पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७५२

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विष R6. 17. .

६६० मर्पियाका प्रक्षेप (Hypodermic injection ) द्वारा । हैं। इसमें विशेष उपकार होता है। तेल जा यवीय विष। १। क्लोरिन और ब्रोमिन-यह दोनों वायवीय विप / उसका समय भयानक उप्रताजनक है। निःभ्यासके साथ ये दोनों | निकट कण्ठके नीचे पहुंचने पर फण्ठनालीमें भयानक माक्षेप कि उपस्थित होता है। श्वासयन्त्रको श्लेमिक झिल्लीमें | तो उर प्रदाह उत्पन्न होता है। इससे शीघ्र ही मृत्यु होती है। साथ प्रतिकार-मोनियाका पाप सूचना बड़ा उपका | करता रक है। ___२। हाइडोक्लोरिक पसिद्ध-गैस-हाइसोफ्लोरिक कर और हाइड्रोक्लोरिक एसिष्ट इन दोनों पदार्थों के गैस हो उप्रताजनक और सांघातिक हैं। शिल्पादिके कारखानों - में कभी कभी इस विपसे विषाक्त हो फर कितने ही लोग | दे भर जाते है। इसकी प्रतिक्रिया भी पूर्ववत् है। । ३। सलफरस पसिन गैस-गन्धक जलानेसे यह गैस उत्पन्न होता है। यह उप्रताजनक और ध्यासरोधक | है। इससे भी कण्ठनालो माक्षिप्त होती है। एमो- नियाका वाष्प सूचनेसे इसका प्रतिकार होता है। ४। नाइट्रास मेपार (Vapour)-गेलभेनिक वेटरी- से यह गैस उत्पन्न होता है। यह घाप्प फुस्फुसमें प्रविष्ट होने पर उसमें प्रदाह उत्पन्न होता है और शीघ्र ही मृत्यु हो जाती है ! ५। कानिक पसिद्ध गैस-यह यायुकी अपेक्षा बहुत भारी है गौर वायुफे साथ फुस्फुसमें प्रविष्ट होने से पर प्राणघातक होता है। लकड़ो आदिके जलाते : साय भी यह विष पदार्था उत्पन्न होता है। यह भीषण विषयायु शरीरमें स्पर्श होते ही मनुष्य मृत्युमुन्नमें पतित होता है। पुराने कूप या बन्द मोरियों में यह . मञ्चित रहता है। ऐसे स्थलमें घुसा हुआ . तुरन्त मर जाता है। घग्ने किरासन तेल .. दरवाजा बन्द कर देनेसे जो आदमी उस घरमें .. 'उनकी देह में उसका धूनी घुस जाता है, .. की शीघ्र ही मृत्य होती है। बहुधा देखने में कि बहुतेरे व्यक्ति किरासन तेल जला कर ७ दरवाजा बन्द कर लेते हैं और इस विपके

होता

पाश्चात्य . locha ,