पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५३४

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४५४ विद्-विन्ध विनट ( स० स्त्री०) विशेषेण प्रोपति दहति पापानि, } खड़ा करनेवाला, बलवाई विप्लपकारी, उपप मचान, चि-अप-विप। १ पानोको छोटी छोटी वूद या छोटा। घाला। : ।। ... . ... - "विप्र पश्चैग यावन्त्यो निपतन्ति नमस्तलात् ।" ( भारत) यिप्लायो (.नि) १ विपर्यायकारी, उपद्रव करने- २ मुखनिर्गत जलविन्दु, थूकका यह छोटा जो वेदपाठ घाला। २ जलप्लावनजनक, जलको पाद लानेवाला। करनेमें उड़ता है। मनुस्मृतिके अनुसार ऐसा छोटा | | यिप्लुन (स० त्रि०) १ व्यसनार्स, व्यसाफे कारण किसी अपवित्र नहीं है। कर्मपुराणमें लिखा है, कि आयतनके वस्तुके ममायमें प्याकुल, पर्याय-पञ्चमद्र, व्यसनो। समय मुबसे जो जलविन्दु निकलती है, यह भी अप. (हेम)२ विक्षिप्त, छितराया हुआ। ३ माफुल, घर.. वित्र नदी है। । . ...... राया हुया। ४ ध, दुःखी।५ भ्रष्ट, पतित । ६ नियम विप्रप (सलो० ) पानीको छोटी यू'द या छोटा। । प्रतिज्ञा आदिसे च्युत। . " । विभुट देखो। विप्लुना (सं० स्त्रो०) यानिरोगविशेष। इसका लक्षण.. धित् ( स० वि०) विन्दुःशिष्ट। प्रक्षालन नहीं करनेसे योनिमें खुजली होती है और उस विप्रेक्षण (सं० लो०) वि-प्र-ईश ल्युट् । विशेषरूपसे खुजलाहटसे रति उसे अधिक मासक्ति उत्पन्न होती है। दर्शन, अच्छी तरह देग्नना। । इसोका नाम विप्लुतायोनि है ।. योनिरोग देखो। विप्रेक्षिन (संत्रि०) दृष्ट. जो देखा गया हो। विप्लुति (सं० स्त्रो०) विप्लव; उपद्रय, हलवल ! . . विप्रेत ( स० त्रि०) विगत, जो वोत गया हो। विप्लुप (संपु०.) विम देखो। ।. विन मन् ( स० नि०) यति प्रेमासक। . . . ! विप्सा (स.स्त्री० ) वोठा देखो। : .. .. , विप्रेपित (स० लि०) विप्र-वस-क। १ प्रवासित, प्रयास विफ ( स० वि०) फ-वर्णरहित । ( पञ्चविंचवा० ८॥५) में गया हुआ। २ अनुपस्थित, गैरहाजिर विफल ( स० वि०) विगत फलं, यस्य । १ निरर्थक, विप्रोपित ( सं नि०) विपषित देखो। ::, व्यर्थ,. २ निष्फल,. येफायदा। : ३ निराश, हताश । विप्रोपितमत्त का (स० स्रो०) यह स्त्री, जिसका पति या ४ फलरहिस, जिसमें फल न रहता या लगा है। ५ मत प्रमो परदेश गया हो। . . . . . कार्य, जिसके प्रयत्नका कुछ परिणाम न हुआ हो । विप्लप ( स० पु०) वि.प्लु अप् । १ परयमादिका भय, ६ भण्डफोपरहित । (पु०) ७ पन्ध्याकोटकीयक्ष, दूसरे राष्ट्र द्वारा उपस्थित अशान्ति । २ उपद्रव, दमककष्टी । ..... ..... ... . हंगामा। ३ राज्यके भीतर जनताको अशान्ति और विफलता (स. सी.) १ निष्फलता ।- २ नैराश्य और उद्धत आचरण, बलवा। ४ अपघस्था, उथल पुथल। व्यर्थता। .. . . . . . ५ विपत्ति, आफत । ६ विनाश। ७ शत्रु को उगनेके विफला ( स० स्त्री०) १ केतको । (लि०) २ दिना फल . लिये मचाया हुमा शोरगुल । ८ नायका, इवना।। को, जिसमें फल न लगें। ३ जिसका कुछ परिणाम न . ६ जलको बाढ़ । १० घोड़े की बहुत तेज बाल ! ११ घेदी : निकले। ४ जो प्रयक्षमें कृतकाय न हुई हो। के अपूर्ण ज्ञान द्वारा उनका अनादर | - ... विफलीभू (स' त्रि.) निष्फलीभूत। .. " विष्लयिन् ( स० त्रि०) वि.प्लु-गिनि । १.यिनुपयुक्त । घिफाएट (स नि०) फाएट, कढ़ा बनाया हुआ। २-जललायी।। . :. :: ..... ". . , . :: ... फायट देखो। विलाय (स.पु.) विलु धम् । १ जलप्लायन, प्रामीको ! विषय ( स० वि०) आवद्ध बंधा हुआ। .... बाढ़ । २ अभ्यकी प्लुतगति, घोड़े की बहुत तेज विषन्ध ( स० पु०)१ आकलन, मालिङ्गन करना, गले । चालं।' : : :: (. . :..-लिपटना। पादोदरविन्धः (महाभारत ७. द्रोण) २ विहायक (संवि०) १-जलप्लायनकारी..जलको बाढ़ विशेषरूपसे बन्धन, जोरसे बांधना। ३ वैद्यकोक्त गानाहणे • लानेवाला राष्ट्रोपद्रयकारो, राज्यमें उपद्रव ': भेदः। इसको लक्षण आहारजनित अपकरस वा पुरीष