पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७०४

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दो विश्वकर्गन-विश्वकर्मेश्वरलिङ्ग पहले स्वस्तिवाचनादि और पीछे सङ्कल्प करना । देते हैं। चाइच खेलने के लिये ये लोग भी सुसजितनाव होता है .... ....... | को ले कर धनी नेता अधीन खेलमें जमा होने की चेया . इसके याद सङ्कल्प सूकादिका पाठ कर सामान्यार्ण, | करते हैं । यह खेल प्रधानतः नदीमें या विस्तार्ण खाल- आसनशुद्धि, भृतशुद्धि और घटस्थापनादि करके सामान्य ) में होता है। उत्सव दिन पहले हो खेल कहां होगा, ' पूजापद्धतिकमसे गणेशादि देवताको पूजा करनी होगी। इसकी सूचना दे दी जाती है। जो नाव 'सबसे पहले। भनन्तर 'यां दृदयाय नमः, चीं शिरसे स्वाहा' कह कर निकलती है, उसकी जयजयकार होती है। जिस समय '. अङ्ग और करन्यास तथा निम्नोक्त रूपसे ध्यान करनानायें बड़ी तेजोसे चलती हैं, उस समयका दृश्य पढ़ा हो होगा। मनोरम लगता है । इस खेल में लोगोंको पड़ी भीड़ लगा। ध्यानमन्त्र इस प्रकार है- .: जाती है। कभी कभी तो प्रतिवन्दिताके फलसे हिन्दू . , "ओं दशपाल महावीर सुमित्र ' कर्मकारक । हिन्दूमें, मुसलमान मुसलमानमें तथा हिन्दू-मुसलमानमें विश्वकृत् विश्वधूक च त्व' वासेनामानदपक ॥" दङ्गा हो नाया करता है । जिसको जोत होती है, धनो : .' इस प्रकार ध्यान कर मानसोपचारसे पूजा और वाकि उसे इनाम देते है। इसके बाद घर जा कर । विशेषाळ स्थापन कर फिरसे ध्यान पाट करने के बाद सभी भदुआ खाते हैं। ये सब नावे खेनेके लिये एक आवाहन करे। . .... " सौसे तीन सौ बादमियोंकी जरूरत होती है। . .. वङ्गके अनेक स्थानों में भाद्रसंक्रान्तिको विश्वकर्माके | 'विजयाके दिन प्रतिमा विसर्जनके समय भी पूर्व पूजोपलक्षमे एक उत्सव होते देखा जाता है। यह बड़में इसी प्रकारका खेल होता है। .. उत्सव निम्नश्रेणी के लोगों में हो सीमाबद्ध है। अधिः शिवक हजार नामों से एक नाम । (निपु० .. कांश स्थलों में नमःशूदगण ही इस उत्सबके नेता हैं। . ६५।११८) ४'चेतना, धातु ।' चरको विमान स्थानमै : पूजाके दिन सभी लोग बहुत सपेरे स्नान करते हैं। लिखा है, कि जोधकी चेतना धातुका नाम विश्वकर्मा '. नरनारीमें भारी चहल-पहल दिखाई देती है। जो धनी है। चरक 'मुनिने चेतनाधातुके कर्ता, मन्ता, वेदिता,' ... हैं घे आत्मीय बन्धुवान्धयोंको अपने यहां निमन्त्रण ब्रह्मा, विश्वकर्मादि नाम रखे हैं। (चरफ विमानस्या० करते हैं । पूजाफे बाद सभी एक साथ बैठ कर खाते हैं । ४०) ५ सर्वापारहेतु । (ऋक १०।१७०।४) ६ बढ़ई। इस दिन ये लोग कम खर्ग में एक प्रकारका पिण्डाकार |" राज, मेमार। ४ लोहार । " इलाराक अन्तर्गत । पिटक तैयार कर लेते हैं। इस पिष्टकका माम भदुमा खनाम प्रसिद्ध गुहामन्दिर । इलोरा देखो। , है। चायलका चूर और मोठा दे कर महुआ तैयार किया विश्वकर्मन्-१ वास्तुप्रकाश, वास्तुविधि, घास्तुशास्त्र, , . जाता है जिसे यह चावसे 'खाते हैं। इसके बाद | "वास्तुसमुच्चय, अपराजितावास्तुशास्त्र, भायतत्य, विश्व वाईच खेल शुरू होता है। ग्रामके धनी व्यक्ति इस कर्मीय'आदि प्रयों के प्रणेता। खेलका खर्चा देते हैं। उन्होंके उत्साह गौर 'नेतृत्वमें - २ मीमांसाकारके रचयिता ३ 'सह्याद्रि पर्णित ' दूसरे दूसरे लोग"गानन्दमें विमार रहते हैं। छोटो राजभेद । 'यह राजवंश पद्मावतीके भक्त और सौनल... ' लम्बी नावे सजाई जाती हैं। नायका अगला और मुनिकुलोद्भव थे। (सदो० ३११३०) पिछला भीग गाढ़े सिन्दूरसे लिपा तथा पुष्पमालासे | विश्वकर्मपुराण-उपपुराणभेद ।' .. सजाया रहता है। जो धनी व्यक्ति है ये नया कंपदा विश्वकर्मम्' शास्त्री-सत्प्रक्रियांध्यांकृति 'नाग्नी प्रक्रिया "पहन कर नायके वीत्रमें खड़े रहते और चालकोंको : कौमुदीटोकाके प्रणेता

जल्दीसे चलाने के लिये उत्साह देते हैं। विश्वकर्मा-विश्वकर्मन देखी। , .'.' सं उत्सयम केवल निम्नश्रेणीक हिन्दू ही नहीं, विश्वकर्मश (स' लो०) शिवलिङ्गभेदी । मुसलमान मी भदुओ मा कर बड़े हर्णसे इसमें साथ विश्वकर्मेश्वरलि (स' 'क्ली) लिङ्गभेद। कहते हैं,