पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५०२

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४१६ विनतक विनयकम्र्मन् सिफुड़ा हुआ । ५ विनीत, नम्न । (6) ६ सुप्रीवको | यिनन (स० क्लो) १ तगरको फूल। (नि० ) २ भुका : सेनाका एक बन्दर। शिव, महादये। ....... | हुमा । ३ यिनीत, सुशील । . . . . . विनतक (सं० पु० ) एक पर्वतका नाम। बिनम्रक-विनम्र देखो। . . . . . . . विनता (स' स्रो०) १ देश प्रजापतिको कन्या जो कश्यप-1 विनय ( स० पुं० ) वि-नी-अच् । १ शिशा । २ प्रति, कोनी और गरुड़की माता थी। २ प्रमेहपीडकाभेद, । नम्रता, आजिजी । विनयगुण विधासे उत्पन्न हो कर एक प्रकारको फोड़ा जो प्रमेह या बहुमूत्रके रोगियों को | सत्पात्रमें गमन करता है अर्थात् विद्वान् पुरुष विनयी । होता है। जिस स्थान पर यह फोड़ा होता है, यह होनेसे ही उसे सत्पात्र कहते हैं । सत्स्वभावापन्न होने से स्थान मुरदा हो जानेके कारण नीलं पड़ जाता है। सुंध से 'धनप्राप्तिको सम्भावना तथा उस धनसे धर्म और सुख । आदि प्राचीन ग्रन्थों में प्रमेहकं भरतर्गत इसको चिकित्सा होता है। विद्यारहनेसे ही जो फेवल विनय स्वयं आकर लिनी है। यह प्रायः घातक होता है। इस मग बहुतं यहां उपस्थित होती है. सी नहीं, यह पूज्यतम पद्धों तथा तेजी साथ सड़ता चला जाता है। यदि बढ़ने के पहले | शुद्धाचारी वेदविद् घालणों के सत्कारमें सर्वदा नियुक्त रह हो वह स्थान काट कर अलग कर दिया जाये, तो रोगी फर सीखना होता है। इस प्रकार क्रमशः विनीत होनेसे . वच सकता है। ३५क' राक्षसो जो 'प्याधि लाती है। सारी पृषियोंकों भी यशतापन्न किया जाता है, इसमें . ( महाभारत ) ४ एक राक्षसी जिसे रावणंने सीताको | जरा भी संदेह नहीं। यहां तक, कि राज्यभ्रष्ट निर्वासित समझाने के लिये नियुक्त किया था। व्यक्ति भी विनय द्वारा जगतको वशीभूत कर अपना ('त्रि०) ५ कुबड़ो या खi". , ....... राज्य पुनः प्राप्त कर सकता है। फिर जो, इसके प्रतिकूल विनतात्मज ( स० पु०) १ अक्षण । २ गरुड़ । ' ... | है अर्थात् जिसमें विनय नहीं है यह चाहे कितना ही धनी विनतानन्दन (स'० पु० ) विनंतात्मज देखो। पयों न हो उसे राज्यभ्रष्ट होना ही पड़ता है। ... विनताव (सपु०) सुद्युम्नके पुत्रका नाम । (हरियश), . ३प्रार्थना, विनती। ४ नीति । ५ पला, परियारा। विनंतापूनु (स.पु० ) विनताया सूनुः पुत्रः। (अक्षण (पु०) ६ यणिक, यनिया.: विशिष्टो नयः नीतिः विनयं । . . २ गड़। . . . . . .::;" .-। ७ दण्ड, शास्ति, सना । विशिष्ट . नोतिके अवलम्वन. विनति (स० स्त्री०) १ विनय, नम्रता । २ शिटता, भद्रता। पर इसका विधान हुआ. करता है। परस्पर विवाद ३ सुंशीलता । ४ झुकाय । ५ निधारण, रोक । ६ दमन, करनेघालों में पूर्ववतों यदि अधिक वाकपारुष्योत्पादक शासन, दण्ड । शिक्षा । र परिशोध । अनुनय । हो तो भी अर्थात उसके अत्यन्तः अश्लील पाण्यादि । १० विनियोग।. .. : ::- कहने पर भी पूर्यवत्तों वियाद -खड़ा. करनेवालेके लिये . विनती स. स्त्री विनति देखो। | कठोर दण्ड कहा गया है अर्थात् न्यूनाधिकरूपमे दोनों विनतह-सिंहलद्वीपकी राजधानी कान्दो नगरकी उप- फो हो दण्ड होगा, क्योंकि यहां पर दोनों ही मसत्कारी कण्ठस्थित एक गण्डग्राम । यहांके प्रसिद्ध दाधोयमें शाफ्य- हैं। फिर यदि दोनों ही एक समय विवाद भारम्भ करे, बुद्धको यास्थि प्रोथित है। इसके अलावा यहां वौद्ध ता.दोनों को समान दण्ड , मिलेगा।. ... . . कीर्ति और भी बहुतेरे निदर्शन मिलते हैं। ii | (त्रि०).८ क्षिप्त । नित। १० विजितेन्द्रिय । विनद ( स० पु०) विशेषेण नदति शन्दायते एनफलादि विशेषेण नयति प्रापयतीति दिनमः ।. ११ विशेष प्रकार: ... नेति नद्-भव । विन्याक वृक्ष, एक प्रकारका पेड़।' से प्रापक। १२ पृथक्कर्ता। १३ विनयी। विनय विनदिन (स' त्रि०) १शब्दकारों । २ वज्रके शब्दके (शास्त्रज्ञान जन्य संस्कारभेद) युक्त । १४ इन्द्रिय संपमा,,. . समान शब्द । (भारत वनपर्व) ... ... . . . जितेन्द्रिय। ५ विनति देखो। . . यिनमन (सं.लो०)। ननोकरण, गन्न करना, मुकाना विनयक.( स० पु०) विनायक । . : ... .. २ लचाना । (सुंधत स०.७ म०)::" 'विनयकौन ( सक्लो०) १ विनयविद्या।२ शिक्षा, शान। .