पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/६९

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. . ...... चाणज्य ' ५६ भागलपुर जिलेमें उस समय चावल एक रुपयेको | पारा यह उन्नत व्यवसाय किस तरह धोरे भोरे ३७॥ सेर दिकता था.। . १२०० वोघे जमीनमें कपास विलुप्त हुआ था, यह निम्नलिग्नित राजनिग्रहके इति- वोई जाती थी। तसर युननेके । लिये ३२७५ और | हासको भालोचना करनेसे साफ तौर पर मालूम हो सूती कपड़ा ' घुनने के लिये ७२७६ फर्षे चलते थे। जायेगा। गोरखपुर में १७५६०० औरते' चरम्बा चला कर दिन मलघारसे केलिको नामको छोटकी पहले विलायतमें पिताती थीं। यहां ६११४ कधैं चलते थे। सालमें | बहुत रफ्तनी होती थी। सन १६७६ ई०में इगलैएडमें .२०० से ४०० तक नायें बनाई जाती थीं। सिवा इसके | कपड़ा तय्यार करनेका पहला कारखाना खोला गया। वहाँ नमक और चीनीके कितने ही कारखाने-थे। सन् १७०० ई०में इस शिल्पकी उन्नत्तिके लिये भारत- दिनाजपुरमें ३६००० वो पटुमा, २४००में कपास. चपीय फेलिको छोटको आमदनी यन्द कर दी गई। वहांकी - २४००० में ऊन, १५००० घोघेमें नोल, और १५०० वोघेमें | पारलीयामेण्टने एक कानून वना भारतीय छोर पर प्रति तम्बाकू घोई जाती थी। इस:जिलेमें १३ लाखसे अधिक | वर्गगज पर अन्दाज डेढ़ आना कर लगा दिया । इसके गाये और बैल थे। ऊँचे घरानेको विधयायें और | साथ ही सदाके लिये भी भामदनी पर कर बांधा गृहस्थोंको औरते सूता कात 'फर माल भरके खर्गको | गया था। दो वर्षके बाद विलायती जुलाहोंके कहने छोड़ कर ११५००१)का उपार्जन करतो थो १,५०० सी सुनने पर यहांको सरकारने फेलिकोका कर दूना बढ़ा घर रेशम ध्ययमायो वर्ष, १२००००) नफा करते थे। दियाँ । सन् १७२० ६०में पिलायतमें फेलिकों को भामदनी कपडा घुननेवाले मालमें .१६७४०००) रुपयेका माल | कतई बन्द कर दो गई और बाजार इसका धेचा जाना तैयार करते थे। मालदहको मुमलमामिनोंमें दस्तकारी यन्द कर दिया गया। यह कानून जारी किया गया, कि का विशेष प्रचलन था। सूत और कपोंमें नाना तरहको | जो भारतको फैलिको येचेगा, उस पर दो सौ रुपया रंगाई करके भी बहतेरे यक्ति जोयिका निर्वाह करते थे। . .जुर्माना होगा और जो इसका व्यवहार करेगा, उस पर पुणियां जिलेमें स्त्रियां प्रतिवर्ण ३०००००) रुपयेको कपाम . पचास रुपया जुर्माना होगा। खरीद कर जो सत काततो थी वह बाजार में १३०००००) “यरको विकता था। ३५००.कों में:५६०००) सरपेका "Francis Carmnc Brown had been th. In of “केपड़ा तैयार होता था । इसमे शिलो प्राया डेढ़ लाख English parents in India and like his father रुपया नफा उठाते थे। सिवा इसके १०००० क.में मोटा | had - considerable experience of the cotton कपड़ा युन कर घे ३२४०००) रुपया नफा करते थे। . industry.in India. He produced.an Indian.cha. • सतरजी, फीता, भादिके भी पयसायको अवस्था बहुत | |rka or spinning whecl before the Select Cont. “अच्छी थी। .. .. . . | mittee and explained that there was an opp- resire Moturfa tar which was levied on every - - ! charka, on erery house. and. upon every {"implement used hy artisans. The tax presentect घुदों के मुतसे सुना जाता है, कि इस देशमें विज्ञायती/ al: the introduction of argins in Indin"-India एसका प्रचलन करनेके हिपे कम्पनीने लागेको सूत कातनेशनो-in Victorian Age: P:135. - मौरतीके चखें तुड़वा दिये थे। स्यानविशेष में चर्खा पर : गुरुतर ..:. उस समय वितायती ताई कपड़े को पार चुनना नहीं ..करें लगा दिया गया था। ग्राममें कम्पनीका मादमी मा रहा है. जानते थे। ये इस विधाको भारतीय विशेषत: वलीप पुलाहोरे • यह सुन कर और साक्षापमें चर्खा हुषा रखती थी। यह प्रयाद • सोत गये थे। । . . यदि सत्य न हो तो न हो, किन्तु गुरुसर कर स्थापित करनेके तो • Useful arts and Manufactures of Great इतिहासमें। यहुतेरे प्रमाण मिनते है पया-. .. - Britain, p,-363.. .