पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५१९

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विन्ध्यगिरि-विन्ध्यवासिन् ४३३ दक्षिण में आगरासे होशाबाद तक. ३०० मीलोंमें फैले ।। . नर्मदा नदी किनारे विध्यपतांशका सुप्रसिद्ध हुए प्रस्तरस्तरका जो एक पार्वत्य गर्भ ( Rock-basin) | 'मर्गरपान ( Marble rocks ) है। ऐसा उजला मर्गर. परिलक्षित होता है, भूपखरके उस स्तरसमप्टिको | पर्वत भारतके और किसी स्थानमें दिखाई नहीं देता। साधारणत: Vindhyan Formation कहते हैं। इस । । .. मर्मरमस्तर देखो। विस्तीर्ण पाट्य- पञ्जरके चारों मोर पलुई पत्थर | बिन्ध्यचूलक (संपु०) विन्ध्यचूलिक देखो। (Sand-stone के स्तर पाये जाते हैं। उनके साथ विन्ध्यचूलिक ( स० पु०) विन्ध्यपळतके दक्षिका निसिक या द्राजिसन प्रस्तरका ( Transition or gnei• ) प्रदेश । महाभारतके अनुसार यहां एक प्राचीन जंगलो asic rocks) कोई सोसादृश्य नहीं है। किन्तु इसके जाति रहती थी। पूर्व भागमें अस्थित बुन्धलखएड और शोण नदोके विन्ध्यनिलया (स' स्रो०) विध्ये विन्ध्यपाते निलया उपत्यकादेशमैं ' उसके समान स्तर में जो प्रस्तरस्तर है, अवसानं यस्याः। विन्ध्यवासिनी दुर्गा'। ये विपरीत भावसे गठित हुए हैं । इन प्रस्तरस्तरोंके नोचे विन्ध्यपर ('स'. पुं० ) विद्याधरविशेष । जो सब स्तर भूगर्भमै 'प्रोधित हैं, उनकी गठनप्रणालो। '. (कथासरित्सा. ३१२२) 'भी सतम्ल ही यह सब देख कर शानिकतरवको मालो. / विध्यपर्वत (सं० पु.) विध्य नामक शैल'। आधु. चनाको सुविधा के लिये भूतत्वविदोंने विन्ध्यपर्वतके निक भूगोलमें ( Vindhya Hills ) नामसे वर्णित है। समग्न स्तरोंको ऊंचा मौर नीचा (Lower urid Upper | यह आपरी या हिन्दुस्थानको दाक्षिणात्यसे अलग Vindhyan ) नामने ममिदित किया है। कानूल, करता है। विन्ध्यगिरि देखो। पालनाड, भीमाका ययाहिकाप्रदेश, महानदी और | विन्ध्यपालिक ( स० पु०) जातिविशेष । (विष्णुपुराण ) गोदावरी. विभाग, शोण प्रवाहित पात्यभूमि और विन्ध्यपार्श-विन्ध्यगात्रस्थ देशभाग । 'यहां विध्य. धुन्देलखण्ड विभागफे नीचेको विन्ध्यवेणीफे पतिस्तर वासिनी मूर्ति प्रतिष्ठित है। ही अधिक देखे जाते हैं । फिर शोण नर्मदाको सीमा पर, (भविष्यप्राख ८१.२४,७५) बुन्देलखण्ड के सीमान्त पर, गङ्गातोरवत्ती पार्वत्यभूमिमें विन्ध्यपूपिक (स० पु०) जातिविशेष । गौर भारावली सीमा पर ऊर्शतन-विन्ध्य प्रस्तरस्तर (मस्यपु० ११३३४८) बहुतायतसे देखे जाते हैं। विध्यमूलिक ( स० पु०') जातिविशेष । (विष्णुपुराण) इसी उर्दा यिध्यपतिस्तरमें हीरा पाया जाता है। विध्यमालेय (स0पु0 )जातिविशेष। दौरा पानेको वेठामें अनेक स्थानों में स्वान खोदी गई है। (मार्क०० ५४४७) और उनके भीतर पलिमय स्तरको छोड़ कर बड़ा हो विधावत् (सपु०) पक दैत्यका नाम । इसको कन्या का स्तर दिखाई नहीं दिया है। किन्तु रेवाराज्यके मन्त. । कुन्तला पतिका गाम था पुष्करमालो। शुम्मने इसका गत ऐसे स्तरों ( Rewashales ) के नीचे बहुत कुछ / पध किया था 1 (मार्फपडेयपु०.२१॥३५) हीरा मिला है। होरे निकालनेके लिये मानके अधिः | विन्ध्यवर्मन् ( स० पु०.) मालवके परमारवशोयं एक कारियोंने विशेष परिश्रम और अर्धा नष्ट किया है । पन्ना. राजा ये पिता ममयवर्माको मृत्युफे बाद सिंहासन .राज्यके दक्षिण · ऊपर-रेवा यलुई पत्थर (Upper | पर बैठे। . . ' Rerra Sandstone) पदाप्टके टालुप देशमै अश्या | विन्ध्यवासिन (सं० पु०) विध्ये बसतोति घस णिनि । पोतकन्दरोम और उक्त बलुई चट्टानोंके निम्नस्तर १च्याहि मुनिका एक नाम। २एक पेयाकरण | राय- वियपर्वातस्तरसे कुछ उस पात्य प्रदेश में ऐसे कई ) मुकुट और चरितसिहने इनको उल्लेख किया है। ३२ होरेको म्याने बोदी गई है। प्रीष्म शतुको छोड़ अन्य वैद्यक प्रपके रचयिता । लौहप्रदीप इनका नामोल्लेश अतुओं में मानके काम करने में सुविधा नहीं है। मिलता है। (नि) ४ विध्यपय तपासी । Vol. XXI..100 M.