पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/४५८

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३८४ विद्यानन्द-विद्यापति शिक्षाविधानके लिये नाना प्रकारको चतुष्पाठी, विद्यानिधि-१ मत'नचन्द्रिका नामक नाटकके प्रणेता। .. और विद्यालय थे। पाणिज्य-व्यवसायको उन्नति..२एका विख्यात न्यायथागोश।.ये काव्यचन्द्रिकाके रच के लिये विद्यानगराधिोंने अच्छा प्रवध कर दिया था। पिता सुप्रसिद्ध पण्डित थे। विलासी उपकरण द्रव्य साथ शिल्पकी उन्नति अवश्य- | विद्यानिधितीर्थ-माध्वसम्प्रदायफे ग्यारहवें गुरु। ये भावी है। विद्यानगरमें शिल्पवाणिज्य और कृषिको | रामचन्द्रतीर्थ के शिष्य थे। १३७७ ई० में रामचन्द्र के मरने । यथेष्ट उन्नति हुई थी। राज्यको समृद्धि और जनसंख्या. पर ये गद्दी पर बैठे। १३८४ ई० में इनकी मृत्यु हुई। ' को अधिकता ही इसका अकाट्य प्रमाण है। स्मृत्यर्थसागरमें इनका और इनके शिष्यों का परिचय है। . इस विशाल नगरमें चार हजार सुन्दर और विपुनः विद्यानिवास-१ दोलारोहण-पद्धतिके प्रणेता। २ मुग्ध देवमन्दिर अर्चनावाद्यसे हमेशा गूजा करते थे। इसके | योधरीकाके रचयिता। ३ नयद्वीपवासी एक विख्यात ' .. सिवा धर्मचर्चा के लिये और भी कितने छोटे छोटे मन्दिर पण्डित । ये भापापरिच्छेदके प्रणेता विश्वनाथ तथा , धनाये गये थे, उसको शुमार नहीं। विद्यानगरके | तत्त्वचिन्तामणिदीधितिव्याख्याफे रचयिता रुटके:पिता राजाकी पालकीको संख्या थी २०००० । जब इतनी पाएको थे। इनके पिताका नाम था भवानन्द सिद्धान्तयागो। हुई, तय पालको ढोनेवालों की संख्या कितनी हो सकती विद्यानिवास भट्टाचार्य-सच्चरितमोमांसा. प्रणेता। हे म्यय अनुमान कर सकते हैं। विद्यानगरकी विशाल | विद्यानुलोमालिपि (स'. स्त्री०) लिपिविशेष । . : . समृद्धि कविको कसाना वा उपन्यासकारको असार . (लक्षितविस्तर) . . जल्पना नहीं है। इसकी प्रत्येक यात प्रत्यक्षदर्शी इति. विद्यापति-विख्यात ब्राह्मण कवि और अनेक प्रन्यों के . हामकारके सुदृढ़ प्रमाणके ऊपर प्रतिष्ठिन है। रचयिता । इन्हो'ने उपयुक्त पण्डितवंशमें जन्मग्रहण किया .. विजयनगर शब्द देखो। था। इनके पूर्वपुरुप सबके सब विद्वान् और यशस्वी ... विद्यानन्द-१ सुकायि । क्षेमेन्द्रकृत फयिकएठाभरणमें इन थे। पूर्वपुरुषों को वीजपुरुषसे पुत्रपौत्रादिक्रममें इनकी

:का उल्लेख है । २. एक, चैयाकरण । भाषशर्माने इनका

'वंशधारा नीचे लिखी जाती है। नामोल्लेन किया है । ३ जैनाचार्याभेद । ४ . साहस्रोफे .: प्रणेता । इनका अपर नाम पालकेशरो था। विष्णुशर्मा, २ हरादित्य, ३ धर्मादित्य, ४ देवादित्य, . विद्यानन्दनाथ-लघुपद्धति और सौभाग्यरत्नाकर नामक ५ वीरेश्वर, ६ जयदत्त, ७ गणपति, ८ विद्यापति ठाकुर, र तनमन्त्र के रचयिता। .. हरपति, १० रतिघर, ११ रघु, १२ विश्वनाथ, १३ पीता . - बियानन्द निवन्ध -एक प्राचीन तन्त्रसंप्रद ! तन्त्रसारमै • म्बर, १४ नारायण, १५ दिनमणि, १६ तुलापति, १७ एक- इस प्राधिका उल्लेख मिलता है !....: नाथ, १८ भाइया, १६ नानु और फनिलाल । नानुलालके , विधानाथः । प्रतापपशोभूषण नामक अलङ्कार और पुन वनमाली और फनिलालक पुन बदरीनाथ हैं। .. प्रतीक कल्याण नामक संस्कृत प्रत्यक रचयिता । इन्हें _ विद्यापति ठाकुरके पिता गणपति ठाकुर मिधिलापति

को कोई विधानिधि भी कहा करते हैं । कवि मोरङ्गल गणेश्वरके एक परम मिन और संस्कृतवित् महा-

जातीयवंशोक-राजा.२५ मतापरके आश्रियमें प्रति पण्डित थे। गणपतिने खर्गीय राजाके पारत्रिक मङ्गल ..पालित हुए थे। ( १३१०१०)। रामायणटीका के लिपे अपना रचित "गङ्गाभक्तितर्राङ्गणो" नामक far इन्हें कोई को वामिल कवि बटुवाच कहकर उत्सर्ग कर दिया था। विद्यापतिके पितामह जयदत्त संदेह करते हैं । ३ ज्योतिसारक प्रणेता के श्रीमाधः : भी एक असाधारण पण्डित थे। योगोश्वर' नामसे उनकी मुश्किल हो रामा अनुपसिंह के पुरोधस प्रसिद्धि यो । जयदत्तके पिता वोरेश्वरको उनके पाण्डित्य । वेदान्तोक गुण पर मिथिलापति कामेश्वरने यथेष्ट पृत्ति दी थी। विद्यालय मावासी प्रकारेश्वरको वनाई हुई प्रसिद्ध वारेश्वरपद्धति' के अनुसार .. के ब्राह्मण 'दशकमा या करत