पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६८२

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५६४ विशाखपत्र-विशाय नगर पर अधिकार कर लिया। इसके बाद विजय- | विशावा--प्राचीन जनपदभेद । - चीनपरिवाजक यूपन । नगरम्के राजाने मान्सीसियोंको मार भगाया और इस चुयंगने ."पि सो-किमा" नाममें इस जनपदका उल्लेख .. नगरको अङ्गरेजोंके हाप सौंप दिया। यह सन् १७५८ किया है । चीन-परिमाजकके वर्णनसे यह मालूम १०की घटना है।. सन् १७८० ई.में सिपाही-विद्रोहके | होता है, कि घे.कौशाम्पी दर्शन कर यहांसे' १७० . सिवा इतिहास प्रसिद्ध, और कोई घटना यहां नहीं या १८० ली ( प्रायः' २५।३० मील) उत्तर ' मा कर . । हुई। . . . . . विशाखा राज्यमें पहुचें। इस राज्यका परिमाण प्राय: .. पहले ही कहा जा चुका है, कि :विशाखपत्तन एक | '४००० ली और राजधानी प्रायः १६ ली थी। यहाँ प्रसिद्ध बन्दर है। सुतरां वाणिज्य व्यवसायमें यह स्थान | तरह तरह के भन्न और यथेष्ट फलमूल उत्पन्न होते हैं। उत्तरोत्तर उन्नत हो रहा है । . आमदनी द्रयों में विदेश । 'यहाके अधियासी शिष्टशान्त, सभी अध्ययनमें निरत , जात छोटो छोटो चीजें और इङ्गलैण्डको धातु है और | 'और मोक्षकामी हैं। 'चीन-परिवाजकके समय यहां रफ्तनोमें अन्न और गुड़का व्यवसाय हो उल्लेखनीय है। २० संघाराम'था और उसमें हीनयान सम्प्रदायके' प्राया यहां बहुत तरहके देशी कपड़े, कारकार्यमय द्रष्यसम्भार, ३००० श्रमण रहते थे। "सिवा इसके यहां' उन्होंने ५० चन्दनकाष्ठ और रूपेकी सामग्री तय्यार होती है। इसके । देवमन्दिर और उसमें बहुतेरे देव भक्त देखे थे। सिवा पफ्स, डेक्स, पाशाका कोट आदि चीजे तैयार राजधानीके उत्तर राजपथके घामपार्च में एक बड़ा .. होती है। . : । 'संघाराम था। यहां रह कर पहले मईत् देवशर्माने । विशाखपत्र (स० पु०) घालरोगभेव, पालकोंका ,एक "विहानशास्त्र' लिख कर मामयादका खण्डन किया। प्रकारका रोग। .। .. . यहां ही धर्मपाल बोधिसत्यने ७ दिनसे शताधिक 'दीन . यिशास्त्रयप ( स० पु० ) १ एक प्राचीन राजा ।:२ नृसिंह | यानी आचार्यों को परास्त किया था। इसी संघाराम- पुराणोक्त प्राचीन जनपदभेद । कोई कोई इसीको के निकट बुद्धदेवके निर्माल्य-परित्यक्त पुष्पनीजोत्पन्न विशाखपत्तन मानते हैं। विशाखपत्तन देखो।,.... एक वृक्ष विद्यमान था। बहुत दूर देशसे यौद्धयात्री , विशाखल (स० लो०) युद्धकालमे अधिक व्यवधानमें । इस घोधितरुको 'देखने माते थे। कितनी ही बार रखा हुआ दोनों पौरका विन्यास ।... ., : . ., . ब्राह्मणोंने इस पेड़को काट डाला। फिर भी, चानपरि- :- विशाखा (सस्त्री०) १ कठिल्लक, करेला। (.मेदिनी)। वाजकके आनेके समय तक वह वृक्ष मौजद था। इसके । २ अश्विनी आदि सत्ताईस नक्षत्रोंमें १६यां नक्षत्र ! निकट ही चीन परिव्राजक गत ४ बुद्धोंकी स्मृतियां देख इसका पर्याय--राधा। इस नक्षत्रका रूप तोरणाकार गये हैं। प्रत्नतत्वविद् कानिहमने साकेत या वर्तमान और उसमें चार तारे हैं। ( मुहूर्त्तचिन्तामणि ). यह / अयोध्याको ही चीन-परिमाजकका विशाखाराज्य स्थिर ' नक्षत्र दो भागों में वटा है, . इसलिये, इसके दो देवता किया ! इन्द्र और अग्नि हैं। यह नक्षत्र मित्रों के अन्तर्गत हैं। दिशात्रिका (स० सी०) विशाखा देखो। . . . . (न्योतिस्तत्त्व) इस नक्षत्र में जन्म लेनेसे जातयालक सर्वदा | विशाखिल (सं० पु०) पक कलाशास्त्रम रचयिता. . नाना कार्यों में अनुरक रहता है तथा फेवल स्वर्णकारक विशातन (स. त्रि०) वि-शत-णिच्-क्षु । मोचनकर्ता, साथ उसकी मित्रता होती है। और किसी के भी साथ छुड़ानेवाला ।. ..... नहीं ! (कोष्ठीप्रदीप ), .. ... ... . .. .विशाप ( स० लि० ) १ शापान्त, शापरहित । (पु०. ).२ . '. .. ३ श्वेतरक्त पुनर्नवा, सफेद गदहपूरना । ( यद्यनि०) एक प्राचीन ऋषिका नाम ।. . . . . . ।। . .. कृष्णा अपराजिता, काली अपराजिता कठिल्लक विशाम्पति (स.पु. ) विशां प्रजानां पतिः । राजा। पृक्ष, करेलेको लता। . . it... विशाय (स• पु० ) विशी-घन् । (युपंयोः शेवे पर्याये । पा.. '