पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६६

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


'वाणिज्य .. उन,लोगोंने वाणिज्य-प्रमायके साथ साथ उपनिवेश जीवन यापन करते हैं। इस समुद्रयानासे घे लोग स्थापन कर जितने छोटे छोटे राज्य अपने दखलमें किये | जातिच्युत वा समाजमए नहीं हुए। . थे, वे भी नष्ट हो गये। : -.. . . ___ इसके अतिरिक्त भारतवासियों के साथ उत्तर तथा . तदनन्तर मोटो रकम पानेको माशासे पण्यद्रष्यका मध्य एशियाखंडका वाणिज्यकार्य के परिचालनार्थ और वाणिज्य छोड़ कर जब पुर्तगीज लोग मानव विक्षय एवं भी कई एक पात्य पधोंका परिचय पाया जाता है। मनुष्य पकड़नेके लिये दिन रात परिश्रम और अध्यय-1 अफगानिस्तान, फारस, पश्चिम तुर्किस्तान प्रभृति , - : सायमें निमग्न रहने लगे, तभीसे पुर्तगाल राज्य पापपंकों देशों में पण्यद्रव्य ले जानेमें वणिकोंको प्रधानतः मुले- बुरी तरह फंस गया और उसी पापसे उन लोगोंका मानो पर्वतमालाके सफट समूह, पेशावरके पात्यपण, वाणिज्य भी विलुप्त हो गया। वास्तवमै पुर्तगोजोंके गएडापाके निकटवत्ती मूलासंकट तथा वोलन गिरि प्राचीन मानचित्रों में जो सब स्थान सौधमालापूर्ण नगरों. पथसे जाना होता है । सिन्धुसे कन्दहार ( गान्धार) से परिशोभित एवं अलंकृत दृष्टिगोचर होते हैं, पापी, राजधानी में प्रवेश करने के लिये वोलनके अगम्यपथसे पुर्तगीजोंफे घृणित आचरण तथा घृणित गुलाम बेचने के प्रायः ४०० मोल भूमिको पार करना होता है। खेरा. व्यवसाय ( Capture and Sale of Slave) से वे सब इस्मालखाको विपरीत दिशामें गुलेरीके संकरपथसे हो स्थान जनहीन मरुभूमिमें परिणत हो गये। परवत्ती कर अफगानिस्तान और पंजायका पाणिज्य चलना है। फालके मानचित्रमें फिर उन सब स्थानों के नाम सन्नि. पेशावरसे कावुलकी राजधानी प्रत्यागमन करनेके लिये वेशित नहीं हुए। वेसद स्थान इस समय "अात- भायखाना और तातारा नामक दो गिरिपयोंको पार आरण्य" प्रदेश कहलाते हैं। करना पड़ता है। सिन्धप्रदेशके शिफारपुर नगरसे . पण्यद्रव्य खरीद कर वणिकगण धोरे. धोरे बोलनका. 'एशियावासी पणिक-सम्प्रदायके मध्य भारतके उत्तर- गिरिपथ पार कर कन्दहार वा कलात् नगरमें पश्चिम उपकूलपासो विभिन्न श्रेणोके हिन्दू वाणिज्य भाते हैं। इस शेषोक्त स्थानके पणिको के साथ मध्य प्रभायमें बहुत पूर्वकालसे ही विशेष प्रभावान्वित हैं। पशियावासी वणिकका व्यापार. 'चलता है। गजनोसे उनके लिये कोई नहीं कह सकता, कि किस समयसे वे गोमाल पथको पार करके डेराइस्मालखा में आना होता लोग अफ्रिकाके उपकूलमें वाणिज्य करने आ रहे हैं। है। इस पथसे पोविन्दाजाति पैदल चल कर व्यापार उन स्यों में कोई किसी समय अफ्रिकामें स्त्रीपुल के साथ | किया करते है । ये दस्युप्रकृतिक और वणिक पृत्तिधारी नहीं भाये। ये लोग कुछ वर्षों तक कार्यस्थानमें रह हैं। सेयरकी घाटी पास हो कर कावुल जानेका एक ओर फर अपने देशको लौट जाते थे एघं फिर जब कभी | सुविस्तृत रास्ता है। प्रति वर्ष भारतमें जिस पण्यद्व्यकी आवश्यकता होतो थो, तव घे विदेशको यात्रा करते थ। सामनोरपतनी होती है उसका मल्यो कोटपोसे नहीं तो अपने देशमें ही दूकान फरके वाणिज्य कार्य | कम नहीं है। .. सम्पादन करते थे।। ... । पुर्तगोज लोगोंने जिस समय अफ्रिका एवं भारत | न .“The Bhatia and Banya who form a large और पूर्व मारतीय द्वीपोंके उपकुलमागमें अपना अधि.. number of these traders are Hindus and are कार जमा लिया था, उस समय उक घणिक सम्प्रदायके | very strict ones; yet it is remarkable that कितने ही लोग अफ्रिकासे भगा दिये गये । इस श्रेणीके they may, leave India and lire in Africa tor : लोगोंमें भाटिया और धनिया जातिके लोगोंको संख्या हो। years without incurring the penalty of loss of अधिक थी। ये लोग इस समय भी सुदूर अफ्रिका भूमिमें | caste which is enforced against Hindus learing . . अपनी जातोय निष्ठा तथा विशुद्धताको रक्षा करते हुए India in any other direction." (Cyclo. India') . .