पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६७८

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५८८ विवेकिता-विचनावे मतपय स्वामीजीने सिहलकी ओर प्रस्थान कर दिया। हो कर जय दनके वृक्षादिको दुग्ध करने लगता है, तर .... सिहलको राजधानीका नाम कोलम्बो है। स्वामी उन पृक्ष फोटरके कोट जिस प्रकार किंकर्तव्यविमूढ़ हो विधेकानन्दजी कोलम्यो जा कर उपस्थित हुए। उस अत्यन्त यन्त्रणाके साथ कभी वृक्षफे ऊपर और कमी ' . देशफे बड़े बड़े विद्वान् और धनियों ने स्वामीजोका नीचे जाते हैं, दूसरा कोई उपाय उन्हें.सूझ नहीं पड़ता, अभिवादन किया। सभी लोग स्वामीजीकी वक्तृता उसी प्रकार जीवात्मा पार चार संसारमे गा कर विपम : सुनने के लिये लालायित हो रहे थे। कोलम्बोमें वक्तृता दुःख भोगता है। आखिर संसारकी असीम यन्त्रणा न , देकर स्वामीजी कान्दो नामक स्थानमें गये। कान्दो | सद कर जब यह कीटकी तरह अवस्थापन हो जाता है : नियासियों ने स्वामीजीको एक अभिनन्दनपत्र दिया, | तब उसे विवेकी कहते हैं। स्वामोजोने भो उसका उचित उत्तर दिया। तदनन्तर ___ २ विचारकर्ता, न्यायाधीश, यह जो अभियोगों आदि वहाके दर्शनोप स्थानों का दर्शन कर स्वामीजी दाम्बूल का न्याय करता हो । ३ विचारवान, बुद्धिमान् । हानी। ' नामक स्थानमें पधारे। इसी प्रकार सिंहलके अनेक ५ न्यायशील । ६ भैरयवंशोत्पन्न देवसेन राजपुत्र। स्थानों में जा कर स्वामीजीने व्याख्यान दिया। यहांसे इनकी माताका नाम फेशिनी था। (कालिकापु० ६० म०) .. स्यामोजी मन्दाज सैतुबन्ध रामेश्वर होते हुए कलकत्ते ७ धैराग्यविशिष्ट, घेरागो। । आये। कलकत्ते में उनको अपनाके लिये बड़ा सभा विवेकी (सं० पु०) वियेकिन देखो। हुई । कलकत्ते में कुछ दिन रह फर चे ढाका, चट्टप्राम विवेकव्य (स० त्रि०) वि.पिच-तव्य । विवेचनाफे और कागला गये। योग्य। सन् १६०० ई०में स्वामीजी पेरिस धर्म सभासे विवक्त (स ) वि-विच-तच । विवेचक विचा- निमन्त्रित हो कर यहां गये। तीन महीने रह कर वहांसे | रका जापान होते हुए स्वामीजी कलकत्ते लौट आये। इसी विवश्य (स' तिला वि-विच -यत । विवेच्य, विवेचना .. समयसे इनका स्वास्थ्य विगहने लगा। इस समय माता इनको उमर सिर्फ ३६ वर्षका थी। इसी हाल्पावस्था विवेवक (स.लि.)यि-विच घुल १ विधेचनकारी, .. १३०६ सालको २०वीं आप ढ कृष्ण चातुदशी तिथि विधेको। २विचारक, न्यायाधीश । साढे नौ बजे रातका (सन् १९०२१०को ४थी जुलाई)| विवेचन (० लो०) शिविच ल्युट। १ विवेक, हान। . गडाके किनारे स्पीय प्रति-ठत पेलूह मठमै स्यामाजीने २ किसो वस्तुको भली भांति परोक्षा करना, जोबना। नश्वर शरीरका त्याग किया। ३ यह देखना कि कौन-सी वात ठीक है और कौन नहीं, . निकिता ( स० स्त्रा०) शिवकोका भाव या धर्म। निर्णय। ४ व्याख्या, तर्कवितर्क। ५ अनुसन्धान । २ यनकका कर्म। ६ परीक्षा। ७ सत् असत्का विचार । ८ मामांसा | यित्व (Eio ) विवेशिता, शान। । विवेचना (स. खो०) विवेचन देखो। पिन सं० पु०) विचाऽस्त्यस्येति विवेक-इनि । १ विधे युक्त, मले घुरेका शग रन्ननेवाला। न्यायमतम | ____ * इगसे मातम होता है, कि वैसी मास्थाको मागे विवेक वियेकोका लक्षण इस प्रकार है- तथा उस अवस्थापन्नको विवेको कहा गया। यथार्य में उस । .. "दयदहनदहामानदारूदरघमघूर्णापमाणघूणसंघातय. यवस्थाफे आने पर ही विवेक या तत्त्वज्ञान होता है सो नहीं, - दिह जगति जो भ्रमते जायी स पि कोात ।" . . । परन्तु जीवके उस अवस्थापन्न होनेसे उसी अवस्थाफे मध्य उमको इस जगतमें दवदहनकालोन दशमान काष्ठोदरस्य मुक्ति ग भात्यन्तिक दुःखनिवृत्तिकी क्षिपसा ही है । पीछे इसके । कोटकी तरह भ्राम्यमाण जीव ही ( मनुष्यका जोयात्मा छाय साप ही तत्त्यशान उपस्थित होता है। इस कारण वही "हा) विवेकी कहलाता है। अर्थात् दापानलं प्रज्वलित अवस्या विषेक कहलाती है। ....... 11.