पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७४८

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विष ८-जान्तय विपोंमें फेन्थेरिज विशेष कष्टदायक है। इस अवस्थामें शीघ्र हो मृत्यु होती है। हासोसिपानिक इससे वमन होता है, पेशाव करने में जलन होती और / एसिडकी यू मृत व्यक्तिके मुह तथा देहसे निकलती है। सोश अनुभव होता है। कभी कभी तो पेशाव होता प्रतिकारकी व्यवस्था-उप्र एमोनिया सू'घना और हो नही। फेन्थरिज उदरस्थ होनेसे स्वतः ही वमन पायक्रमसे शीतल तथा कुछ गर्म जल पानेको देना, होता है। स्निग्ध पानीयपान इस अवस्थामै उपादेय | .अङ्ग प्रत्यङ्गों पर हाथ फेर रक्तका सञ्चालन करना तथा । है । अफीम इसके प्रतिकारके लिये एक महौषध है। कृत्रिम श्वास-प्रश्वासके परिचालन करना ही इसका प्रतिः . अधोदेशमे अफीमका सार ( मीिया ).पिचकारीको कार है। चर्मके नीचे पोपीनको पिचकारोसे मो सहायतासे प्रविष्ट करा कर मूत्रनालीका उपद्रव शान्त हपिण्डको क्रियाको उत्तेजित किया जा सकता है हो जाता है। तथा उससे उपकार भी होता है। स्नायुविकारी विण। २.-अफोम-अफीम इस देशमै आत्महत्याका इस श्रेणीके विष स्नायु विकार हैं। जिन सव | एक साधन है। मोपोंमें भी अफोम मिलाई विषको इसी श्रेणी में भुक्त किया गया है, उन सब | जाती है। उसमे मफिया ही प्रधान है। मर्फिया विषोंको किया आपसमें इतनो पाश्यि हैं, कि उनके अफोमका सार है। फोमस हो एपोमरफाइन, बहुल उपविभागमें विभक्त कर भिन्न भिन्न नामसे अमिहित कोटिन, ' पपोकादिन, नारसिन, नारकोटिन आदि किये जा सकते हैं । यहां इन सब विषोंका श्रेणीविभाग विविध प्रकार विषजनक सार प्राप्त होता है। ग कर उनमें कई प्रधान द्रव्योंका नामोल्लेख और विष. इससे हो एम्प्लाप्दाम अपियाई, पकनफ्ट, अपियाई, लक्षण आदि विकृत किये जाते हैं। . . एकापट अपियाई लिकुइटाम, अपियाई गादि प्रस्तुत १।-प्रासिक या हाइडोसियानिक एसिड-हाइडो. होते हैं। सिवा इनके .डोवर्स पाउडर आदि और सियानिक एसिड बहुत भयङ्कर विष है । विजली जैसे शोध भां बहुविध औषधके, साथ मिश्रित अफोमजान हो प्राण ले लेती है, यह विष भी ठीक वैसा हो है। औषध चिकित्सा व्यवहत होती हैं। . औषधको दूकानों पर जो हाइलोसियानिक खरोदनेसे , मीियासे भी कई तरहको औषध तय्यार होती है। मिलता है, वह घिमिश्रित अवस्था में रहता है और उसमें उनमें विलियम मकिपा, मर्फिनो एसिटात, लाइकर माधारणतः सैकड़े २ भाग शुद्ध हाइडोसियानिक पसिर मर्फिया एसिटेटिस, मर्फिनो हाइड्रोकोमाइडम् , मफिया है। इसी परिमाणसे हाइडोसियानिक एसिड ही औषध हाइसोक्लोराइड, लाइकार मर्फिया हासोक्लोराइस, लिंटास के लिये प्यपाहत होता है। इसकी मात्रा पांच मिनिमसे | मफिनी, ट्रेविसाई मफिनो, मफिनो मिकोनस, लाइकर अधिक नहीं। एक छामसे कम मात्रा सेवनसे भी | मर्फिनो, थाइमेकोनेटिस.. मफिनी सालफांस, मृत्यु हो सकती है । एफ सेकेण्ड समयमें | 'लाइकर मर्फिनी सालफेरिस, मफिया टारदास, लाइ- समन देहमें इसकी विपक्रियाः प्रकाशित होती है। कर मफिया टारद्रास आदिके नाम उल्लेख्नयोग्य हैं : सिधा । मुहर्शमात भ्यासकट अनुभूत होने के बाद हो हृतपिण्डको | इनके इस समय मफियासे डाइमोनिन, हिरोइन और क्रियाका हास हो जाता है। नेत्रोंको मणि प्रसारित देहके | पेराइन मादि और भी कई औषध तय्यार हो कर व्यवहृत संग प्रत्यंग भयानक रूपसे आक्षिप्त और श्वासकी गति हो रही हैं। अनियमितरूपसे प्रवाहित होती है, वदनमण्डल नीलाम अफीम पूर्ण ययस्फके लिये भी दो प्रनसे 'अधिक रङ्ग धारण करता है। मांसपेशियोंके असाड़ होनेसे | मात्रामें व्यवहार करनेकी विधि नहीं। मर्फियाकी विष पीड़ित व्यक्ति और मुहर्त भर भी अपने घशर्म नहीं माना भी साधारणतः एकतृतीयांश प्रेन है। हिरोइन रह सकता। इसके बाद प्रयल श्वासकट, नाड़ो/ आदि और भो कम मात्रामें व्ययहत होते हैं। ... लोप और देहकी सप तहको क्रियायें रुक जाती है। , अभ्यासके फलसे अफीम और मफिया कुछ लोग