पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/४९

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४३ .. ___ . . . . . वाटी - गृह थारम्भ करना चाहिये। इन सय महीनों में इन सब गृहमण्डपमें जब मिट्टी का घर बनाना हो, तद जिस स्थान दिशामाको नागशुद्धि रहती है। बाटीके प्रधान गृह- पर घर बनाना है, उस स्थानके ईशानकोणसे कारीगरको 'विषयमें इस तरह नागशुद्धिका निर्णय करना चाहिये ।। चारो कोनोंगे चार खूटे गाड़ने चाहिए। किन्तु अप्रधान गृहमें इस तरहको नागशुद्धि न देखने पर भी काम जिस स्थान पर ईटका मकान बनाना हो, वहां चल सकता है। इसमें किसी किसीका मत है, कि यदि | अग्निकोणमैं स्तम्भ खडा करना पड़ता है। इस प्रकार दिन उत्तम पाया जाय एवं चन्द्र तारादि शुद्ध रहें, तो स्तम्भ धा स्त्र दोनों ही स्थानों पर यथाविधान पूनादि गृहारम्भमें मासका दोष नहीं लगता। करना आवश्यक है। साम, बुध, बृहस्पति और शनिवारको विशुद्धकाल- गृहस्थों को मकानमें कबूतर, मयूर, शुक और सारिका में ( अर्थात् जिस समय गुरु शुक्रको बाल्यवृद्धास्तजनित पक्षा पोसना चाहिये । इन पक्षियोंसे गृहस्थोंका मंगल कालशुद्धि न रहे ) शुक्लपक्षमे युतयामिलादिधरहित } - होता है। दिनको उत्तरफल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तरमाद्रपद, भवनमण्डपमें हाथीको हड्डो एवं घोड़े की हड्डीका 'रोहिणी, पुष्या, आा, अनुराधा, हस्ता, चित्रा, स्वाति, रहना मंगलजनक है। किन्तु अन्यान्य जन्तुओंकी हड्डी धनिष्ठा, शतभिषा, मूला, अश्विनी, रेवती, मृगशिरा तथा रहनेसे अमंगल होता है । धन्दर, मनुष्य, गाय, गधे, कुत्ते, ध्रयणा नक्षत्र यज, शूल, व्यतीपात, परिघ, गण्ड, . • विल्लो, मेंड किंवा सूमर इन सब जन्तुओं को हहियां अमं. अतिगएड और विष्कुम्भके अतिरिक्त शुभयोग, शुभतिथि गल-कारक होता है। तथा शुभ करणमें गृहकार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। शिविर वा यासस्थानके ईशानकोणमें पीछे की ओर विष्टि, भद्रा, चन्द्रदग्धा, मामदग्धा प्रभृति, जो साधारण अधया उत्तरकी ओर जल रहने से मंगल होता है, इनके कार्य में निषिद्ध है, उन्हे भी देखना होगा। तिथिक , अलाये और किसी ओर जल रहनेसे अशुभ फल होता सम्बन्धमें एक विशेषता यह है कि पूर्णिमासे लेकर है। शभिशयक्ति गृह वा निकनन-निर्माण करने के अष्टमी पर्यन्त पूर्व मुखका, नवमीसे ले कर चतुर्दशो . समय उसको लम्बाई चौडाई समान न करें। गर्यान्त उत्तर-पूरबका, अमावस्यासे ले कर, अष्टमी पर्यात गृहके चौकोन होनेसे गृहस्थो धनका नाश अवश्यम्भा- पश्चिम मुखमा तथा नवमोसे ले कर शुक्ल चतुर्दशी यी है। गृहको लम्याई अधिक, चौड़ाई उसको अपेक्षा पर्यन्त दक्षिण मु'फा गृह भारम्भ नहीं करना चाहिये। कम होना हो उचित है। लम्बाई चौड़ाई कमी वेशी यह अत्यन्त निषिद्ध है। करनेके समय माप परिमाणमें जिससे शन्य न पडे, ' निनोक्त काष्ठ द्वारा गृहद्वार कया कपाट नैयार नहीं इसका ध्यान रखना चाहिये अर्थात् उनके मापके परि. करना चाहिये, करसे अशुभ होता है । क्षीरियशोद्भय माण दश, पोस तीस न हो। कारण इसमें यदि शून्य दारु, (अर्थात् जिस पक्षसे लासा यां गांव निकलना हो) |. पड़ेगा, तो गृहस्थों के शुभ फल के समय भी शून्य हो भा जिम वृक्ष पर चिड़िया पास करती हो, जो वृक्ष आंधीसे | उपस्थित होगा। उन्नड़ कर गिर गया दो या जिस पृश्नमें आग लग गई हो, . गृह या चहारदीवारीके दरवाजेको लम्बाई तीन हाथ ऐमै पक्षका काठ गृहगें लगाना उचित नहीं। इसके पयं चौड़ाई कुछ कम अर्थात् दो होनेसे शुभ होता है। अलाने हाथो द्वारा भग्न, यजमान, चैत्य तथा देवालयोत्सनः गृहके ठीक · मध्यस्थलमें धार निर्माण करना उचित श्मशानजात, देवाधिष्ठित काठ भी गृहकार्यमें वर्जनीय नहीं। थोड़ा न्यूनाधिक दोनेसे हो मंगल होता है। है। कदम, निम्य, विभीतको, प्लक्ष और शाल्मलीवृक्षके चीफोन शिविर चन्द्रयेध होनेसे ही मंगलजनक . काष्ट भी गृहक प्रयोग नहीं करना चाहिये। इन सब होता है। सूर्यवेध शिविर मंगलकर है। निगिरफे पक्षों के अतिरिक्त साल या साक्ष द्वारा गृहादिक कार्य मध्यमागमें तुलसीका पौधा रोपना उचित है, सम्मान किये जा सकते हैं। | उससे धन, पुत्र और लक्ष्मी प्राप्त होती है, शिविरक