पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७०२

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६१६ विश्वकर्गन् विश्वकर्गेश्वरलिङ्ग पाले स्वस्तिवाचनादि । और पोछे सङ्कना करना । देते हैं । वाइन खेलनेके लिये ये लोग भी सुसज्जित नाव- ।.. होता है। । ।'.... को ले कर धनी नेताके अधीन खेलमें जमा होने की चेष्टा इसके बाद सङ्कल्प मूकादिका पाठ कर सामान्यार्ज, करते हैं। यह खेल प्रधानतः नदीमें या विस्तार्ण खाल- मासनशुद्धि, भतशुद्धि और घटस्थापनादि करके सामान्य ' में होता है। · उत्सव-दिनके पहले ही खेल कहां होगा, पूजापद्धतिकमसे गणेशादि देवताको पूजा करनी होगी। इसकी सूचना दे दी जाती है। जो नाव सबसे पहले 'मनन्तर 'यां दयाय नमः, वो शिरसे स्वाहा' कह' कर निकलती है, उसको जयजयकार होती है। जिस समय : अङ्ग और करन्यास तथा निम्नक्ति रूपसे ध्यान करना "नायें बड़ी तेजोसे चलती हैं, उस समयका दृश्य बड़ा हो । होगा। मनोरम लगता है । इस खेलमें लोगों को बड़ी भीड़ लगा । ध्यानमन्त इस प्रकार है- जाती है। कमो कभी तो प्रतिद्वन्द्रिताकफलसे हिन्दू "भो दशान महावीर सुमित्र · कर्मकारफ । हिन्दूमें, मुसलमान मुसलमानमें तथा हिन्दू-मुसलमानों विश्वकृत् विश्वधृक च त्व' वासनामानदण्डक ॥" दङ्गा हो जाया करता है । जिसको जोत होतो है, धनो इस प्रकार ध्यान कर मानसोपचारसे पूजा और वाकि उसे इनाम देते है । इसके बाद घर जा कर . विशेषागे स्थापन कर फिरसे ध्यान पाट करने के बाद सभी भदुभा खाते हैं। ये सब नावे खेने के लिये एक माधान करे। . . . . . सौसे तीन सौभादमियों की जरूरत होती है। ..' ___ वह के अनेक स्थानों में भाद्रसंझान्तिको विश्वकर्माके | ' 'विजयाके दिन प्रतिमा विसर्जनके समय भी पूर्वः । पूजोपलक्षमें एक उत्सव होते देखा जाता है। यह | 'वों में इसी प्रकारका खेल होता है। उत्सव निम्नश्रेणीके लोगों में हो सीमाबद्ध है। 'अधिः ३.शिवके हजार नाममिसें एक नाम । (मिनपु० कांश स्थलों में नमाशूदगण ही इस उत्सवफे नेता हैं।६५।११८) ४ चेतना, धातु । चरक विमान स्थानमें : पूजाके दिन सभी लोग बहुत सयेरे स्नान करते हैं। लिखा है, कि जोयको चेतना धातुका नाम विश्वकर्मा नरनारीमें भारी चहल-पहल दिखाई देती है। जो धनी है। 'चरक मुनिने चेतनाधातुकें कत्ता, मन्ता, वेदिता, . . है' चे आत्मीय बन्धुवान्धयों को अपने यहां निमन्त्रण ब्रह्मा, विश्वकर्मादि नाम रखे हैं। (चरफ विमानस्था० .. करते हैं। पूजाके बाद सभी एक साथ बैठ कर खाते हैं। ४०) ५ सयापारहेतु। (ऋक १०।१७०1४) ६ पढ़ई। .. इस दिन ये लोग कम वर्ग में एक प्रकारका पिण्डाकार राज, 'मेमार ४ 'लोहा. इलाराक अन्तर्गत .: पिएक तैयार कर लेते हैं। इस पिटकका माम भदुआ | स्वनाम प्रसिद्ध गुहामन्दिर । लोरा देखो। . . है। चायलका चूर और मीठा दे कर महुमा तैयार किया 'विश्यकर्मन्- वास्तुप्रकाश, चास्तुविधि, पास्तुशास्त्र, . जाता है जिसे यह चायसे 'खाते हैं। इसके बाद वास्तुसमुच्चय, 'अपराजितायातुशास्त्र. 'गायतत्व, विश्व वाईच खेल शुरू होता है। ग्रामके 'धनी व्यक्ति इस "कर्मीय आदि प्रयोंके प्रणेता।' : . . . खेलका खर्च देते हैं। उन्होंके उत्साह और 'नेतृत्यमें | - २ मीमांसाकारके रचयिता'। '३ सहाद्रि घर्णित : दसरे दूसरे लोग मानन्दमें विभार रहते हैं। छोटो"राजभेद । यह राजवंश पंझायतोके भक्त और सौनल... लम्बो ना सजाई जाती हैं। नायका अगला और "मुनिकुलोद्भय थे । (सह्या० ३३०) '. पिछला भांग गाढ़े सिन्दुरसे लिपा तथा पुष्पमालासे | विश्वकर्मपुराण उपेपराणभेद । । । । समाया रहता है। जो धनी व्यक्ति हैं ये नया कपड़ा विश्वकर्मम् शास्त्रो-सक्रियाहयाति नाम्नी प्रकिया. . : पहन कर नायके बीच में बड़े रहते 'मोर चालकोंको कौमुदीटोंका प्रणेता। जल्दीसे चलानेके लिपे उत्साह देते हैं। | विश्वकर्मा विश्वकर्मन 'देखो।.. ... .. .. ___ इस उत्सव के पल' निम्नश्रेणीक हिन्दू ही नहीं, विश्वकर्मेश (सलो . ) शिवलिङ्गभेद।। मुसलमान मी भदुआ सा कर पड़े से इसमें 'साथ विश्वकर्मेश्वरलिङ्ग (सी ) लिङ्गमेद। कहते हैं, ..