पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७९८

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विष्णुचक्र-विष्णुधर्म विष्णुचक (सं० फ्लो०) विष्णोश्चक्रमिव । १ हस्तस्था मिटीका मूल, प्रत्पेक आठ तोला ले कर मिलाये। पीछे रेखामय चक्रविशेष । यह चक्र जिसके हागमें रहता है, लोहे या मिट्टोके बरतनमें ६४ सेर पानीके साथ 'पाक . यह व्यक्ति राजनकवत्ती अर्थात् सर्वभूमीवर होता है | करे। पाक शेष होने पर अर्थात् सिर्पा तेलके रह जाने तथा उसका प्रभाव भच्याहत और स्वर्ग पर्यान्त विस्तृत पर उसे उतार कर छान ले। चातव्याधि अथवा जिस . हो जाता है। ( विष्णु फिसो वायुको विकृति अवस्थामें इसका व्यवहार करने २ सुदर्शनचक्र। से बहुत उपकार होता है। विष्णुचन्द्र-१ भूपसमुन्धयतन्त्र और सर्वसारतन्त्र नामक | विष्णुत्व (सं० क्लो०) विष्णुका भाव या धर्म । दो तन्त्रकि रचयिता। इन दोनों तन्त्रों में पुराण और | विष्णुलात--आचार्यभेद । आप पागणास्त्र में सुपण्डित तन्त्रसमूहसे शाक्त और शैव सम्प्रदायको उपास्य विभिन्न | थे।.. देव-देवियोंकी पद्धति और मन्त्रादि लिपिबद्ध हैं। अन्य विष्णुदत्त (i० त्रि०) विष्णुना ६ । विष्णुप्रदत्त, विष्णु- को श्लोकसंख्या ५३ हजार है। का दिया हुमा । ( भागवत ५।२७४) .. २ वसिष्ठसिद्धान्तके प्रणेता । ब्रह्मगुप्त और भट्टोत्पलने विष्णुदत्त अग्निहोत्री-श्राद्धाधिकारके रचयिता। . इनका वचन उद्धत किया है। विष्णुदास १.पक सामन्त महाराज । पे परमभट्टारक विष्णुचित्त-कल्पसूत्रव्याख्या. प्रमेयसंग्रह, विष्णुपुराण- महाराजाधिराज २य चन्द्रगुप्त के अधीन थे । २ एक रीका और संन्यासविधि नामक अन्धों के प्रणेता । वैष्णव साधु । ( भविष्यभक्ति०) विष्णुवित्तकी कल्पसूत्रव्याख्या तथा गमाएडार वा विष्णुदास (श्रीपति)-एक राजा (१६२०:०)। ये ताजि. रामाग्निचित् कृत आपस्तम्मश्रौतसूत्रभाष्यको पर्याः । कसारके प्रणेता सामन्तके प्रतिपालक थे। । ... लोचना करनेसे मालूम होता है, कि दोनों ही परस्पर विष्णुदेव-१ मन्त्रदेवताप्रकाशिका प्रणेता। ये लक्ष्मोश संश्लिए हैं। किन्तु दोनों एक व्यक्ति हैं या नहीं कह के पुल और परमाराध्यके पौत्र थे। २ एक वेदपारग नहीं सकते। ब्राह्मण । गुप्तराज हम्तिन्ने इन्हें भूमि दी हो। विष्णुज (सं० वि० ) विष्णुजात, विष्णुसे उत्पन्न । विष्णुदैवज्ञ-एक ज्योतिर्गिद् । इन्होंने वृश्चिन्तामणि (वराहस० ४६।११) टोका, विष्णुकरणोदाहरण और सूर्यापक्षशरण नामक विष्णुतत्त्व (सं० ली० ) विष्णोस्तत्त्वम् । विष्णुका तीन प्रन्थ लिखे । माहात्म्य, वह अन्य जिसमें विष्णुको मौलिकता आलो. 'विष्णुदैवत (सां० त्रि०) विष्णुः दैवतं वा यस्य । १ विष्णु- चित हुई है। ' 'देवताका द्रव्यादि, जिस व्यके अधिष्ठात्री देवता विष्णु विष्णुतपंण (सं० क्ली०) विष्णुके उद्देशमै तर्पण हैं। (को०)२ श्रवणानक्षत्रके अधिष्ठात्री देवता विष्णु। विष्णुनिथि (सं० पु० रवी० ) हरिवासर, शुक्ला एकादशी । (ज्योतिस्तत्त्व) और द्वादशी तिथिभेद। विष्णुदैवत्य-विष्णु देयत देखो। ... विष्णुतीर्थ (सं० लो० ) १ संन्यासविधिक प्रणेता। विष्णुदैवत्या (सं० स्त्री विष्णुदैवत्यमस्याः। एका. स्मृत्यर्थासागरमें इनके रचित कुछ प्रोंका वचन उद्धत दशो और द्वादशो तिथि । इन दोनों तिथियोंके अधिष्ठात्री है। २ स्कन्दपुराणोक्त तो भेद । देवता विष्णु है। विष्णुतैल (सं० लi०) वातध्याधिरोगोक्त तैलोपविशेष। विष्णुद्विप ( सं० पु. ) विष्णु द्वष्टि इति विष्णु द्विप् प्रस्तुत-प्रणाली-तिलतल ४ सेर तथा गाय और भैस । किए। १ असुर, दैत्य, दानय · इत्यादि । २ एक का ध १६ सर ले कर उसमे शिला पर पिसा हुया । जैन । गालपान, पिठयग, विजवंद, गोपवली. रेडीको मूल, विष्णुद्वीप ( म०पु०) पुराणानुसार पक द्वापका नाम ! गृहसी, कण्टिकारी, नाटाकरञ्जका मूल, शतमूली, नील- विष्णुधर्म (सं० पु०) विष्णुप्रधानो धर्मोऽस्मिन् । १ भक्ति