पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५०६

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विनायकपाल-विनिगमना

विनायकपाल-श्रावस्ती और धाराणसीफे एक नरपतिः खराव करना । ४ एक असुर जो कालका पुत्र था। तथा महाराज महेन्द्रपालके द्वितीय पुत्र। ये अपने विनाशान्त ( स० पु०) १ मृत्यु.मरण । २ शेष, खत्म। । ज्येष्ठ और धैमात्र प १म भोजदेयके बाद सिंहासन पर विनाशित (स.नि.) नष्ट, वरवाद। . ' बैठे। इनकी माताका नाम था महादेवी । इन्होंने विनाशिन् (स० त्रि०) वि-नश-णिनि। १ विनाशक ईस्वीसन् ७६१-७६४ तक राज्य किया। महोदय या नष्ट करनेवाला, परवाद करनेवाला । २ वध करनेवाला, फनोज राजधानीसे उनकी दो प्रशस्तिको देखनेसे वोध | मारनेवाला । ३ विगाइनेवाला, सराव करनेवाला। होता है, कि कनौज राज्य भी उनके कब्जे में था। विनाशी (स.नि.) विनाशिन देखो। । । विनायकम-कितने पण्डितोके नाम । १ न्यायकौमुदी | घिनाशोन्मुख (स' त्रि०) विनाशाय पतनाय उग्मुर । ताविरक्षाकी टोकाके रचयिता । २ भावसिंहप्रक्रिया १पफ,। २ नाशोधत । नामक व्याकरणफे प्रणेसा । पे भट्टगोविन्द सूरिके पुत्र विनासक ( स० वि०) यिगता नासा यस्य, बहुग्रोही कन् । धे! भायसिंहके लिये इन्होंने उक्त प्रन्ध रचा था। हस्यश्च । गतनासिका, नासिकाहीन, विना नाकका, ३ अगरेजचन्द्रिका प्रणेता। ये दुण्डिराजफे पुन थे। नकरा : १८०१ ६० में इनका अन्य समाप्त हुआ। ४ युद्धनगरके विनासिका (स' स्रो० ) नासिकाका अमाव ।' निवासो माध्यमके पुन । ये कोपितकीघ्राह्मणमाप्यफे पिनासित (स.नि.) नासारहित, नका।। रचयिता हैं। इन्होंने कालनिर्णय और कालादर्शका मन (दिल्या. YEER) उद्धत किया है। विनाह (स.पु०) विशंपेण नह्यते गनेन यि-नह ( ARI विनायफस्नानचतुर्थी (सं० स्त्री०) चतुर्थीयतमेद। २३९२१) इति घम् । यह आच्छादन पा डकनो विनायिका (सं० स्त्री० ) विनायकल्प स्त्री, भार्या डीए । ) जिससे फूपं का मुंह ढका जाता है। गरुड़की पतो। .. . | विनिास्त (स० वि०) वि निट सक। पिनिर्गत, घहिर्गत, विनायिन् (सं० वि०) यिनी-( सुन्यजातो पिनिस्वाच्छोट्ये ।। | निकाला हुमा, जो बाहर हुआ हो। पा ३२२१७८ ) इति णिनि । विनयशील, विनयो। विनिकर्तव्य (स.नि.) काट कर नष्ट करने के योग्य ।। पिनार-विशालके अन्तर्गत एक गोयका नाम। . . विनिकार (सं० पु०) १ दोष, क्षति, अपराध । २ विरक्ति, (भविष्यमाख० ३६१६१) । घेदना ! चिनारुहा (स० सी०) विना माश्रय रोहतीति मह-क, यिनिहन्तन (स.नि.) विशेषरूपसे छेदा हुआ, काट त्रियां राप्। विपर्णिकाकन्द । (राजनि०) , कर नए किया हुआ। विनाल ( स० पु०) नालयियुक्त। (भारत द्रोणपर्य ) | यिमिक्षण (स क्लो०) विशेषरूपसे चुम्बन, बेधन या विनाम ( स० पु०) विनशनमिति वि नश घम् । १ नाश, मेदन। (निक ४१८) ध्वंस, अस्तित्यका न रह जाना, मिटना, वरवादी । विनिक्षिप्त ( स० वि०) विनि-क्षिप्त। १ यिनिक्षेपा. - २ लोप. मदर्शन। ३ विगह जानेका भाय, खराब हो श्रय, निक्षेप या फेंका हुआ । २ परित्यक, छोड़ा हुमा।. • जाना, निकम्मा हो जाना। ४ हानि, नुकसान । ५ धुरी विनिक्षेप्य ( नि.) वि-नि-क्षिप् यत् । विशेष प्रकारसे । दशा, तयाहो। . . . . । निक्षेप करने के योग्य। .. . . . .. विनाशक ( स० लि.) वि-नश-ण्वुल । १ घिनाशकर्ता, विनिगह (सं० वि०) मल विदित '.. क्षय करनेवाला, संहारक । २ घातक, अपकारक, विगा | विनिगडोकृत ( स० त्रि०) निगडयियोजित ।। डनेवालो, खराव करनेवाला। ....... | विनिगमक (स. त्रि०),दो पक्षों में से किसी एक पक्षको, विनाशन (स. पु०) १. नष्ट करना, ध्वस्त करना, पर- सिद्ध करनेवाला। विनिगमना देखा। ... ... वाद करना । साहार करना, वध करना । ३ रिगाड़ना, 'विनिगमना (स'० स्त्री०) १ एकतर पक्षपातिनी युक्ति, एक;