पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६०

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वाणिज्य (Maadite ) जातिका कर्मक्षेत विशेष माले परिवर्तित समय पश्चिम-भारतका पण्यदृश्य जल तथा मधलं पधा हुमा या। क्योंकि उन्होंने वणिकसम्प्रदायको ऊँट भाड़े से नौका और ऊंटों द्वारा सिन्धुनदसे हो कर दिमा- देकर, उन्हें पथ दिखा कर, उनका रक्षकहे। कर अयया | लय तथा काबुलको पार्वत्य अघित्यकाभूमिमे भा- कर । उन लोगोंके साथ मिलकर वाणिज्यको पालोचना करके : फमसे समरकन्द पहुंचता था। यहां तक कि मलमा मोटी रकम पाई थी। कालफगस इस खुश्को पाणिज्यो । द्वीपजात दम्य मारतसमुद, यगोपसागर, इसके बाद बड़ा गड़बड़ी हो गई । राषिप्लप या प्रारतिक परि गंगा और यमुना नदोसे होते हुए पय: उत्त-भारतके पर्शनसे यद विपर्यय घटा था। इस पथमे जितने समृद्धि अगम्य पयको पार करके समरकन्दमें आता था। मार. । काली नगर या वाणिज्यफेन्द्र थे, देवसंयोगसे चे समी। फन्द उस समय महासमृदगालो तथा, वाणिज्यका. प्रोम्रप्ट तथा नगर जनहीन हो गये और उसको वाणिज्य | फेन्द्र था। यहां भारत, पारस और तुर्फ के प्रधान प्रधान समृद्धिका मो हास हो गया। आज भी हौरानफे मास- णिक पात्र हो कर अपने अपने देशीर पण्य हेरफेर.. पास पलई प्रान्तरमै मरुसागरफे तोरवत्ती मरदेश तथा फरत थे। सराइवेरियस मालक सनिकटस्थ ऊंचे स्तम्भों, मन्दादि यहांस ये सब चीजे:जहाज द्वारा फास्पोयसागरफ तथा रङ्गमञ्चो प्राचीन गौरवका निदर्शन जगा | दूसरे पारस्थित अष्ट्रासान् धन्दरको मेशी जाती-थी। ' रना है। | | अष्ट्रामान बन्दर वलगा मदीके मुहाने.पर.अयस्थित रहने । पेद्रासे दमस्कस जानेके रास्ते में उत्तर सीमान्तमे | के कारण पश्यद्रश्य अन्यत ले जाने में बड़ी सुविधा होती. पामिरा, फिलाडेल्फिया और देकालिशफे मगर मिलते घो। पदांसे सभी चीजें फिर नदोको गइसे. रेशान. । प्रोक और रोमन जातियों, सभ्युत्थान काल. प्रदेशान्तर्गत गोयोगरोद नगरमें लाई जाती थी। यह में पेट्राम वाणिज्यको यथेष्ट उन्नति थी। पथैनोडोरस् | नगर यत्तमान गिजगी नोयोगरोद नगरसे यहुन दक्षिण में लिनते है, किधारे धोरे यह नष्ट हो कर मरुभूमिमें अवस्थित था। पप्यसित हो गया। सैकड़ों वर्ष तक, इस रूपमे रहने, नोयोगरोदसे न म पोजोको कई मोल मुश्कीको पर भी उसकी कार्तियां विस्कुल ही लुप्त नहीं हुई। इस राहसे ले जाते थे। इसके बाद डान् नदी किनारे पहुँच समय भी स्थान स्थान पर उन सब ध्वस्त स्तूपोंके स्तम्भ कर उन द्रव्यों को छोटो छोरी नाकामों पर लाद , तथा प्रासादादि विद्यमान है, जो भ्रमणकारियोंकि हदयौ । कर जेनेया बाजोसागरक किनारे काफी तथा प्राचीन पाणिज्यगौरवको झोणस्मृति उद्योधन करते है।।प्यूटोसिया दादर ले जातं धै। काफा बदर उस यह पेदा गगर उत्तर-पश्चिम एशिया हा परोपीय समय जेनेयायासियो अधिकारमें था। यहां के लोग वाणिज्पका केन्द्रम्यान था। दक्षिणाचलसे समागत | 'गलीयस् नामक जहाज द्वारा मारो थे पय भारतीय कि सम्प्राय यहो. भा हर उसर देशीय चाणकोसे पण्यद्रव्य ले कर अपने देशको लौट जाते थे। पोछे ये अपना पपयष्य ददल फर लौट आता था। उन सब ग्रस्तुमीको यूरोप गामा स्थामि विक्री करने 'शकिशाला- रोमसाम्राज्यके मयसान होने पर लिये मज देते थे। ... पाणिश्यकाहास हो गया एवं उसके साथ साथ क्रमसे . मम्मेनियन सम्रार कामोष्टीटरपं. राजस्यकाल में एक लालसागरोपफूल और भरवका बाणिज्य-पय छोड़ दिया। मोर पाणिज्य पथका मायकारमा था। उस समय गा। इस तारीफे बाद जिस समय जेनोया. वणिगणशर्मिपा. मध्य दो कर मी काही सांगरकै पासिनि पुनः वाणिश्यमे उपलक्षमे जहाज द्वारा समुद किनारे पात तथा यहां से पम्पद्रण अलप रा काला में मामा ज्ञाना मारंभ किया, उस समय यह पाउन सागर तीरयत्तों विपिसन्द पदादेशाने । पोरे यहां लोगों ,गमनागमनको सुविधा लिपे गृहीत धुमा। यह मर यूरो माना यांना भेजे जाते थे। . पर भारत और यूरोपमे फिर मापार घलने लगा। उस' सो समय गारतोय पापियो लिग भनिशेम साग