीय पएमित पे। बोधगपासे उनको पसुगनि (म.सी.) एक पोय-मिक्षणोका माम! शिलासिपि मारनामा स्थान से उगको गुदा मायिष्टतपसुभपस ( सि०) १ पगपान, दौलतार । हुई। पही पसुमित मधमादारम्प यणित पसुमासान है। प्रा. पसुमिरने दक्षिणी ग्रामको रामगृह यमुनी (मखी . )सन्दको अनुचरी पप गायकाका मगरी दाम कर पूर्वभारतमें माहण्य-धर्मप्रचार करनेके माम! (भारत ) सिपे गतिधित पिापा । यसमितपं. बाद मौर मी यसमत (सं.लिक)महाधनी, बहा दौलतमंद । (९०) पायाभो रामामोंगे राजाप किया। पोले पाय | २मलिगोसी पपिका माम! गोल पास देय नागक गुह सेनापति अपने प्रभुको मार पसघ (सी .) पणा दीपया श्रेष्ठ प्य पाशे। . ARE और सामाग्य मपणे विकार कर लिया। यापेज (स.पु.) पसुसेग, करार | पार (सं.पु.११ पसल, दंप! (ine ) ५ । मार (RT0) एक शपिका नाम, . पारशित (स.पु.) एक चोर गापा गाम। सारा (स.सी.) पुरलीपुरी, मनका