पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५९०

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विरूपशक्ति-विरेचन

नामके दो भेद कहे गये हैं, स्वरूपपरिणाम और विका- विरूपाश्व ( स० पु० ) राजभेद । ( भारत १३ पर्व) परिणाम | धिरूप-परिणाम द्वारा प्रकृतिसे तरह तरह के विरूपिका (स० स्त्रो०) विकृतं रूपं यस्याः कन टाप अंत पदार्थाका विकाश होता है और स्वरूप परिणाम द्वारा इत्वं । कुरूपा स्त्री, बदसूरत मौरत। फिर नाना पदार्धा क्रमशः अपने रूप नष्ट करते हुए प्रकृति- विरूपिन् (सं० नि०) विरुद्ध समस्यास्तीति विरूप इनि। में लीन होते हैं। एक परिणाम सृष्टिको भोर अवसर १ कुरूपविशिष्ट, पदवरत । (पु० ) २ जाहक जन्तु, गिर होता है और दूसरा लयको ओर। विरूपशक्ति (स० पु०) १ विद्याधरभेद। (कथासरित्सा० | विरेक ( स०पु०) पिरिच घम्। विरेचन, दस्तावर, ४६६८) २ प्रतिद्वन्द्वी शक्ति (Counteracting torces) 1 | दधा, जुलाव । जेसे, ताडितको Negative शक्ति और Positive | विरेचक (स' त्रि०) मलभेदक, दस्त लानेवाला। शक्ति। वे एक दूसरे के विरोधी हैं। यिरेचन ( सं० पली० ) वि.रिच न्युर। विरेक, जुलाव । विरूपशर्मन् ( स० पु. ) ब्राह्मणभेद । वैद्यकमें घिरचनके विषय पर अच्छी तरह विचार किया (कथासरित्सा० ४०।२६) गया है। यहां पर बहुत संक्षेप में लिखा जाता है। कुपित निरूपा (सं० स्त्री० ) विरूप-राप्। १ दुरालभा, जवासा, | "मल सभी रोगोंका निदान है। मल कुपित हो कर नाना धमासा। २ अतिविषा। ३ यमको एक पतोका नाम । प्रकारका रोग उत्पन्न करता है। अतएव जिससे मल (त्रि.) ४ कुरूप, यदसूरत। | न रुके, इस ओर ध्यान रम्नना एकान्त कर्तव्य है । मलके विरूपाक्ष (सं० पु०) विरूपे अक्षिणी यस्य सक्थ्यक्ष्नोः / रुकनेसे विरेचन औषधं द्वारा उसका निःसारण करना साङ्गात् पच् इति पच् समासान्तः। शिव । २ रुद्रः। चाहिए। भेद । (जटाधर) इनकी पुरी सुमेरुपर्वातफे नैऋतकोणमें | भावप्रकाशमें घिरेचन विधि सम्यन्धमें इस प्रकार अवस्थित है। लिखा है- "तथा चतुर्थे दिग भागे नेताधिपतेः श्रुता। स्नेहन और ख दफियाके वाद यमनविधि द्वारा पमन नाम्ना ऋष्यापती नाम विरूपाक्षस्य धीमतः ॥" फरा कर पीछे विरेचनका प्रयोग करना कर्तव्य है । यदि (वराहपु० कद्रगीता) | पहले घमनन करा कर घिरचनका प्रयोग किया जाये, ३ रावणका एक सेनानायक जिसे हनुमानने प्रमोदयन तो कफ मधापतित हो कर ग्रहणो नादीको माच्छादन उजडाने के समय मारा था। एक राक्षसका नाम जिसे ! कर शरीरको गुरुता वा प्रघाहिका रोग उत्पादन करता सुप्रीयने रामरावणयुद्धमें मारा था । ५ रायणको एक है, इसलिये सबसे पहले घमन कराना उचित है । अथवा मन्त्री । ६ या दिग्गज का नाम । एक नागका नाम । पाचक औषधका प्रयोग कर मामकफका परिपाक करके. (वि.) ८ विरूप, यदसूरत। . भी विरेचन दिया जा सकता है। विरूपाक्ष-१ एक योगाचार्य। इन्होंने ऊर्ध्याम्नायसे शरत् और वसन्तकालमें देवशोधन के लिये विरेननका महापोढान्यास नामक एक प्रन्थ लिखा है। इंठदीपिकामे | प्रयोग हितकर है। प्राणनाशको आशङ्का पर अन्य समय इनका नामोल्लेन है। २ विजयनगरके एक राजाका | भी विरेचनका प्रयोग किया जा सकता है । पित्तके कुपित नाम ।' ' . ' होनेसे मथा आमजनित रोगमें उदर और आध्मान रोग- विरूपाक्षदेव-दाक्षिणात्यके एक हिन्दु राजा।। में कोष्ठशुद्धिके लिये विरेचन प्रयोग विशेष हितकर है। विरूपाक्ष शर्म-तत्त्वदीपिका नाम्नी चण्डीश्लोकार्थप्रकाश 'लड्डुन तथा पाचन द्वारा दोषके प्रशमित होनेसे वह पुनः । नामक ग्रन्धके रचयिता । १५३१ ई० में प्रधिकारने प्रधः प्रकुपित हो सकता है, किन्तु शोधन द्वारा दोष सदाके रचना समाप्त की। आप कविकण्ठाभरण आचार्य नामसे | लिये दर हो जाता है। भी परिचित थे। . . . . . बालक, वृद्ध, अतिशय स्निग्ध, क्षत या क्षीणरोगग्रस्त,