पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५३३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


विप्रलगमफ-विप्रिय ४५३ विरह, जुदाई।. ४ विच्छेद, अलग होना। ५ विरुद्ध । २ संन्यास आश्रम में एक अपराध जो अपने कपड़े दूसरे- कर्म, बुरा काम। ६ कलह, झगड़ा। ७ ममिलन, | को देनेसे हेाता है। वियोग। ८ ममिलपित यस्तुको यप्राप्ति, चाही हुई विप्रयासन (सं० ली.) घिदेशमें जा कर पास करना। वस्तुका न मिलना । ङ्गाररसभेद। १० क्षारविशेष, विप्रधाहन (सं० ली.) १ विशेष वाहन । २ सरस्रोत, युवकयुवतीका पिच्छेद या मिलन, जिस किसी अवस्था | तेज धार। में अमीट मालिङ्गनादिका अभाव रहने पर भी यदि दोनों | विप्रयाहस् (सं० वि०) मेधावीकर्त,क यहनीय, डा विद्वानों. मागन्द प्रकट करे, तो उसे विप्रलम्म कहते हैं। यह से ढाने लायक हो। सम्भोगका उन्नतिकारक है। विविध (सं०नि०) अभिहत । विप्रलम्भक (स० वि०) १ प्रतारक, पूर्त। २ विसंवादो । विप्रयोर (सं० वि०) विशेषरूप योर्यशालो, खूब परा- विप्रलम्भन ( लो०) १ भत्य आचरण, विरुद्ध कर्म। मी।' २प्रतारण, ठगना। | प्रियजनी (सं० स्त्रो० ) यह नी जो दो पुरुषोंसे संबंध विप्रलम्मिन् (०नि०) १ शठताकारी, धूरी । २ पचना- रखे। कारी, धोखा देनेवाला।' विप्रयाजिन (सं० वि०) विशेषरूपसे गमनशील, खूप विमलय (० पु०) साध्वंस, विशेषरूप प्रलय। चलनेवाला। विप्रलाप (स० पु०) यि प्र-लए घन्। १ प्रलापयाश्य, | विप्रशस्तक' (सं० पु०) १ एक देशका नाम । २ उस देश- ध्या वकयाद । २ कलह, झगड़ा। ३ पचना, घोना का अधिवासी। (मार्फपु०५८३४) ४ परस्पर विरोध, आपसमें घुरा पचग । जैसे एकने विप्रश्न (सं० पु. ) ज्योतिपोत प्रगाधिकार, यह प्रश्न मिठो बोलीमें कहा, या कल्याणो माई १ दूसरेने रुसी | जिसका उत्तर फलित ज्योतिष द्वारा किया जाय। पोलोमें जवाप दिया नहीं। ऐसे विरोधजनक भालापको विप्रनिक (हॉ० पु०.) वि-प्रश्न-उन् (मत इनि ठनौ । पा विप्रलाप कहते हैं। ५ विरुद्ध प्रलाप । । ।११५ ) दैवज्ञ ज्योतियो । विप्रलोन (सं.सि.) इतस्ततः विक्षिप्त, चारों ओर | विश्निका (सं० स्रो०) देवा, ज्योतिषिनी । विखरा हुमा। (घमर २६११) विप्रलुप्त (सं० वि०) १लुएिठन, लूटा हुआ।२ अप- | विप्रष्ट (संपु०) पर यादवका नाम जो दलरामजीका हत, जो चुराया हुआ। ३जो गायन किया गया हो, | छोटा भाई लगता था। उड़ा दिया गया हो। ४ जिसके कार्य में विघ्न पहुं विप्रसास् (सं० मध्य०) ग्रामणका आयत्त । (रघु ११३८५) चाया गया हो। . . विप्रसारण ( स० क्ला० ) विस्तारकरण, विस्तार करना, विप्रलुम्पक (सं० लि.) १ अतिलोभी, बड़ा लालची। फैलाना। . २ उत्पोहक, अपने लाभ के लिये लोगोंको सतानेवाला । विप्रहाण (सं० क्ली०) १च्याग२ मुकि। ३ अधिक कर लेनेवाला। . ! विप्रानुमदित (सं० नि० ) सङ्गीत द्वारा उल्हासयुक्त, गोत. विप्रलाप (सं० पु० ) १ विक्कुल लेप। २ नाश। से प्रसन्म । यिमलामी (स.नि.) १ मति लोभो, बड़ा लालचो । यिप्रापण (सं० क्ली० ) १ प्राप्ति, पाना। २ आत्मसात २ यशक, ठग, घूत्त। (पु.)३किड्डिरात वृक्षा क रण, हड़पना , विभयसित (सं० लि. ),विदेशगत, परदेश गया दुमा विप्राषिक (सं० पु०.) मझा, बानेवाला। विप्रयाद (स.पु० ) १ रियाद, कलह, झगड़ा । २ विरो- विप्रिय (स..लो०) विरुद्ध प्रोणातीति विप्रो क । धाकि, बुरे वचन। । ५ अपराध, कसूर ! पर्याय--मन्तु, पलोक, माग । (हेम) विप्रवास (सं० पु० ) १ विदेशमें यास, परदेशमें रहना।।, खि०) २ अप्रिय । ३ कटु। ४ अतिशय प्रिय । ५वियोग । Vol. xxI. 114