पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८३२

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३२८ विधार अका एक प्रधान तो है। इसकी उच्चता ४५०० , जातिफ लोगों का पास भी यहां दिखाई देता है । मुमल: फीट है। युद्ध गपामे दो पहाइ है-रामशिला और मानों में सिपा, सुन्नी और मोहाटी आदि रहते हैं। प्रेतशिला। यह गंयासे तीन कोस पर अपस्थित है। . ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, ग्राम, यहंदी और पारसी यहाँ हिन्दूगण पितरेको पिण्डदान देने के लिये भाते हैं। आदि जातियां भी वास करती हैं। 'विहार में हिन्दुओं. इन दोनो पहाड़ी पर चढ़ने के लिये सीढ़ियां काटी गई को हो संख्या अधिक है। यहां के अधिवासियों में हिन्द हैं। इन दोनों के शियरों पर कप मन्दिर है। राम-' मैकड़े पीछे ८४ और मुसलमान १६ हैं । । शिला पर भगवान विष्णुका मन्दिर है। इस पर चढ़ : ' इतिहासप्राचीन कालमें मगध के राजाओंके अधि' कर देखनेसे रेलफे पुटये मनुष्यों द्वारा ढोनेवाली मवारी । कृन विशाल भूखण्ड विहार लाता वा गार वे से भी छाटे दिखाई देते हैं । इस पहाड़से एक झरना एक राजे समग्र भारतवर्ष अधिपति थे। किसी समयमें सालाव, गिरता है । यावी इसो तालाघौ स्नान करते ' बिहार भारतको समृद्धिशालो' राजधानीके रूपमें हैं। भागलपुर मदार नामक एक बहुत बड़ा पहाड़ विद्यमान था। ईसासे सात सौ वर्ष पहलेसे भी विहार. है । मन्दार देखो। इसके शिखर पर एक मन्दिर विखरा ; की समृद्धिका विषय इतिहासमे दिखाई देता है। सम्भ- पड़ा है। मूर्शिकी जगह चरणपादुका रखी हुई है । इम, यतः इससे भी बहुत पहलेसे बिहार समृद्धशाली जनपद पहाड़ पर छोटे बड़े और घने वृक्ष हैं। इसमें वन्दर और कहा जाता था। ईसाके पांच सौ वर्ष बाद भी विहार- आयाम्य भेड़िया आदि हिंस्र जन्तु भी देखे जाते हैं। को सोभाग्यश्री चैसो ही पर्शमान थी। मगध सम्राटोंने इसकी गुफामे कितने हो साधु तपस्यानिरन दष्टिगोचर शिल्प और शिल्पियोंको श्रीवृद्धि की थी। उनके समयमें हैं। जो नदनदियां विहार प्रदेशको वीरती हुई प्रथा विहारमै भी नाना प्रकारके शिल्पोंको उन्नति हुई थी। यहाँ हित हो रही हैं, उनमें प्रधान गङ्गा ही है। गङ्गानदोने शिक्षाके लिये विश्वविद्यालय भी प्रतिष्ठित हुआ था। इस प्रदेशको दो भागों विभक्त किया है । इसके उत्तर- उक्त राजाओने भारतवर्ष में सर्वल बड़े बड़े राजपथ भागमे मारन, चम्पारन, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया तैयार कराये थे। उन्होंके समय भारतीय याणिज्य मादि जिले तथा दक्षिणभागमें शाहाबाद, पटना, गया | जहाज सागरको तरङ्गमालाओंको भेद कर जाया और भोर सन्थाल परगना आदि जिले वर्तमान हैं। इसके गली द्वीप आदि स्थानों में माते जाते तथा भारतवर्ष के सिवा घाघरा, गण्डकी, कोशी, महानदी, शोनं मादि नद | शिल्पयाणिज्यका विस्तार करते थे। उनके समय में हो नदियां इस प्रदेशसे होती हुई प्रवाहित हो रही हैं। इस हिन्दुओंने उन उन स्थानों में अपने उपनिवेश कायम किपे प्रदेशके विशिष्ट उत्पन्न देण्यादिमें अफीम और नील | थे। सेलकस निकेतरके समय विहारको समृद्धिकी सवा. मधिक होती थी; किन्तु अब इधर कुछ वर्षों से इनकी 'पेक्षा अधिक पृद्धि हुई थो। अशोक सिकन्दरके आक्रमणके खेती कम हो गई है। यहां चावल, गेहू आदि सभी वाद हो विहारके सम्राट पद पर अधिष्ठित हुए थे। सेलु, तरह अंन्न और गन्ना पैदा होता है। खनिज पदार्थो' कसने मेगास्थनिज नामक एक युनानी दूतको पाटलिपुत्र के मौतर कोयला, अवरक और तांथा हो प्रधान है। । (पटना) नगरमें अपने पद पर प्रतिष्ठित कर भेजा था। अधिवासी-यहां हिन्दुगों में ब्राह्मण, राजपूत, वामन ईसाके छ: सौ वर्ष पहले भी विचार बौद्धधर्मावलम्वियों - ( निम्न श्रेणीफे ब्राह्मण), कायस्थ, यनिया, मोदक, का निकेतन कह कर भारतवर्ष में प्रसिद्ध था । इसो . कुम्हार, तांती (ततया), तेली, सुनार, लोहार, नाई, बिहारसे लड़ा, चीन, तातार, तिम्वतमें बौद्धधर्म प्रचारक ' कांदू, बगदीर, धानुक, फमकर, कुमी, कुपाड़ी, सुनड़ो, भेजे जाते थे। आज भी बिहार पोद्धों की बिहारमूमिके मलाह, किरात, पासी, चमार, दुसाध आदि जातियों का नामसे विख्यात है। विहारमें प्राचीन बौद्धमूर्ति, बौद्ध मायाम है। इसके सिवा भूमिहार या भरदार, कोच, मन्दिर आदि यहुतेरो बाँसकीर्तियां भाज भी विराजमान . स्वमार, गौड़, सन्धाल, कोल मादि आदिम असम्य । देखी जाती हैं । गया और युद्धगया विशेष विवरण