पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/८४६

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


७४. चीजगणित थाकारमें प्रचारित किया, उन्हीं की प्रशंसाध्वनि दशोंपात विषयमें हो पे अधिकतर मनोयोगी हुए । पोग दिशाओं में मुखरित हो रही है। चौथे पर्यायके समी. | मोर पिपागके लिये जिन सय वर्णों और वर्गमूलके करण करनेवाले टारटालियाफे भाग्यमें किसी तरहको। लिये जिन सवयों और वर्गमूलके लिये जिन सब प्रशसा वदोन थी। इस समय ये सब नियम कार्सनके सांकेतिक प्रणालियोंकी भावश्यकता थी, घीफेलियस - नामसे परिचित हो "कार्डनके नियम" कहे जाते हैं। उनके मादि सृष्टिकर्ता हैं। कालकमसे चौथे पर्यायके समीकरण माविष्कृत हो केम्ब्रिज विश्वविद्यालयके गणितके अध्यापक और जानेसे वीजगणितकी उन्नति बढ़ने लगी। .इसो समय पदार्थविज्ञानविद् राबर्ट रेकर्डनने गरेजी भाषामें सव. इटलीयासी एक वीजगणितयिदुने विद्वत्समाजमें ऐसा से पहले वीजगणित लिपिवद्ध किया । उस समय एक प्रश्न उठाया जिससे समाधान कालमें विवीय चिकित्सकोंके लिये गणित, फलित ज्योतिष, रसायनादि समीकरणके पर्यायमें परिणत होना पड़ता है। इसी विद्या जानना आवश्यक होता था। मूने सबसे पहले लिये यह प्रचलित नियमानुसार निष्पन्न करना:सम्भव. इस प्रथाको चलाया। वे निकित्सा और गणितशास्त्र- पर नहीं। इन प्रश्नों को देख्न कितने दी लोगोंने सोचा, में पारदी थे। स्पेनदेशर्म बहुत दिनोंसे चीजगणितका कि इसका समाधान दिलकुल हो असम्भव है। किन्तु | प्रचलन था और वे चिकित्सक और वोजाणतयिद्वको फाईन इस विषयमें किसी तरह निराश नहीं हुए। एक ही पर्यायके अन्तर्गत समझते थे। . उन्होंने लिउस फेरारी नामक एक चीजगणित अल्पवयस्क ____ सिवा इसके रेकर्ड पक पाटोगणित और एक योज छात पर इस प्रश्न के समीकरणका मार दिया। कम गणित लिन गपे है। गणित इङ्गलैएडफे राजा. छठे उम्र होने पर भी फेरारी अत्यन्त बुद्धिमान् था। विशेषतः | पसपर्ड के नामसे उत्सर्ग किया गया था। योजगणित वीजगणित शास्रम उसको प्रगाढ़ व्युत्पत्ति थी। फेर. 'हायट टोन भाव विट' नामसे परिनित है। इसी प्रन्याने रोने अपनी चेष्टासे एक अफ सहज ही निष्पक्ष कर ही उन्होंने सयसे पहले समतायोधक चिोंका व्यवहार लिया और उसके सम्पादन कालमें. उसने तृतीय पर्यायके किया था। समीकरण समाधानके लिये एक अभिनय नियमका! . लिओनार्डो द्वारा भित्ति स्थापित होने के बाद विभिन्न आविष्कार किया। गणितक्षोंके हाथ पढ़ कर वीजगणित धीरतासे पैर धरते इस समय इटलादेशयासी वमपेली नामक. दूसरे हुए उन्नतिको सीढ़ियों पर आगे बढ़ रहा था। ऐसे पक गणित विदुने यीजगणितको उन्नतिकी चेष्टा की थी। समय मियेटर नामक एक गणितका गम्युदय हुमाये सन् १५७२ ई०में इसने एक वीजगणित प्रकाशित किया। गणित विद्या गोर अन्यान्य शास्त्रों को बहुत उन्नति कर जिस चतुर्थ पर्यायके समीकरण, करनेमे कार्डन अक्षम | गये हैं। वीजगणितमें इनका शान इतना प्रवर था, कि हुए थे, उसकी व्याख्या इस पुस्तक वह लिस्न गया है। इन्होंने जिन सब विपपोंको उस समय अपरिस्फुट भायसे उस समय पहले जिन समीकरणोंको लोग असाध्य आविष्कार किया था, उनमें दो वर्तमान समय गणित. समझने थे, उसने अपनी प्रणालीके अनुसार उनकी शास्त्र के उत्कर्षका मूल निहित है। वर्णमाला द्वारा व्यक्त समाधानसाध्यताका प्रमाण उपस्थित कर दिया है। और अव्यक्त राशि लिम्बनेको पद्धति इन्होंने ही पहले कार्डन और टारटालियाफे , समयमें अमनोमें दो : पहल आविष्कार की थी। इस पद्धतिके गुरुत्वको सभी गणितज्ञ विद्यमान थे । १६यी शताब्दी के मध्यभागमे । समझ न सकेंगे सही, किन्तु यह कहना व्यर्थ , ई, कि. इनकी प्टोफेलियस, और स्युवेलियस नामक प्रणोत : इसीसे ही वोजगणितके घरमेटिकर्षका सूत्रपात हुआ। . प्रन्थावली प्रकाशित हुई । इटली देशमें योज-! योजगणितफे साहाय्यस स्यामितिकं उत्कर्षसाधनपथ- गणितकी कितनी उन्नति हुई थी, उस समय-तक घेके ये हो आदि पथप्रदर्शक हैं। -बिलकुल अनभिज्ञ थे । वीजगणितके सम्बन्ध संख्या . . ज्यामितिमें वीजगणितके नियम प्रचलित होनेसे