पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/४४९

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विद्यानगर ३७१ विद्यानगर वस। माना जाता है। तिरुमलने सिर्फ कई मास राज्यशासन चाहे रामरायका पतन किसी भी कारणसे हो, पर किया। इसके बाद १५८५ ६०के शेपासे लगायत उनके पतनके साथ ही सुविशाल विद्यानगर स. १६१४ ई० तक वेड्डटपनिने राज्य किया। विद्यानगरके प्राय हो गया। रामरायका हत्यासंवाद प्रचारित होनेके | राजाओं की माग्यलक्ष्मी जब जाती रही, तब उसके साथ वाद हिन्दूसेना चारों ओर भागने लगी, हिंदू राजे बहुत साथ राजधानीके स्थान में भी बहुत हेर फेर हुआ था। डर गये, किसी किसीने पराकमशाली मुसलमान शासन वेङ्कटपति पेन्नकुण्डास चन्द्रागिरिमें राजधानी उठा कर्तामों का साथ दिया। १५६५ १० में मुसलमानोंने लाये । धेङ्करपतिके वाद निम्नलिखित राजगण विजय- यपने प्रतापसे, विद्रोही हिंदुओंकी तथा हिंदूराजकी नगरके राजा कह कर प्रसिद्ध थे। विश्वासघातक मुसलमान-सेनामों को सहायतासे विजय नाम नगर पर आक्रमण कर दिया। इस समय यद्यपि पिया. श्रीरङ्ग (२य) नगरकी परिधि ६० मोलसे कम होते होते २७ मील हो राम १६२०-१६२२ गई थी, तो भी इसके राजपधं, उद्यान, राजप्रासाद, देव श्रीरङ्ग (श्य) और बेटाप्पा १६२३ मंदिर, नगर, हयादि पार्श्वयत्ती मन्यान्य राजाओं को | राम और घेङ्कटपति १६२६-१६३६ राजधानीसे कई गुणों में श्रेष्ठ थे। मुसलमानोंने क्रमागत श्रीरङ्ग ( ४र्थ ) १६३६-१६६५ अवाध और निर्विवादसे दश मास आक्रमण और लूट कर इन सब राजामों के नाम और शासनकालका समय विद्यानगरकी समस्त शोमासम्पद और विपुल पं भवको बिलकुल ठीक है, ऐसा प्रतीत नहीं होता। किन्तु चिध्वस्त तथा समृद्धिशाली सौन्दर्यमय विद्यानगरको | श्रीरङ्गका शासनकाल १६३६ ई०के पूर्व से आरम्भ हुआ श्मशानमें परिणत कर डाला। देवालय ढोह दिये गये। था, इसमें सदेह नहीं। क्योंकि इन्ही धीरगने मूर्ति तोड़ दी गई, राज-प्रासादको ध्वंस कर धन. १६३६ ई०में अंगरेजो को मद्राजका बन्दर दिया था। रतादि लूट लिये गये, हाट बाजार उजाड़ बना दिया गया, इसके बाद हम और एक तरहका राजयश पाते हैं जो अधिवासी स्त्रीपुत ले कर अपने मानप्राणको रक्षाके | इस प्रकार है- लिये भाग गपे! नाम अन्यान्य राजगण। १६६५-१६७८ स्यूपेलका कहना है, कि इसके बाद श्रीरङ्गके द्वितीय वेङ्कटपनि १६७८-१६८० पुत्र तिवमलने १५६४ ई०से १५७३ ई० नक राज्य किया। श्रीरङ्ग १६६२ किन्तु मि० स्यूयेलकी प्रदच बंशावलीमें देखा जाता १७०६ "है, कि रामराजके दो पुत्र थे, बड़े का नाम कृष्णराज और श्रीरङ्ग १७१६ छोटे का निकमलराय था। कृष्णराजने मानगुएडीमें महादेव अपनी राजधानी बनाई थी। उनके एक भी पुन न था। श्रीरङ्ग १७२६ रामरायके ज्येष्ठ पुत्र रहते हुए भी कनिष्ठ किस प्रकार वेङ्कट . १७३२ राजगद्दी पर बैठा था, उसका कारण मालूम नहीं। तिय. राम २७३६१ 'मलकी चार स्त्रियां थी, देङ्गलम्बा, राघवाम्बा, पदम्बा घेड्रपति १७४४ भौर कृष्णदाम्या । तिरुमलने १५६७ ई०को पेन्नकूण्डा- में राजधानी प्रतिष्ठित की। इनके तीन पुत्र थे, श्रोरङ्ग घेङ्कटपति १७६१-१७६३ उर्फ विशाखी, तिरुमलटेव उर्फ श्रीदेव और वेङ्कटपति । दूसरे नधई भिन्न विवरण देखा जाता है, जैसे- श्रीरङ्गका शासनकाल १५७४से १५८५ ३०.तक! श्रीरङ्ग रायालु १५५७-१५८५ श्रीरङ्ग