पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/४८७

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विधवापन-विधातायुरा, ४०५ विधवाका विवाह भी निषिद्ध है। विधवासे उत्पन्न पुत्र | विधाता ( स० पु०) विधातृ देखो। जब पिता माताके धार्मिक कार्योंका अधिकारी नहीं, तब विधातृ ( स० पु०) वि-धा-तच् । १ ब्रह्मा। (भमर ) विवाहके प्रपोजनकी असिहिसे यह विवाह ही निषिद्ध २ विष्णु। ( भारत १३१४६६४ ) ३ महेश्वर । ४ काम- समझना होगा। कश्यपने दत्ता और वाग्दत्ता दोनों देव । ( मेदिनी ) ५ मदिरा । ( राजनि०) ६ विधानकर्ता, तरहको स्त्रियों के विवाहको निषिद्ध किया है। बनानेवाला । ७ दाता, देनेवाला । ८ सर्वसमर्थ । ___ पादत्ता अर्थात् जिसके विवादफे लिये वात दे | विहितकर्मानुष्ठाता, यह जो शास्त्रविहित कर्मों का अनु- दी गई, मनेादत्ता, जिसके विवाहको वात मनमें मान लो | ठान करते हों। १० निर्माता, बनानेवाला । ११ व्यवस्था गई है, कृतकोतुफमङ्गला, जिमके हाधी विवाह करनेवाला, ठोक तरहसे लगानेयाला । १२ सृष्टिकर्ता, . सूत्र बांधा जा चुका है। उदकस्पर्शिता अर्थात् जिस ! जगत्की रचना करनेवाला। इन अद्वितीय शक्तिसम्पन्न को दान दिया जा चुका है। पाणिगृहीतिका-जिस सृष्टिकर्ता जगदीश्वरको मायामें सभी जोप फंसे हुए हैं। का पाणिग्रहण-सस्कार हो चुका हो अथच कुश- | वे सृष्टिकर्ताके अतिविचित्र कार्यकलाप देख उनका 'ण्डिका नहीं हुई है। अग्निपरिगता-जिसको फुश यथार्थ तत्वनिरूपण नहीं कर सकते और अप्रतिभकी ण्डिका हो चुकी हो। पुन प्रभवा, पुनर्मू के गर्भ तरह सर्वदा पड़े रहते हैं, क्योंकि घे (जीय) देखते हैं, कि जिसका जन्म हुआ हो, ये सब यक्षित हैं अर्थात् | इस जगत्प्रपञ्चगे कहीं तो तृणसे पर्वत (दावाग्निके द्वारा), इनका दूसरा विवाह न होगा। यदि किया जाये तो | फीटसे सिंहशार्दूल, मशकसे गज, शिशुसे महावीर पुरुष पतिकुल ग्ध होता है। तक विनष्ट होता है, कहीं मूषिक मण्डक आदि खाद्य, कश्यपने वाग्दत्ता और दत्ता दोनोंका पुनर्विवाह | मार्जार भुजङ्गादि वादकोंका विनाश करता है। कहीं निषेध किया है। सुतरां इनके पचनानुसार भी विरुद्ध धर्मावलम्वी अग्नि और जलको बाष्पके आकारमें -विधयाका पुनबिघाह निषिद्ध है। विशेष विवरण विवाह' ! परिणत कर उसकी निर्मूलता सम्पादन करता है तथा शब्दमें देखो। अपने नाश्य शुष्क तृणादि द्वारा स्वयं विनष्ट होता है । यदि विधयापन (हिं० पु०) विधया होनेकी अवस्था, वह अयस्था विचार कर देखा जाय, तो इससे अधिक आश्चर्य और जिसमें पतिफे मरनेके कारण स्त्री पतिहीन हो जाती है, पपा हो सकता है, कि एक जहु मुनिने ही इस भूमण्डल- रडापा, वैधथ्य। प्यापी सात समुद्रोंका जल पी लिया था। विधवावेदन (सं० ली. विधवाविवाह । १३ अधर्म। (नि.) १४ मेधावी, विद्वान् । विधवाश्रम (सं० पु.) विधवाओंके रहनेका स्थान, वह | विधातृका (सं० स्त्री०) विधायिका, विधान करनेवाला। स्थान जहां विधवाओंके पालन पोषण तथा शिक्षा आदि-विधाता (स.पु०) विधातुक्षणो भूरुत्पत्तियस्य । का प्रबंध किया जाता है। विधस (सं० पु०) ब्रह्मा । १ नारदमुनि । २मरीच आदि । विधस (स० क्लो०) मधूच्छिप, मोम । विधानायुस् (सं० पु०) विधातुरायुजर्जीवितकालपरि- माण यस्मात् , सूर्यक्रियां विना यत्सरादिक्षानासम्मया. विधी ( म स्त्री० ) वि-धा-किप् । १जल, आप । २ विध देखो। देयास्प तथात्यम् । १ सूर्य, यह जिनसे विधाता विधातथ्य ( स०नि० ) १ विधेय, विधानके योग्य । स्पष्ट पदार्थका जीवित काल परिमित होता है। इनकी २ कर्तव्य, करने योग्य। उदयास्त क्रिया द्वारा लोगोंके वत्सरादिका ज्ञान होता है विधाता-भृगु मुनिके पुत्र का नाम ( मेरुकी कन्या नियति तथा उससे जीयका मायुष्काल निकाला जाता है, इसी से इनका विवाह हुआ थाविधाताके एक प्राण नामक कारण सूयाका विधानायुः नाम पड़ा है। पुत्र था। फिर प्राणके घेदशिरा गौर कवि नामके दो ... .२ ब्रह्माको उमर । बौदद मन्वन्तर अथवा मनुष्य. -पुन्न थे। .... .मानके एक कल्पका ब्रह्माका एक दिन, मानवीय तीन Vol. xxl. 102